अक्टूबर 20, 2026
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NMC Penalty Rules: मेडिकल कॉलेजों पर ₹1 करोड़ तक जुर्माने वाले नियम रद्द, फर्जी रिकॉर्ड पर ₹5 लाख दंड भी हटा

NMC Penalty Rules: चेन्नई स्थित मद्रास मेडिकल कॉलेज की इमारत (प्रतीकात्मक फोटो)

नई दिल्ली: देश में मेडिकल शिक्षा की निगरानी करने वाले राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) ने मेडिकल कॉलेजों पर जुर्माने और कार्रवाई तय करने वाले 2023 के नियम तत्काल प्रभाव से वापस ले लिए हैं। इन नियमों के तहत कमियां मिलने पर किसी कॉलेज पर हर उल्लंघन के लिए एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता था। फर्जी रिकॉर्ड जमा करने वाले डॉक्टरों और अधिकारियों पर पांच लाख रुपये तक का निजी जुर्माना भी इसी नियमावली का हिस्सा था।

ये नियम मेंटेनेंस ऑफ स्टैंडर्ड्स ऑफ मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशंस, 2023 (MSMER-2023) के नाम से जाने जाते थे। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, NMC ने 14 अक्टूबर की अधिसूचना के जरिये इन्हें रद्द कर दिया है, जो भारत के राजपत्र (गजट) में प्रकाशित हुई है। ये नियम 19 सितंबर 2023 को अधिसूचित हुए थे और दो दिन बाद 21 सितंबर 2023 को गजट में छपे थे।

मान्यता रोकने से लेकर सीटें घटाने तक का था प्रावधान

MSMER-2023 एक तरह से NMC की प्रवर्तन पुस्तिका थी, जिसमें गड़बड़ी के हिसाब से कार्रवाई की सीढ़ी तय थी। हल्के मामलों में चेतावनी देकर कमी दूर करने का निर्देश दिया जाता था। गंभीर मामलों में कॉलेज की मान्यता पांच शैक्षणिक वर्षों तक रोकी या वापस ली जा सकती थी। सीटें घटाने, किसी कोर्स में दाखिले रोकने और कॉलेज की अनुमति वापस लेने की सिफारिश करने तक का प्रावधान था।

नियमों में यह भी लिखा था कि अगर कोई कॉलेज बिचौलियों के जरिये NMC या उसके बोर्डों पर दबाव बनाने की कोशिश करे, तो उसके सभी लंबित आवेदनों पर काम तुरंत रोक दिया जाएगा। कार्रवाई से असंतुष्ट कॉलेज 60 दिन के भीतर NMC में अपील कर सकता था। वहां से राहत न मिलने पर या 45 दिन में फैसला न होने पर वह 30 दिन के भीतर केंद्र सरकार के पास जा सकता था, जिसका फैसला अंतिम माना जाता था।

फर्जी रिकॉर्ड पर निजी जुर्माने वाली धारा भी खत्म

नियमावली की सबसे अहम धारा वह थी, जो संस्थान के साथ-साथ व्यक्तियों को भी जवाबदेह बनाती थी। इसके तहत झूठा घोषणापत्र, दस्तावेज या मरीजों का रिकॉर्ड जमा करने वाले फैकल्टी सदस्य, विभागाध्यक्ष, डीन, डायरेक्टर या डॉक्टर पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता था। उनके खिलाफ पेशेवर कदाचार की कार्रवाई का रास्ता भी खुला था।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, यह प्रावधान खास तौर पर ‘घोस्ट फैकल्टी’ यानी सिर्फ कागजों पर दिखाए जाने वाले शिक्षकों और मरीजों की फर्जी फाइलों जैसी गड़बड़ियों पर लगाम के लिए था। अब यह खास जुर्माना नहीं रहा। हालांकि, फर्जी दस्तावेज बनाना पहले की तरह अपराध है और ऐसे मामलों में आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है।

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सालाना रिपोर्ट जारी रहेगी, पुराने फैसले नहीं बदलेंगे

NMC ने साफ किया है कि हर मेडिकल कॉलेज को एनुअल डिस्क्लोजर रिपोर्ट (ADR) यानी सालाना खुलासा रिपोर्ट पहले की तरह जमा करनी होगी। इसमें कॉलेजों को अपनी फैकल्टी, ढांचे और सुविधाओं का ब्योरा देना होता है। यह शर्त NMC अधिनियम, 2019 की धारा 24(i) और 25(h) से जुड़ी है, इसलिए नियमावली हटने का इस पर असर नहीं पड़ेगा।

अधिसूचना के मुताबिक, इन नियमों के तहत पहले की गई कार्रवाई, दी गई मंजूरियां, नवीनीकरण और आदेश जस के तस रहेंगे। पहले से लंबित आवेदन, अपील और जांच भी 2023 के नियमों के हिसाब से ही निपटाए जाएंगे। वहीं, नियम वापस लिए जाने के बाद सामने आने वाले मामलों पर NMC अधिनियम, 2019 और उस समय लागू नियम ही लागू होंगे।

पीटीआई की रिपोर्ट में नियम वापस लेने की वजह नहीं बताई गई है। ऐसे में अब नजर इस पर रहेगी कि कमियों वाले कॉलेजों पर कार्रवाई के लिए NMC कोई नई व्यवस्था लाता है या नहीं।

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