Mohan Bhagwat Speech: भागवत बोले- आंदोलन राजनीति का साधन न बनें, OTT पर नियमों के बारे में सोचे सरकार

नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को विजयादशमी उत्सव के मंच से देश में चल रहे आंदोलनों पर साफ संदेश दिया। रेशिमबाग मैदान में स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इतने बड़े समाज में समस्याएं हैं और आंदोलन होना भी स्वाभाविक है, लेकिन आंदोलन समाधान देने के लिए होने चाहिए। उनके मुताबिक, जब आंदोलन राजनीति का साधन बन जाता है, तो उसका फायदा भारत को दबाना चाहने वाली ताकतें उठाती हैं।
इसी भाषण में भागवत ने OTT प्लेटफॉर्म पर नियम बनाने के बारे में सरकार से विचार करने को कहा, नशे को गंभीर राष्ट्रीय समस्या बताया और चेताया कि AI जैसी उपयोगी तकनीक से भी झूठ और ठगी के नए तरीके निकल रहे हैं। यह कार्यक्रम संघ के 101वें स्थापना दिवस और शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के समापन के मौके पर हुआ। दैनिक जागरण के प्रधान संपादक संजय गुप्ता इसमें मुख्य अतिथि थे।

‘पश्चिम से चली आंधी’ और आंदोलनों पर चेतावनी
संघ की ओर से जारी भाषण के लिखित पाठ के मुताबिक भागवत ने कहा, “भारत सहित सारे विश्व में जो-जो भद्रता, मांगल्य, सांस्कृतिक व मानवीय संस्कार है, वह सारा नष्ट-भ्रष्ट, उद्ध्वस्त करने की आसुरी प्रतिज्ञा लेकर पश्चिम से एक आंधी चली है।” उन्होंने कहा कि दुनिया के तथाकथित विकसित देश भी इससे परेशान हैं और ऐसी ताकतों के लिए भारत सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी है। इसलिए वे भारत, हिंदू समाज और संघ को तोड़ने की योजना बनाकर काम करती हैं। भागवत के शब्दों में, “क्षुद्र सत्तास्वार्थ तथा विवेकहीनता के कारण कुछ महत्वाकांक्षी नेता लोग भी शामिल होते हैं।”
आंदोलनों पर उन्होंने कहा कि यह बात आंदोलन करने वाले समूहों, कानून-व्यवस्था संभालने वाले शासन-प्रशासन और राजनीतिक नेताओं, तीनों पर समान रूप से लागू होती है। किसी की करनी से समाज में द्वेष या विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए और भावनाएं तीव्र होने पर भी हर कदम संविधान और कानून की मर्यादा में होना चाहिए। उन्होंने कहा, “वोट, सस्ती लोकप्रियता अथवा राजनीतिक लाभ का लोभ हमारे विवेक व सद्भावना पर हावी न हो, यह चिंता करनी ही पड़ेगी।”
भागवत ने ऐसी ताकतों की ‘कार्यपद्धति’ भी गिनाई: मतभेदों को मनभेद में बदलना, समस्याओं के बहाने लोगों में खुद को पीड़ित मानने की भावना (victimhood) भरना, देश की व्यवस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करना और अराजकता का माहौल बनाना। अपनी बात समझाने के लिए उन्होंने आशा भोसले के गाए एक पुराने मराठी गीत की पंक्तियां भी सुनाईं, जिनका भाव है कि भोले-भाले लोगों को बहकाकर भेदभाव बढ़ाने वाली दुष्टता अंधेरे में वार करती है, इसलिए सावधान रहकर लक्ष्य पर ध्यान रखना चाहिए।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, लिखित भाषण से अलग बोलते हुए भागवत ने फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश का जिक्र किया और कहा कि लोग मानते हैं कि सत्ता बदलने से हालात बदल जाएंगे, लेकिन ऐसा कहीं नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी कोशिशें भारत में भी हो रही हैं, पर आंदोलन से समस्या सुलझ जाए, ऐसा बहुत कम होता है।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एनएसयूआई और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) जैसे संगठनों के प्रदर्शन हो रहे हैं। पिछले हफ्ते ‘सत्ता परिवर्तन’ पर वकील प्रशांत भूषण के बयान को लेकर भी विवाद हुआ था। हालांकि, भागवत ने अपने भाषण में किसी संगठन, दल या नेता का नाम नहीं लिया।
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OTT पर नियम, नशे के खिलाफ देशव्यापी मुहिम
भाषण का बड़ा हिस्सा नई पीढ़ी पर केंद्रित रहा। भागवत ने कहा कि सोशल मीडिया से मिलने वाली जानकारी को नई पीढ़ी बिना सही-गलत का फर्क किए अपना लेती है और इसके बुरे नतीजे देखने के बाद कई देशों ने इन माध्यमों पर पाबंदियां लगाई हैं। उन्होंने कहा, “हमारे अपने देश में भी इस प्रकार की आवश्यकता, विशेषत: ‘OTT platforms’ को लेकर, समाज में अनुभव की जा रही है। शासन प्रशासन को इसका विचार करना चाहिये।” साथ ही उन्होंने जोड़ा कि जानकारी खुलकर मिलती रहे, तब भी युवाओं को उचित और अनुचित में फर्क करना सिखाना होगा।
नशे पर भागवत ने कहा, “नशा एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या है और उसके परिहार के लिए समय रहते शासन-प्रशासन तथा समाज को प्रयास प्रारम्भ करने चाहिए।” उन्होंने बताया कि इस समस्या से निपटने में लगे सभी लोगों को साथ लेकर स्वयंसेवक देशभर में इसके खिलाफ एक व्यापक मुहिम खड़ी करने की कोशिश करेंगे।
तकनीक पर उन्होंने कहा कि विज्ञान और नई तकनीक का स्वागत होना चाहिए, लेकिन तकनीक केवल साधन है। उसके सही इस्तेमाल का विवेक और नैतिक अनुशासन न हो, तो “कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे अत्यंत उपयोगी तंत्रज्ञान से भी मनुष्य को भ्रमित करने वाले, ठगने वाले, झूठ के उपक्रम निकलते रहेंगे।” विकास के मॉडल पर बोलते हुए उन्होंने नेपाल में हाल में आई भीषण त्रासदी का जिक्र किया और कहा कि इसके मूल में कहीं न कहीं पूरे हिमालयी क्षेत्र में हुआ एकतरफा विकास है। इसलिए विकास की समग्र और संतुलित दृष्टि जरूरी है।

