Rubio Jamnagar Visit: वेनेजुएला के तेल पर रिलायंस से बात करने जामनगर पहुंचे रुबियो, भारत को बताया ‘रिफाइनिंग सुपरपावर’

जामनगर: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत दौरे के दूसरे और आखिरी पड़ाव में बुधवार दोपहर गुजरात के जामनगर पहुंच गए। यहां वे मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स देखेंगे और कंपनी के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत करेंगे। रुबियो ने एक दिन पहले मुंबई में साफ कर दिया था कि इस मुलाकात के केंद्र में वेनेजुएला का कच्चा तेल है। अमेरिका चाहता है कि रिलायंस वेनेजुएला का और ज्यादा भारी कच्चा तेल अपनी रिफाइनरियों में प्रोसेस करे।
मुंबई में पत्रकारों ने उनसे पूछा कि अमेरिका के विदेश मंत्री किसी रिफाइनरी कंपनी के प्रमुख से मिलने क्यों जा रहे हैं, तो रुबियो ने कहा, “ऊर्जा को इस्तेमाल लायक बनाने के लिए उसे रिफाइन करना पड़ता है। जिस कंपनी के पास इतनी बड़ी रिफाइनिंग क्षमता हो, मुझे लगता है कि मुझे उससे बात करनी चाहिए, खासकर तब, जब मामला किसी दूसरे देश के तेल से जुड़ा हो।” रिलायंस के मुताबिक, जामनगर दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स है, जिसकी क्षमता रोजाना करीब 14 लाख बैरल कच्चा तेल प्रोसेस करने की है।
‘भारत रिफाइनिंग सुपरपावर है’
अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी ब्योरे के मुताबिक, मंगलवार को मुंबई के ताजमहल पैलेस होटल में पत्रकारों से बातचीत में रुबियो से पूछा गया था कि क्या भारतीय कंपनियां वेनेजुएला का ज्यादा कच्चा तेल रिफाइन कर सकती हैं। इस पर उन्होंने कहा, “कर सकती हैं, और कल हम रिलायंस से इसी पर बात करेंगे। वे पहले भी ऐसा कर चुके हैं। उनके पास भारी कच्चे तेल को रिफाइन करने की क्षमता है।”
रुबियो ने आगे कहा, “भारत रिफाइनिंग की महाशक्ति है। उसके पास ऐसा करने की क्षमता है और ऐसी कंपनियां हैं जो यह काम करना जानती हैं।” उन्होंने यह भी माना कि अकेला वेनेजुएला दुनिया में तेल की कमी की भरपाई नहीं कर सकता, लेकिन उनके मुताबिक समय के साथ वह ऐसा कर सकता है और फिलहाल कुछ राहत जरूर दे सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की जिम्मेदारी भी संभाल रहे रुबियो ने कहा, “ऊर्जा का सीधा संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा से है। देश ऊर्जा के लिए युद्ध लड़ते हैं और ऊर्जा की कमी से अर्थव्यवस्थाएं ढह जाती हैं।”
वेनेजुएला के तेल पर क्या है अमेरिका की सोच
रुबियो ने बताया कि वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ाने पर भी रिलायंस से पहले बात हो चुकी है। उनसे पूछा गया कि क्या वे रिलायंस को वहां तेल उत्पादन शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे, तो उन्होंने कहा, “हम इस पर पहले भी बात कर चुके हैं। अब हम देखेंगे कि अड़चन कहां है और क्या संभावनाएं हैं।” उन्होंने माना कि मादुरो शासन के समय से लगे कुछ पुराने प्रतिबंध इस राह में रुकावट बन सकते हैं, जिन्हें सुलझाना होगा।
नेटवर्क18 को दिए इंटरव्यू में रुबियो ने जामनगर दौरे का एक और कारण बताया। उन्होंने कहा कि रिलायंस उन चुनिंदा कंपनियों में है, जिन्होंने अमेरिका में भी रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने में निवेश किया है। उनके शब्दों में, “इतने करीब होने की वजह से उनका कामकाज देखना और इस पर बात करना समझदारी थी कि हम और करीब आकर कैसे काम कर सकते हैं, खासकर पश्चिमी गोलार्ध की उस ऊर्जा के मामले में, जिसे यहां रिफाइन किया जा सकता है। मुझे लगता है कि इससे भारत को भी फायदा है और हमें भी।”
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जयशंकर से बातचीत, ट्रेड डील पर ‘हफ्तों’ का संकेत

