Rubio India Visit: अगले हफ्ते भारत आएंगे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, कार्यक्रम में दिल्ली नहीं बल्कि मुंबई और जामनगर; ऊर्जा सहयोग सबसे बड़ा एजेंडा

नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले हफ्ते भारत आ रहे हैं, और इस बार उनके कार्यक्रम में राजधानी दिल्ली नहीं, बल्कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और गुजरात का जामनगर है। अमेरिकी विदेश विभाग (U.S. Department of State) ने मंगलवार (13 अक्टूबर, अमेरिकी समय) को बयान जारी कर बताया कि रुबियो 17 से 22 अक्टूबर तक उज्बेकिस्तान के समरकंद और भारत में मुंबई व जामनगर की यात्रा करेंगे। भारत में उनका सबसे बड़ा एजेंडा ऊर्जा सहयोग रहेगा।
विदेश विभाग के बयान के मुताबिक, भारत में रुबियो “वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मिलकर अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेंगे, क्षेत्रीय और वैश्विक हालात पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे और ऊर्जा सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।” वे कारोबारी जगत के प्रमुख लोगों से भी मिलेंगे, ताकि व्यावसायिक निवेश और आर्थिक सहयोग के नए अवसरों को बढ़ावा मिल सके। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी X पर इस दौरे की जानकारी साझा की।

जामनगर ही क्यों अहम है?
जामनगर का नाम आते ही सबसे पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज का विशाल रिफाइनिंग परिसर याद आता है। रिलायंस के अनुसार यह दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स है, जिसकी क्षमता रोज करीब 14 लाख बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करने की है। ऐसे में अमेरिकी विदेश मंत्री के कार्यक्रम में जामनगर का शामिल होना साफ संकेत देता है कि वॉशिंगटन भारत के साथ ऊर्जा व्यापार और निवेश को कितनी प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि विदेश विभाग ने अभी जामनगर और मुंबई के कार्यक्रम का विस्तृत ब्योरा जारी नहीं किया है।
मुंबई में देश के बड़े उद्योग समूहों और वित्तीय संस्थानों के मुख्यालय हैं। विदेश विभाग के बयान में कारोबारी नेताओं से मुलाकात और निवेश बढ़ाने की बात खास तौर पर कही गई है।

व्यापार समझौते पर जयशंकर का संकेत
रुबियो के दौरे का एलान ऐसे समय हुआ है, जब भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत अहम मोड़ पर बताई जा रही है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा, “मेरा मानना है कि यह मुद्दा अब लैंडिंग पॉइंट की ओर बढ़ रहा है।” उन्होंने बताया कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री बचे हुए मुद्दों को सुलझाने में जुटे हैं।
समझौता दिसंबर से पहले होगा या नहीं, इस सवाल पर जयशंकर ने कोई तारीख बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “इस दौर में एक बात मैं जानता हूं—सार्वजनिक भविष्यवाणियां मत कीजिए। मैं इतना ही कह सकता हूं कि यह सही दिशा में बढ़ रहा है और हम इससे काफी उत्साहित हैं।” जयशंकर ने यह भी कहा कि अमेरिका ने दुनिया से जुड़ने का अपना तरीका बदला है, इसलिए हर देश को उसके साथ अपने रिश्तों का नए सिरे से आकलन करना होगा। इससे पहले अक्टूबर में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर ने भी कहा था कि बातचीत अंतिम चरण में है।
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पांच महीने में दूसरा भारत दौरा
यह इस साल रुबियो का दूसरा भारत दौरा होगा। मई में वे नई दिल्ली आए थे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 मई को उनसे मुलाकात की थी। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार 24 मई को उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से रक्षा, सुरक्षा और TRUST पहल समेत रणनीतिक तकनीक सहयोग पर बात की। जयशंकर ने उसी दिन उनसे व्यापार और ऊर्जा, रक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स, AI, परमाणु और आतंकवाद-रोधी सहयोग समेत रिश्तों के पूरे दायरे की समीक्षा की थी।
26 मई को रुबियो ने जयशंकर की मेजबानी में हुई क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया। उसी दिन दोनों नेताओं ने क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ के खनन व प्रसंस्करण में आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए भारत-अमेरिका फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए थे। MEA ने इसे दोनों देशों की साझेदारी में अहम पड़ाव बताया था।

पहला पड़ाव समरकंद
भारत आने से पहले रुबियो उज्बेकिस्तान के समरकंद में C5+1 मंत्रिस्तरीय बैठक में शामिल होंगे। विदेश विभाग के अनुसार वहां वे कजाखस्तान, किर्गिज गणराज्य, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। इस हिस्से में 200 से ज्यादा अमेरिकी कारोबारी नेताओं का प्रतिनिधिमंडल उनके साथ रहेगा।
मध्य एशिया के बाद सीधे भारत के ऊर्जा और कारोबारी केंद्रों तक पहुंचने वाला यह दौरा बताता है कि अमेरिका इस पूरे क्षेत्र में ऊर्जा, निवेश और सप्लाई चेन को एक साथ जोड़कर देख रहा है। भारत के लिए यह व्यापार समझौते की बातचीत को अंतिम रूप की ओर ले जाने और ऊर्जा साझेदारी को नई ऊंचाई देने का मौका हो सकता है।
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