Imran Khan Leave India Notice: बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती, FRRO ने OCI रद्द करने का भी नोटिस भेजा

मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान ने मुंबई के विदेशियों के क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) द्वारा जारी ‘Leave India’ नोटिस को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी है। 14 अक्टूबर 2026 के इस नोटिस (ओ.डब्ल्यू. संख्या FRRO/BOI/MUM/REG/2026-4250) में अमेरिकी नागरिक और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्डधारक खान को 28 अक्टूबर 2026 तक भारत छोड़ने को कहा गया था। याचिका में नोटिस को मनमाना, अनुपातहीन और संविधान के अनुच्छेद 14 व 21 का उल्लंघन बताया गया है।
याचिका 17 अक्टूबर को दाखिल हुई। उसी दिन FRRO ने दूसरा नोटिस भी भेजा, जिसमें नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 7D के तहत उनके OCI रजिस्ट्रेशन को रद्द क्यों न किया जाए, इसका जवाब 15 दिन में मांगा गया है। बार एंड बेंच और इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार मामला करीब 19 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ के सामने उल्लेखित होने की संभावना है।
नोटिस में क्या लिखा है?
याचिका के मुताबिक Leave India नोटिस आप्रवासन और विदेशी अधिनियम (Immigration and Foreigners Act), 2025 की धारा 7(2)(c) और धारा 29 के तहत जारी किया गया। इसमें खान को 28 अक्टूबर तक देश छोड़ने को कहा गया है। याचिका का कहना है कि नोटिस में कोई स्पष्ट कारण, सबूत या कथित उल्लंघन का ब्योरा नहीं दिया गया और न ही पहले कोई कारण बताओ नोटिस या सुनवाई का मौका दिया गया।
द हिंदू की 15 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार मुंबई पुलिस ने कहा था कि खान के कृत्य वीजा शर्तों और विदेशी कानून के प्रावधानों के उल्लंघन में हैं तथा कार्रवाई स्वतः संज्ञान पर शुरू की गई। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि कानून अपना रास्ता अपनाएगा। भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कहा था कि उन्होंने अमेरिकी नागरिक इमरान खान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

10 अक्टूबर की हिरासत और गामदेवी FIR
याचिका में बताया गया है कि 10 अक्टूबर को खान अपनी मां और बहन के साथ नाना चौक के पास अगस्त क्रांति मैदान की ओर गए, जहां देशभर में चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग वाले प्रदर्शनों की खबरें थीं। उनके अनुसार वहां बैरिकेडिंग और भारी पुलिस बल था; पुलिस ने जगह छोड़ने को कहा और वे लौटने लगे। करीब शाम 5:19 बजे मीडिया के घेरने के बाद पुलिस ने उन्हें और परिवार को हिरासत में लिया। येलो गेट पुलिस स्टेशन ले जाने के बाद अधिकारियों ने कहा कि कोई निर्देश नहीं है और उन्हें जाने दिया गया।
उसी रात गामदेवी पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 223, 126(2), 189(3) और 189(5) के तहत FIR (सी.आर. संख्या 0813/2026) दर्ज हुई, जिसमें खान को आरोपी संख्या 11 बताया गया है। याचिका का दावा है कि FIR में सभी आरोपियों पर आम आरोप है कि उन्होंने दोपहर करीब 3:30 बजे अगस्त क्रांति मैदान पर जमावड़ा किया; खान कहते हैं कि वे उस समय वहां नहीं पहुंचे थे और न कोई जमावड़ा चल रहा था।
याचिका में खान का पक्ष
खान का कहना है कि वे दो साल की उम्र से लगभग पूरा जीवन भारत में रहे हैं; यहां पढ़ाई की, काम किया, शादी की और परिवार के साथ मुंबई में रहते हैं। दिसंबर 2006 से उनके पास OCI पंजीकरण (प्रमाणपत्र संख्या 085019, दिनांक 15.12.2006) है। याचिका में दावा है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और महज संक्षिप्त हिरासत—जिससे वे उसी शाम रिहा हो गए—के आधार पर आजीवन निवासी को देश से निकालना अनुपातहीन है।
याचिका में कहा गया है, “एक आजीवन निवासी को संक्षिप्त और अन्यायपूर्ण हिरासत के आधार पर भारत छोड़ने को कहना पूरी तरह अनुपातहीन है।” यह भी तर्क दिया गया है कि बिना जांच वाली, जमानतीय और मामूली कही गई FIR को देश से निकालने का आधार नहीं बनाया जा सकता। याचिका के अनुसार OCI की स्थिति नागरिकता अधिनियम की धारा 7A से 7D के तहत नियंत्रित होती है और रद्दीकरण से पहले धारा 7D में सुनवाई का अधिकार है; इसलिए Leave India नोटिस जारी करते समय OCI को नजरअंदाज करना अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
खान ने नोटिस रद्द करने, उसके लागू होने पर अंतरिम रोक, निर्वासन, लुकआउट सर्कुलर, ब्लैकलिस्टिंग या OCI में दखल से रोक तथा नोटिस के पीछे के आंतरिक रिकॉर्ड पेश करने की मांग की है। उनकी ओर से MZM लीगल के अधिवक्ता जुल्फिकार मेमन, परवेज मेमन और चिराग नाइक पेश हैं।

दूसरा नोटिस: OCI रद्द करने का कारण बताओ
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार 17 अक्टूबर को FRRO मुंबई ने दूसरा शो-कॉज नोटिस भेजा। इसमें अगस्त क्रांति मैदान पर CJP से जुड़े मुख्य चुनाव आयुक्त विरोधी प्रदर्शन स्थल पर उनकी मौजूदगी का हवाला दिया गया है। नोटिस में कहा गया है कि प्रदर्शन के लिए पुलिस अनुमति नहीं थी और गैरकानूनी जमावड़े के आरोप में मामला दर्ज हुआ। नागरिकता अधिनियम की धारा 7D(e) के तहत संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा या जनहित में OCI रद्द किया जा सकता है; केंद्र की “अनंतिम राय” है कि जवाब के अधीन उनका पंजीकरण रद्दीकरण के दायरे में आ सकता है।
उसी रिपोर्ट में FRRO ने यह भी स्वीकार किया है कि FIR दर्ज होना और हिरासत अपने आप में आरोपों का अंतिम प्रमाण या OCI रद्द करने का स्वतः आधार नहीं हैं, और न अकेले भागीदारी से रद्दीकरण साबित होता है। फिर भी कृत्यों की प्रकृति, परिस्थितियां और जनहित पर असर तथा OCI के आचरण की जांच की जाएगी। अधिवक्ता जुल्फिकार मेमन ने कहा कि वे नए नोटिस की सामग्री देख रहे हैं और FRRO को जवाब देंगे; Leave India नोटिस की स्थिति स्पष्ट करने के लिए यह बिंदु हाईकोर्ट में भी उठाएंगे।
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आगे क्या?
अभी हाईकोर्ट में Leave India नोटिस पर अंतरिम राहत की मांग लंबित है, जबकि FRRO का अलग OCI शो-कॉज नोटिस भी सक्रिय है। दोनों प्रक्रियाएं अलग-अलग क़ानूनी ढांचों—आप्रवासन और विदेशी अधिनियम 2025 तथा नागरिकता अधिनियम 1955—के तहत चल रही हैं। कोर्ट में उल्लेख और FRRO को दिए जाने वाले जवाब के बाद ही अगला कदम साफ होगा।


















































































































































