Trump Tariff Waiver: रूसी तेल खरीद पर भारत को 100% टैरिफ से फिलहाल राहत, डेडलाइन से ठीक पहले ट्रंप ने दी छूट

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले भारत के लिए अमेरिका से फिलहाल राहत की खबर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ (ग्राहम एक्ट) को लागू करने वाले कार्यकारी आदेश पर दस्तखत किए और उसी आदेश में इस कानून के तहत तय टैरिफ और प्रतिबंधों पर छूट भी दे दी। इस कानून के तहत रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े आयातक देशों के सामान पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगना था, अगर वे 18 अक्टूबर या उसके बाद रूस से नई खरीद करते।
व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर 16 अक्टूबर (अमेरिकी समय) की तारीख वाला यह आदेश भारतीय समयानुसार शनिवार सुबह सामने आया। ट्रंप ने आदेश में लिखा, “मैं ग्राहम एक्ट में तय इन प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों के अमल पर छूट दे रहा हूं।” उन्होंने यह भी लिखा कि अमेरिकी संसद (कांग्रेस) को प्रमाणपत्र भेज दिया गया है कि यह छूट अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। भारत रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल है, इसलिए यह फैसला सीधे उससे जुड़ा है।
आदेश में क्या लिखा है
आदेश की धारा 2 में तीन तरह के शुल्क गिनाए गए हैं: रूस से आने वाले सामान पर 500 प्रतिशत, रूसी तेल और गैस के पांच सबसे बड़े आयातकों के सामान पर 100 प्रतिशत, और रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले पांच प्रमुख देशों के सामान पर भी 100 प्रतिशत। लेकिन धारा 4 साफ कहती है कि ग्राहम एक्ट की धारा 112 और 113 या इस आदेश के तहत कोई भी शुल्क लागू नहीं होगा। कानून के तहत रूसी व्यक्तियों और संस्थाओं पर लगने वाले कई नए प्रतिबंध भी रोक दिए गए हैं।
हालांकि रूस पर पहले से लगे प्रतिबंध जस के तस रहेंगे। आदेश के मुताबिक, ग्राहम एक्ट से पहले जारी कार्यकारी आदेशों के तहत रूसी सरकार की गतिविधियों को लेकर जो प्रतिबंध लगाए गए थे, उन पर इस छूट का कोई असर नहीं पड़ेगा।
राहत स्थायी नहीं, नजर बनी रहेगी
छूट की कोई अंतिम तारीख तय नहीं की गई है। आदेश के मुताबिक यह तब तक लागू रहेगी, जब तक राष्ट्रपति या विदेश मंत्री, वित्त मंत्री और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) से सलाह करके यह तय न कर लें कि आगे कदम उठाना जरूरी है। USTR को जिम्मा दिया गया है कि वह रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वालों पर नजर रखे, राष्ट्रपति को नियमित रिपोर्ट दे और ऐसी किसी भी स्थिति की फौरन जानकारी दे, जिसमें छूट पर दोबारा विचार की जरूरत दिखे।
यानी भारत पर लटकी टैरिफ की तलवार फिलहाल हटी है, लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। आदेश में अमेरिकी प्रशासन के लिए इस छूट को कभी भी वापस लेने का रास्ता खुला रखा गया है।
भारत पहले ही जता चुका था आपत्ति
ट्रंप ने 18 सितंबर को ग्राहम एक्ट पर दस्तखत किए थे। इससे एक दिन पहले, कांग्रेस से विधेयक पारित होने पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था, “भारत अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।” मंत्रालय ने यह भी कहा था कि भारत ने अमेरिकी पक्ष को साफ बता दिया है कि इसका असर न सिर्फ दोनों देशों के रिश्तों पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। साथ ही सरकार ने अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने की बात कही थी।

रूसी तेल को लेकर भारत पहले भी अमेरिकी टैरिफ झेल चुका है। अमेरिका ने रूस से तेल खरीद का हवाला देकर भारतीय सामान पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया था। फरवरी 2026 में जारी कार्यकारी आदेश के जरिए यह अतिरिक्त शुल्क 7 फरवरी से हटा दिया गया। अब दोनों देश व्यापार समझौते के पहले चरण की कानूनी ड्राफ्टिंग में जुटे हैं। ऐसे में नया 100 प्रतिशत शुल्क लगता तो भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में मुश्किलें बढ़ सकती थीं।
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रूसी ऊर्जा पर नरम पड़ता अमेरिका
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका रूसी ऊर्जा को लेकर अपना रुख नरम करता दिख रहा है। 9 अक्टूबर को अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने जनरल लाइसेंस नंबर 135 जारी किया था। इसके तहत रूसी मूल के डीजल की बिक्री, ढुलाई और अमेरिका में आयात से जुड़े लेनदेन को 7 अप्रैल 2027 तक मंजूरी दी गई है। अब ग्राहम एक्ट की सख्ती पर रोक से रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर तत्काल दबाव भी कम हो गया है।
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रुबियो के भारत दौरे से ठीक पहले फैसला
छूट का यह आदेश ऐसे वक्त आया है, जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर तक उज्बेकिस्तान के समरकंद और भारत में मुंबई व जामनगर की यात्रा पर रहेंगे। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, भारत में रुबियो वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मिलकर रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर 20 अक्टूबर को मुंबई में रुबियो से मिलेंगे।

खबर लिखे जाने तक भारत सरकार की ओर से ट्रंप के इस आदेश पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी। मुंबई की बैठक में ऊर्जा सहयोग पहले से एजेंडे पर है, ऐसे में रूसी तेल और इस छूट पर दोनों देशों का रुख आगे की तस्वीर तय करेगा।









































































































































