Gajab Raat Trailer: विवादित ‘घूसखोर पंडत’ बनी ‘गजब रात’, एक रात में फंसे पुलिस अफसर बने मनोज बाजपेयी

मनोज बाजपेयी की जिस फिल्म के नाम पर महीनों तक विवाद चला, वह अब नए नाम और नए तेवर के साथ दर्शकों के सामने है। Netflix India ने गुरुवार, 15 अक्टूबर को ‘गजब रात’ का ट्रेलर जारी किया। यह वही फिल्म है, जिसे पहले ‘घूसखोर पंडत’ नाम से घोषित किया गया था। Gajab Raat Trailer में मनोज बाजपेयी एक ऐसे पुलिस अफसर के रूप में दिखते हैं, जो एक ही रात में ड्यूटी और लालच के बीच फंस जाता है। फिल्म 23 अक्टूबर को सीधे Netflix पर रिलीज होगी।
एक लड़की, एक रात और कई सवाल
ट्रेलर की शुरुआत नई दिल्ली के बीचोबीच एक दिल दहला देने वाली घटना से होती है, जहां चलती कार से एक लड़की को बेरहमी से बाहर फेंक दिया जाता है। पुलिस हरकत में आती है, लेकिन मौके पर मौजूद अफसर ने एंबुलेंस तक नहीं बुलाई होती। तभी मनोज बाजपेयी का किरदार अजय दीक्षित उसे जल्दी एंबुलेंस बुलाने को कहता है, ताकि लड़की के इलाज का सारा खर्च थाने के सिर न आ पड़े।
जांच आगे बढ़ती है तो लड़की की पहचान को लेकर अलग-अलग दावे सामने आने लगते हैं। इसी बीच अजय दीक्षित को रिश्वत की पेशकश भी होती है और वह अपने फर्ज और लालच के बीच उलझ जाता है। ट्रेलर में वह एक जगह कहता है कि इस नौकरी में चार दोस्त बनते हैं, तो आठ दुश्मन भी बन जाते हैं। नुसरत भरूचा उसकी प्रेमिका रोज़ी की भूमिका में हैं, जो पूछती है कि वह घर कब लौटेगा। जवाब में अजय अपने चिर-परिचित अंदाज में कहता है, “दुनिया कठोर है, रोज़ी। टाइम लगेगा, लेकिन आऊंगा जरूर।”
नीरज पांडे और मनोज बाजपेयी फिर साथ
‘गजब रात’ का निर्देशन रितेश शाह ने किया है, जो अब तक पटकथा लेखक के तौर पर जाने जाते रहे हैं। निर्देशक के रूप में यह उनकी पहली फिल्म है। फिल्म के क्रिएटर नीरज पांडे हैं और इसे उनके बैनर फ्राइडे फिल्मवर्क्स ने बनाया है। Netflix के मुताबिक, इस फिल्म के जरिए नीरज पांडे और मनोज बाजपेयी करीब एक दशक बाद साथ आए हैं। दोनों इससे पहले ‘स्पेशल 26’ (2013) और ‘अय्यारी’ (2018) में साथ काम कर चुके हैं।
फिल्म में मनोज बाजपेयी के साथ साकिब सलीम, अक्षय ओबेरॉय, दिव्या दत्ता, कीकू शारदा और नुसरत भरूचा अहम भूमिकाओं में हैं। रिपोर्टों के अनुसार, श्रद्धा दास भी फिल्म का हिस्सा हैं। Netflix के साथ यह नीरज पांडे का चौथा प्रोजेक्ट है। इससे पहले वह ‘खाकी’ सीरीज, ‘सिकंदर का मुकद्दर’ और ‘तस्करी’ ला चुके हैं।
नाम पर क्यों मचा था बवाल
इस साल की शुरुआत में Netflix India ने 2026 की अपनी फिल्मों और सीरीज की सूची जारी की थी। तब इस फिल्म को ‘घूसखोर पंडत’ नाम से पेश किया गया था। नाम सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई और कई लोगों ने इसे जातिसूचक और अपमानजनक बताया। आपत्ति यह थी कि ‘पंडत’ शब्द को घूसखोरी से जोड़कर ब्राह्मण समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाई जा रही है।
The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, विवाद इतना बढ़ा कि लखनऊ के हजरतगंज थाने में FIR दर्ज हुई। एक शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी किया। बसपा प्रमुख मायावती समेत कई नेताओं और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों ने भी फिल्म के नाम की निंदा की।
अदालत तक पहुंचा मामला
विवाद अदालतों तक भी गया। The Indian Express के अनुसार, एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म पर रोक लगाई थी और निर्माताओं से नाम बदलने को कहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, पीठ ने टिप्पणी की थी कि ऐसे शीर्षक से समाज के किसी वर्ग को बदनाम क्यों किया जाए। अदालत ने यह भी कहा था कि जब तक बदला हुआ नाम नहीं बताया जाता, फिल्म रिलीज नहीं होने दी जाएगी।
वहीं India Today के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट में भी फिल्म की रिलीज रोकने के लिए याचिका दायर हुई थी। Netflix ने अदालत को बताया कि निर्माताओं ने आपत्तियों को देखते हुए ऐसा नया नाम रखने का फैसला किया है, जो फिल्म की कहानी और मकसद को बेहतर ढंग से दर्शाता है। याचिकाकर्ता ने कहा कि उसकी शिकायत दूर हो गई है, जिसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
निर्माता और अभिनेता ने क्या कहा था
विवाद के दौरान नीरज पांडे ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर माना था कि फिल्म के नाम से दर्शकों के एक वर्ग की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने बताया था कि फिल्म की सारी प्रचार सामग्री हटा ली गई है। उनका कहना था कि यह एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और ‘पंडत’ शब्द सिर्फ एक काल्पनिक किरदार के बोलचाल वाले नाम के तौर पर इस्तेमाल हुआ है। उनके मुताबिक, कहानी एक व्यक्ति के कामों और फैसलों पर केंद्रित है, किसी जाति, धर्म या समुदाय पर नहीं।
मनोज बाजपेयी ने भी कहा था कि वह लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हैं। उनके अनुसार, यह कमियों से भरे एक इंसान के आत्मबोध की कहानी है, किसी समुदाय पर टिप्पणी नहीं।
अब दर्शकों की अदालत में फैसला
नए नाम के साथ जारी Netflix के बयान में मनोज बाजपेयी ने कहा कि उन्हें हमेशा ऐसे किरदार आकर्षित करते रहे हैं, जिन्हें आसानी से परिभाषित नहीं किया जा सकता। नीरज पांडे के मुताबिक, फिल्म में तनाव सिर्फ उस एक रात की घटनाओं से नहीं, बल्कि किरदारों के नैतिक द्वंद्व से भी पैदा होता है। नाम बदलने और अदालती लड़ाई के बाद अब असली परीक्षा 23 अक्टूबर को होगी, जब यह थ्रिलर Netflix पर दर्शकों के सामने होगी।


































































































































