अक्टूबर 18, 2026
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France Protests: महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे 5.5 लाख लोग, उपद्रवियों ने 143 साल पुराने टाउन हॉल को आग के हवाले किया

फ्रांस के लिमोज शहर में शनिवार रात आग की लपटों में घिरा ऐतिहासिक टाउन हॉल और उसका घंटाघर

पेरिस/लिमोज: फ्रांस में बढ़ती महंगाई और स्कूलों की बदहाली के खिलाफ शनिवार, 17 अक्टूबर को हुए देशव्यापी प्रदर्शन कई शहरों में हिंसक हो गए। मध्य फ्रांस के लिमोज शहर में उपद्रवियों ने 143 साल पुराने ऐतिहासिक टाउन हॉल में जबरन घुसकर आग लगा दी। लपटों में इमारत की छत और उसका ऊंचा घंटाघर ढह गया। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक शहर की पहचान मानी जाने वाली यह इमारत काफी हद तक नष्ट हो चुकी है।

फ्रांस के गृह मंत्री लॉरों नुनेज के मुताबिक देशभर में निकले करीब 110 मार्च में लगभग 5.5 लाख लोग शामिल हुए, जिनमें करीब 1.1 लाख लोग अकेले राजधानी पेरिस में थे। प्रदर्शन में शामिल मजदूर संगठन सीजीटी ने यह संख्या 8 लाख बताई है। प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नु के मुताबिक हिंसा के सिलसिले में देशभर में करीब 1,200 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि 150 पुलिसकर्मी और जेंडरमे (फ्रांस की अर्धसैनिक पुलिस) घायल हुए।

शाम 6 बजे टाउन हॉल में घुसे दंगाई

ऑत-वियेन प्रांत के प्रीफेक्ट (प्रांत में केंद्र सरकार के प्रतिनिधि) मॉरिस बाराट की ओर से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, दोपहर करीब 2 बजे लिमोज के कासो इलाके में लगभग 2,000 लोग जमा हुए। इनमें 500 से ज्यादा ऐसे लोग थे, जो लगातार टकराव पर उतारू थे और उन्होंने सुरक्षा बलों पर हमला कर दिया। फेंकी गई चीजों से कई पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें से चार को ज्यादा गंभीर चोटें आईं। पुलिस के चार वाहन भी पूरी तरह नष्ट कर दिए गए।

इसके बाद भीड़ ने A20 हाईवे जाम कर दिया, जिसके चलते प्रशासन को हाईवे का एक हिस्सा दोनों दिशाओं में बंद करना पड़ा। शाम 5 बजे से उपद्रवियों का एक समूह शहर के केंद्र की ओर बढ़ने लगा। बयान के मुताबिक शाम करीब 6 बजे दंगाई जबरन टाउन हॉल में घुस गए और आग लगा दी, जबकि उस वक्त इमारत में कर्मचारी और आम लोग मौजूद थे। दमकल विभाग की कई टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं, फिर भी इस धरोहर इमारत का बड़ा हिस्सा बचाया नहीं जा सका।

पुलिस ने जब उपद्रवियों को टाउन हॉल के सामने से हटाया, तो उन्होंने प्रीफेक्चर (प्रांतीय प्रशासन का मुख्यालय) में भी जबरन घुसने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। इसके बाद ज्यां जोरेस स्ट्रीट इलाके में कई दुकानों में लूटपाट की गई। प्रशासन ने बताया कि आरोपियों की तलाश जारी है और अब तक 19 लोगों को पुलिस हिरासत में लिया गया है।

छत गिरी, घंटाघर भी ढहा

प्रीफेक्ट बाराट ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि पश्चिमी हिस्से को छोड़कर इमारत की छत नीचे की मंजिलों पर गिर गई है और बाहरी ढांचे का करीब दो-तिहाई हिस्सा खत्म हो चुका है। उन्होंने इसे धरोहर के लिए ‘तबाही’ और ‘गुंडों की सोची-समझी करतूत’ बताया। रविवार सुबह फ्रांसीसी न्यूज चैनल एलसीआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि आग अब काबू में है।

लिमोज का टाउन हॉल 1883 में बनकर तैयार हुआ था। इसके अग्रभाग, छत और सामने बने भव्य फव्वारे को फ्रांस के ऐतिहासिक स्मारकों की सूची में शामिल किया गया है। आगजनी के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें लपटों के बीच इमारत का घंटाघर गिरता दिख रहा है।

‘आग में एक स्मारक जला है, गणतंत्र नहीं’

लिमोज के मेयर गियोम गेरिन ने शनिवार रात मीडिया से कहा, “जो हुआ, उसकी निंदा के लिए शब्द नहीं हैं, यह बेहद घिनौना है। उन्होंने एक ऐसी इमारत नष्ट कर दी, जिसे लिमोज के लोग बहुत प्यार करते हैं, लेकिन वे सार्वजनिक सेवा को खत्म नहीं कर पाए। आग में एक स्मारक जला है, गणतंत्र नहीं।” उन्होंने बताया कि नगर प्रशासन इस मामले में शिकायत दर्ज कराएगा और रविवार से ही कामकाज जारी रखने की व्यवस्था की जाएगी।