जामनगर रवाना होने से पहले रुबियो ने मंगलवार शाम मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की थी। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के हालात समेत क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। रुबियो ने दोहराया कि अमेरिका के साथ ऊर्जा व्यापार बढ़ने से भारत की आपूर्ति के स्रोत ज्यादा विविध होंगे और उसकी बड़ी घरेलू मांग भी पूरी होगी। उन्होंने रक्षा और असैन्य परमाणु सहयोग में हुई प्रगति की तारीफ की और भारत से अमेरिकी तकनीक और सिस्टम ज्यादा खरीदने की वकालत की।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर रुबियो ने कहा, “हम बहुत, बहुत करीब हैं। बिना औपचारिक समझौते के जितना करीब हुआ जा सकता है, हम उतने करीब हैं। कुछ ही मुद्दे सुलझाने बाकी हैं।” नेटवर्क18 के इंटरव्यू में उन्होंने इसे और साफ किया कि अब बात कुछ तकनीकी ब्योरों पर अटकी है और समझौता “महीनों नहीं, हफ्तों में” सामने आने की उम्मीद है। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि बातचीत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि का दफ्तर कर रहा है, वे खुद नहीं।
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रूसी तेल और टैरिफ पर क्या बोले रुबियो
रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर लगे टैरिफ पर रुबियो ने एक इंटरव्यू में कहा, “इनमें से कोई भी टैरिफ भारत को सजा देने या नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं लगाया गया है। ये एक व्यापक विदेश नीति का हिस्सा हैं, जिसका संबंध रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध से है, जिसे हम खत्म होते देखना चाहते हैं।” अमेरिकी विदेश विभाग ने इंटरव्यू का यह हिस्सा X पर साझा किया है।
रुबियो ने कहा कि भारत लगातार अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की बात करता रहा है और इस दिशा में उसने “काफी प्रगति” की है। उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से कारोबार करने वाले देशों पर टैरिफ बढ़ाने वाले नए कानून को तुरंत लागू न करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा छूट का इस्तेमाल किया, क्योंकि ऐसे फैसलों का असर पूरी दुनिया पर देखना पड़ता है। रुबियो के मुताबिक, इस छूट और भारत के साथ ट्रेड डील से ये मुद्दे सुलझने की उम्मीद है।
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मुंबई में अदाणी और टाटा प्रमुखों से भी मिले
समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, जामनगर रवाना होने से पहले बुधवार सुबह रुबियो ने मुंबई में अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी और टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से भी मुलाकात की। जामनगर में उनके कार्यक्रम में रिफाइनरी के अलावा रिलायंस का वन्यजीव केंद्र वनतारा और कंपनी की निर्माणाधीन गीगा फैक्ट्रियां भी शामिल बताई गई हैं।
यह रुबियो का इस साल दूसरा भारत दौरा है और इस बार उन्होंने दिल्ली के बजाय मुंबई और जामनगर को चुना। अमेरिकी विदेश विभाग ने X पर लिखा कि यह दौरा वित्त, ऊर्जा और संस्कृति के दो बड़े केंद्रों पर केंद्रित रहा और यह वाणिज्यिक निवेश, ऊर्जा सहयोग और दोनों लोकतंत्रों की रणनीतिक साझेदारी के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता दिखाता है। रुबियो ने यह भी बताया कि क्वाड नेताओं का शिखर सम्मेलन इस साल के अंत से पहले मनीला में आसियान सम्मेलन के दौरान कराने पर सहमति बन गई है, हालांकि तारीख अभी तय नहीं हुई है।
































































































































































