अक्टूबर 20, 2026
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Ritu Barala Case: FIR की मांग पर जयपुर कमिश्नरेट में रातभर डटे रहे डोटासरा, आधी रात धरने में पहुंचे गहलोत

जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में रितु बराला के साथ बैठे गोविंद सिंह डोटासरा और कांग्रेस नेता

जयपुर: दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला से कथित मारपीट के मामले में जीरो FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर राजस्थान कांग्रेस ने सोमवार की पूरी रात जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में गुजार दी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, कई विधायक और कार्यकर्ता कमिश्नरेट में ही धरने पर बैठे रहे। आधी रात के आसपास पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी धरने में पहुंच गए।

मंगलवार सुबह तक FIR दर्ज नहीं हुई थी। डोटासरा ने सुबह करीब 6 बजे X पर लिखा, “रातभर डटे हैं, हक लेकर उठेंगे। FIR दर्ज कराएंगे, न्याय दिलाकर रहेंगे।” इसके कुछ देर बाद उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से ‘जयपुर कूच’ का आह्वान किया। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने भी छात्र कार्यकर्ताओं से मंगलवार सुबह कमिश्नरेट पहुंचने को कहा है।

रितु बराला का आरोप क्या है?

झुंझुनूं की रहने वाली 27 साल की रितु बराला एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव हैं। 13 अक्टूबर को एनएसयूआई ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के पास प्रदर्शन किया था। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बस में बैठाया। रितु का आरोप है कि इसी बस में दिल्ली पुलिस की महिला कांस्टेबल चंचल यादव ने उनकी गर्दन पकड़ी, उन्हें सीट पर धकेला, नाखूनों से चेहरा खरोंचा और थप्पड़ मारा। उनका यह भी आरोप है कि थाने ले जाने के बाद उनके पैरों पर लाठी से मारा गया।

14 अक्टूबर को राहुल गांधी के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में रितु ने कहा था, “जब हम बस से उतरने की कोशिश कर रहे थे, तो महिला पुलिसकर्मी चंचल यादव ने मेरा गला कसकर पकड़ लिया।” इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने उन्हें ‘शेरनी’ कहा था।

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस के सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कथित दुर्व्यवहार और बस के अंदर हुई घटना को लेकर उलटे एनएसयूआई की महिला कार्यकर्ताओं के खिलाफ ही FIR दर्ज की है। कांस्टेबल पर लगे आरोपों पर दिल्ली पुलिस का कोई आधिकारिक बयान अब तक सामने नहीं आया है।

राहुल गांधी के फोन के बाद जयपुर पहुंचा मामला

16 अक्टूबर को राहुल गांधी ने X पर लिखा था कि दिल्ली पुलिस छात्रों पर हुई मारपीट की FIR दर्ज करने से इनकार कर रही है। उन्होंने बताया था कि केरल की अथिरा और राजस्थान की रितु समेत कई छात्रों को पीटा गया, और केरल में इस मामले में जीरो FIR पहले ही दर्ज हो चुकी है। इसके बाद एक वीडियो सामने आया, जिसमें वे डोटासरा को फोन पर राजस्थान में FIR दर्ज कराने के लिए कहते दिखे।

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सोमवार को रितु बराला कांग्रेस विधायक रफीक खान और अमीन कागजी के साथ मोती डूंगरी थाने पहुंचीं। पुलिस ने शिकायत तो ले ली, लेकिन FIR दर्ज नहीं की; कुछ रिपोर्टों के मुताबिक शिकायत को परिवाद के रूप में रख लिया गया। इसके बाद डोटासरा समेत कांग्रेस नेता शाम को कमिश्नरेट पहुंचे। बाहर कार्यकर्ताओं की भीड़ बढ़ने पर कमिश्नरेट का मुख्य द्वार बंद कर दिया गया और सुरक्षा बढ़ा दी गई।

डोटासरा ने कहा, “दुर्भाग्य की बात है कि जीरो FIR दर्ज कराने के लिए आने की सूचना देने के बावजूद पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल दफ्तर से चले गए। मैंने उनसे कह दिया है कि जब तक FIR दर्ज नहीं होगी, हम यहां से नहीं जाएंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि कमिश्नरेट स्तर पर बात नहीं बनी तो कांग्रेस पुलिस महानिदेशक (DGP) के पास जाएगी।

जयपुर पुलिस कमिश्नरेट परिसर में रात में गद्दों पर लेटकर धरना देते कांग्रेस नेता
सोमवार रात जयपुर पुलिस कमिश्नरेट परिसर में धरने पर बैठे कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता। फोटो: पीटीआई वीडियो ग्रैब

आधी रात पहुंचे गहलोत, बोले- केरल में हो गई तो यहां क्यों नहीं

गहलोत पंचायत चुनाव के प्रचार के लिए जोधपुर संभाग का दौरा करके लौट रहे थे। धरने में पहुंचने के बाद उन्होंने X पर लिखा, “न्याय मिलने तक हम चुप नहीं बैठेंगे। भाजपा सरकार बताए कि FIR दर्ज करने में देरी क्यों हो रही है?” इससे पहले रात में मीडिया के सवाल पर उन्होंने कहा था कि डोटासरा सोच-समझकर धरने पर बैठे हैं और जब केरल में जीरो FIR हो गई, तो यहां क्यों नहीं हो सकती। बाद में पार्टी नेताओं के आग्रह पर गहलोत घर लौट गए, जबकि डोटासरा और बाकी नेता कमिश्नरेट में ही रहे।

धरने में एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़, पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सारिका सिंह और जयपुर जिला अध्यक्ष सुनील शर्मा भी मौजूद रहे। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि कानून सभी राज्यों में एक जैसा है; अगर दूसरे राज्य में FIR दर्ज हो सकती है, तो राजस्थान में क्यों नहीं।

रितु बराला मामले पर मीडिया से बात करते पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत
रितु बराला मामले में जीरो FIR न दर्ज होने पर मीडिया से बात करते पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत। फोटो: @ashokgehlot51 / X वीडियो ग्रैब

जीरो FIR पर क्यों अड़ी है कांग्रेस?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(1) के तहत संज्ञेय अपराध की सूचना देश के किसी भी थाने में दी जा सकती है, चाहे घटना कहीं भी हुई हो। ऐसी FIR को जीरो FIR कहा जाता है, जिसे बाद में उस थाने को भेज दिया जाता है जिसके इलाके में घटना हुई। हालांकि, इसी धारा की उपधारा (3) के तहत तीन से सात साल तक की सजा वाले अपराधों में थाना प्रभारी DSP या उससे वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति लेकर FIR से पहले 14 दिन के भीतर प्रारंभिक जांच भी कर सकता है।

जयपुर पुलिस ने FIR दर्ज न करने की वजह पर अब तक कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है। कांग्रेस का कहना है कि FIR दर्ज होने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होने तक विरोध जारी रहेगा।

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मामला अब सिर्फ एक शिकायत का नहीं रहा। एक ओर दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारियों पर ही केस दर्ज कर चुकी है, दूसरी ओर कांग्रेस राजस्थान में जीरो FIR को ‘बेटी के सम्मान’ का सवाल बना रही है। मंगलवार को जयपुर पुलिस का अगला कदम तय करेगा कि यह टकराव थाने तक सीमित रहता है या अदालत तक पहुंचता है।

Ritu Barala Case: FIR की मांग पर जयपुर कमिश्नरेट में रातभर डटे रहे डोटासरा, आधी रात धरने में पहुंचे गहलोत

Ritu Barala Case: FIR की मांग पर

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