टाउन हॉल में आगजनी के बाद शनिवार रात मीडिया से बात करते लिमोज के मेयर गियोम गेरिन
टाउन हॉल में आगजनी पर शनिवार रात प्रतिक्रिया देते लिमोज के मेयर गियोम गेरिन। फोटो: Radio France / गारांस कैयेत (ICI)

मैक्रों बोले- दोषियों को सजा मिलेगी

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने X पर लिखा, “हमारे गणतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है। जिन लोगों ने तोड़फोड़ की, प्रीफेक्चर और दुकानों पर हमले किए और हमारे टाउन हॉल तक लूट लिए, उन पर मुकदमा चलेगा और उन्हें सजा मिलेगी।” उन्होंने प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा करने वाले सुरक्षा बलों को पूरे देश का समर्थन भी जताया।

प्रधानमंत्री लेकोर्नु ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए गणतंत्र में पूरी जगह है, लेकिन आगजनी, लूटपाट और हमलों के लिए कोई जगह नहीं। उनके मुताबिक कई शहरों में अति-वामपंथी समूहों ने हिंसा को अंजाम दिया और लूटपाट के इरादे से अपराधी भी इनमें शामिल हो गए। उन्होंने चेतावनी दी कि राष्ट्रपति चुनाव से पहले इस हिंसा को ‘वार्म-अप’ बनाने वालों के आगे सरकार नहीं झुकेगी। लेकोर्नु ने यह भी कहा कि सरकार उस विधेयक पर चर्चा पूरी करेगी, जिसके तहत तोड़फोड़ करने वालों से ही नुकसान की भरपाई कराई जाएगी।

वामपंथी नेता ज्यां-लुक मेलेंशों ने लूटपाट और आगजनी की निंदा तो की, लेकिन पुलिस पर प्रदर्शनकारियों के साथ ज्यादती का आरोप भी लगाया। लेकोर्नु ने इसे जिम्मेदारी उलटने की ‘खतरनाक और कुटिल’ कोशिश बताया। वहीं दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की ‘जायज मांगों’ को अति-वामपंथ ने बंधक बना लिया है।

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पेरिस से ल्योन तक आगजनी और लूट

राजधानी पेरिस में मुख्य मार्च दोपहर तक काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा, लेकिन शाम होते-होते प्लास दे ला रिपब्लिक समेत कई इलाकों में वाहनों को आग लगा दी गई और दुकानों में लूटपाट हुई। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए दंगा-रोधी पुलिस को आंसू गैस और पानी की बौछारों का सहारा लेना पड़ा। पेरिस पुलिस प्रीफेक्चर ने शहर में कई जगहों पर आग बुझाते दमकलकर्मियों का वीडियो भी जारी किया।

पेरिस में प्रदर्शन के दौरान सड़क पर जलते वाहनों और कूड़ेदानों की आग बुझाता दमकलकर्मी
पेरिस में प्रदर्शन के दौरान सड़क पर लगी आग बुझाता दमकलकर्मी। फोटो: वीडियो ग्रैब, X/@prefpolice (पेरिस पुलिस प्रीफेक्चर)

ल्योन में शहर के ऐतिहासिक पर्यटन कार्यालय की इमारत को आग लगा दी गई, जिसे मेयर ग्रेगोरी डूसे ने ‘त्रासदी’ बताया। सेंट-एटिएन के मेयर रेजिस जुआनिको के मुताबिक वहां एक छोटे विस्फोटक से एक युवक का हाथ उड़ गया। लील शहर में उपद्रवी एपल के एक स्टोर में घुस गए और उसे खाली कर दिया। गृह मंत्रालय ने मार्सेई, रेन, तुलूज और आंजे समेत कई शहरों में नकाबपोश लोगों की ‘सुनियोजित हिंसा’ की बात कही है।

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आखिर क्यों भड़का आंदोलन?

फ्रांस में पिछले कई हफ्तों से लाखों छात्र ‘लीसे’ कहे जाने वाले माध्यमिक स्कूलों (15 से 18 साल के छात्रों के लिए) में स्टाफ की कमी और जर्जर सुविधाओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। अब इस आंदोलन में मजदूर संगठन और महंगाई से नाराज दूसरे समूह भी जुड़ गए हैं। इनमें 2018 में बढ़ती महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरा ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन भी शामिल है। सरकार ने 8 अक्टूबर को रियायत के तौर पर 3,000 अतिरिक्त अस्थायी शिक्षकों की भर्ती का वादा किया था, लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शन थमने के बजाय और तेज हो गए हैं।

यह उथल-पुथल ऐसे समय में हो रही है, जब फ्रांस गहरी राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में है। राष्ट्रपति मैक्रों का कार्यकाल अगले साल खत्म हो रहा है और अप्रैल में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले सियासी माहौल पहले से गरम है। ऐसे में शनिवार की हिंसा ने सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

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