वंदे मातरम् और कैप्टन स्मित मच्छार का जिक्र
एकता पर बोलते हुए भागवत ने 1905 के बंग-भंग का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि लॉर्ड कर्जन ने बंगाल को सांप्रदायिक आधार पर बांटना चाहा, तो समाज ने डटकर विरोध किया और ब्रिटिश सरकार को फैसला वापस लेना पड़ा। उसी दौर में ‘वंदे मातरम्’ एकता का प्रतीक बना। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् हमारा राष्ट्रगीत है और “उसे स्वाभिमान से, उच्च कंठ से तथा संपूर्ण गाने में कोई संकोच या विरोध नहीं होना चाहिए।” 1947 के विभाजन के लिए उन्होंने अलगाव की सोच और तुष्टीकरण की मानसिकता को जिम्मेदार बताया।
भागवत ने कहा कि संगठित और सामर्थ्यवान हिंदू समाज की बात करना सभी पंथों के सम्मान या राष्ट्र की भावनात्मक एकता के खिलाफ नहीं है, क्योंकि हिंदू समाज का स्वभाव सबको साथ लेकर चलने वाला है। इसी संदर्भ में उन्होंने फ्लाईदुबई के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार का नाम लिया। 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान में सह-पायलट के हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया था, जिसके बाद यात्रियों और क्रू ने हमलावर को काबू किया और विमान की सऊदी अरब में सुरक्षित आपात लैंडिंग हुई। भागवत के मुताबिक, पीढ़ियों से मिले इसी स्वभाव और संस्कार ने उन्हें अपनी जान दांव पर लगाकर लोगों को बचाने की प्रेरणा दी।
शताब्दी वर्ष में 10 करोड़ से ज्यादा घरों तक पहुंचने का दावा
भागवत ने शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों का ब्योरा भी रखा। संघ के मुताबिक, संपर्क अभियान के तहत देशभर में 10 करोड़ से ज्यादा घरों तक पहुंच बनाई गई।
| कार्यक्रम | संघ के मुताबिक आंकड़ा |
|---|---|
| संपर्क अभियान | 4,61,527 गांवों और 41,076 शहरी बस्तियों के 10,19,88,511 घर |
| प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठी | 1,117 जिलों में, 4,26,497 नागरिक शामिल |
| सद्भावना बैठक | 5,036 खंडों में |
| हिंदू सम्मेलन | 34,187 मंडलों में |
| युवा सम्मेलन | 39,25,225 युवा शामिल |
उन्होंने बताया कि शताब्दी वर्ष में शुरू की गई ‘पंच परिवर्तन’ की पांच पहलों, यानी सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, स्व-बोध व स्वदेशी और नागरिक अनुशासन का समाज के सभी वर्गों में स्वागत हुआ है। उनके मुताबिक यह एक साल का कार्यक्रम नहीं, बल्कि रोजमर्रा के व्यवहार में बदलाव की शैली है।
मुख्य अतिथि संजय गुप्ता ने अपने संबोधन में भाजपा का भी जिक्र किया। संघ की ओर से जारी उनके भाषण के पाठ के मुताबिक उन्होंने कहा, “यह मानने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए कि इस पार्टी की सफलता के पीछे संघ की ही दृढ़ वैचारिकता और उसकी संगठन शक्ति है।” भाषण से पहले भागवत ने शस्त्र पूजन किया और संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी। रिपोर्टों के मुताबिक, कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद रहे।
भागवत ने भाषण के आखिर में कहा कि शताब्दी के लक्ष्य पूरे करने के बाद संघ अब समाज की एक संगठित और पुरुषार्थी शक्ति खड़ी करने की ओर बढ़ेगा। उनका कहना था कि भारत को आगे ले जाने का कोई छोटा रास्ता नहीं है; यह हर नागरिक के रोज के छोटे-छोटे अच्छे कामों से ही होगा।
























































































































































