Germany Fire: जर्मनी में इमारत की आग में केरल के तीन भारतीय छात्रों की मौत, हत्या के शक में पड़ोसी गिरफ्तार

बर्लिन/तिरुवनंतपुरम: जर्मनी के बोखुम शहर में एक रिहायशी इमारत में लगी आग में केरल के तीन भारतीय युवाओं की मौत हो गई है। मृतकों की पहचान कोल्लम की अंजलि शीला जॉय, इडुक्की की नोवा साबू और एर्नाकुलम के सिविन जॉनी के रूप में हुई है। बोखुम पुलिस और अभियोजन कार्यालय ने साफ किया है कि आग किसी तकनीकी खराबी से नहीं लगी थी। इसी इमारत में रहने वाले 41 वर्षीय रोमानियाई नागरिक को गिरफ्तार कर लिया गया है और अदालत ने उसे हिरासत में भेज दिया है।
बर्लिन स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात X पर पोस्ट कर तीनों की मौत की पुष्टि की। दूतावास ने लिखा, “नॉर्थ राइन-वेस्टफेलिया के बोखुम में आग की एक घटना में तीन भारतीय नागरिकों (दो महिलाएं और एक पुरुष) की दुखद मौत हो गई है। तीनों जर्मनी में पढ़ाई कर रहे थे।” दूतावास के मुताबिक बर्लिन स्थित दूतावास और फ्रैंकफर्ट स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास स्थानीय अधिकारियों और शोकाकुल परिवारों के संपर्क में हैं और हर जरूरी मदद दे रहे हैं।
तड़के सवा चार बजे भड़की आग, सीढ़ियों के रास्ते ऊपर तक फैली
पुलिस के बयान के अनुसार मंगलवार, 13 अक्टूबर को स्थानीय समय के मुताबिक तड़के करीब 4:15 बजे (भारतीय समय के अनुसार सुबह 7:45 बजे) लोगों ने बोखुम के होफस्टेडे इलाके में पोस्टस्ट्रासे पर बनी एक रिहायशी इमारत में आग लगने की सूचना दी। इस इमारत में कई परिवार रहते हैं। दमकल और पुलिस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं, लेकिन तीन लोगों को बचाया नहीं जा सका। उनके शव बाद में इमारत से निकाले गए।
जर्मन समाचार एजेंसी dpa के मुताबिक मौके पर अफरा-तफरी का माहौल था। ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोगों को दमकल की कई सीढ़ियों और जंपिंग कुशन की मदद से नीचे उतारा गया। आग बुझाने के दौरान बचावकर्मियों को एक फ्लैट में तीनों के शव मिले। इमारत की लकड़ी की सीढ़ियां आग में पूरी तरह जल गईं। पांच अन्य लोग धुएं की चपेट में आकर घायल हुए, जिन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।

‘तकनीकी खराबी नहीं’, इमारत में रहने वाले पड़ोसी पर हत्या का शक
बुधवार, 14 अक्टूबर को जारी पहले फॉलो-अप बयान में पुलिस और अभियोजन कार्यालय ने बताया कि आग की जांच करने वाले विशेषज्ञ की मदद से की गई विस्तृत पड़ताल के बाद तकनीकी खराबी की आशंका खारिज कर दी गई है। इसके बाद शक की सुई इसी इमारत में रहने वाले 41 वर्षीय रोमानियाई व्यक्ति पर गई। उसे अस्थायी तौर पर हिरासत में लिया गया और हत्या के मामलों की जांच करने वाली विशेष पुलिस टीम (मोर्डकमीशन) ने उससे पूछताछ की।
उसी शाम जारी दूसरे बयान में पुलिस ने कहा कि जांच के दौरान आरोपी पर शक और पुख्ता हुआ है। अभियोजन के अनुरोध पर एक न्यायाधीश ने उसका गिरफ्तारी वारंट जारी किया और उसे जांच पूरी होने तक हिरासत (Untersuchungshaft) में भेज दिया। एजेंसी के मुताबिक यह वारंट हत्या और ऐसी आगजनी के आरोप में जारी हुआ है, जिससे लोगों की मौत हुई। आरोपी ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर अब तक कुछ नहीं कहा है। पुलिस ने उसका नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
एजेंसी के अनुसार आरोपी पहले से मारपीट और संपत्ति से जुड़े अपराधों के मामलों में पुलिस के रिकॉर्ड में था। एक पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि आग लगने से दो दिन पहले, रविवार को, इसी इमारत में एक विवाद के सिलसिले में पुलिस को बुलाया गया था। हालांकि उस विवाद का आग से कोई संबंध है या नहीं, यह अभी साफ नहीं है। आरोपी ने ऐसा क्यों किया होगा, इसकी भी जांच की जा रही है। बोखुम के मेयर जॉर्ग लुकाट ने इस हादसे को ऐसी त्रासदी बताया है, “जैसी बोखुम ने दशकों से नहीं देखी।”
कोल्लम, इडुक्की और कालडी में पसरा मातम
तीनों मृतक केरल के अलग-अलग जिलों से थे। अंजलि शीला जॉय कोल्लम जिले के पेरिनाड की रहने वाली थीं। नोवा साबू इडुक्की जिले में कट्टप्पना के पास इरट्टयार की थीं, जबकि सिविन जॉनी एर्नाकुलम जिले के कालडी के निवासी थे। जर्मन पुलिस के मुताबिक मृतकों में 25 और 27 साल की दो महिलाएं और 26 साल का एक युवक शामिल हैं। केरल से मिली जानकारी के अनुसार तीनों इसी साल जर्मनी गए थे और कुछ ही हफ्ते पहले इस इमारत की दूसरी मंजिल के एक फ्लैट में रहने आए थे।
हादसे की खबर मिलते ही तीनों के घरों में कोहराम मच गया। केरल सरकार ने शवों को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य के पर्यटन मंत्री पी.सी. विष्णुनाथ ने बताया कि इसके लिए प्रवासी केरलवासियों के मामलों को देखने वाली राज्य सरकार की एजेंसी नोरका (NORKA) और भारतीय दूतावास के साथ तालमेल किया जा रहा है। उन्होंने अंजलि के परिवार से फोन पर बात भी की।

फिलहाल बोखुम अभियोजन कार्यालय की देखरेख में विशेष पुलिस टीम मामले की जांच कर रही है। भारतीय दूतावास ने कहा है कि घटना की जांच जर्मन अधिकारी कर रहे हैं और दूतावास परिवारों को हर संभव सहायता देता रहेगा। जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आग जानबूझकर क्यों लगाई गई और क्या इसका रविवार के विवाद से कोई संबंध है।

























































































































