Arunachal Face-Off: अरुणाचल में कई जगह चीनी सैनिकों से आमना-सामना अब भी जारी, ITBP प्रमुख ने पहली बार सार्वजनिक रूप से मानी बात

नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा पर हालात पूरी तरह शांत नहीं हैं। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा है कि हाल के दिनों में अरुणाचल में कई जगहों पर चीनी सैनिकों से आमना-सामना (फेस-ऑफ) हुआ है और यह स्थिति अब भी बनी हुई है। जुलाई से इलाके में तनाव की खबरें आ रही थीं, लेकिन सीमा की रखवाली करने वाले किसी बल के प्रमुख ने पहली बार सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार किया है।
कपूर गुरुवार, 22 अक्टूबर को राजस्थान के अलवर स्थित ITBP के केंद्रीय प्रशिक्षण महाविद्यालय (CTC) में हिमवीर सम्मान समारोह में जवानों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ दिनों में ऐसी स्थिति बनी कि अरुणाचल में कई जगहों पर फेस-ऑफ हुआ और यह अब भी जारी है।” ITBP की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इस समारोह में बल के 136 जवानों और अधिकारियों को सम्मानित किया गया। इनमें से 10 को महानिदेशक का सिल्वर डिस्क और 126 को महानिदेशक का प्रशंसा पत्र मिला।

शौर्य कमांडो की तारीफ, पर चीन का नाम नहीं
अपने भाषण में कपूर ने सीधे चीन का नाम लिए बिना ITBP के नए “शौर्य कमांडो” दस्तों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा, “हमारे नए शौर्य कमांडो ने इसमें मिसाल पेश करने वाली भूमिका निभाई है।” उनके मुताबिक, ये कमांडो हर सीमा बटालियन में तैनात किए जाएंगे और जल्द ही इनकी एक पूरी बटालियन भी होगी।
कपूर ने याद दिलाया कि ITBP को पहाड़ों में लड़ने वाले गुरिल्ला बल के रूप में खड़ा किया गया था और 2004 में चीन सीमा की निगरानी की जिम्मेदारी इसे सौंपी गई। उन्होंने कहा कि बल को अपना मूल काम नहीं छोड़ना चाहिए और सेना से अलग, ऊंचे पहाड़ों में लड़ने में माहिर एक विशेष बल तैयार किया जा रहा है। 1962 में गठित ITBP चीन से लगी 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की निगरानी करती है। बल 24 अक्टूबर को अपना स्थापना दिवस मनाता है।
हालांकि समाचार चैनल NDTV ने सूत्रों के हवाले से बताया कि महानिदेशक का यह बयान सीमा पर सामान्य तैनाती और तैयारियों के संदर्भ में था, किसी खास घटना के बारे में नहीं। सरकार, सेना या विदेश मंत्रालय की ओर से इस बयान पर खबर लिखे जाने तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी।
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जुलाई से टकसिंग इलाके में तनाव
अंग्रेजी अखबार द हिंदू ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया है कि जुलाई के आखिर से अपर सुबनसिरी जिले के टकसिंग इलाके में आसाफिला के पास दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने हैं। सूत्रों के मुताबिक, गश्त के दौरान माजा के पास दोनों पक्षों का सामना हुआ, कुछ देर की तनातनी के बाद दोनों लौट गए, लेकिन कुछ दिन बाद चीनी सेना (PLA) ज्यादा संख्या में लौटी और LAC की भारतीय समझ के मुताबिक भारत की ओर करीब 6 से 7 किलोमीटर भीतर ऊंचाई पर तंबू गाड़ दिए। भारत ने भी वहां अपनी तैनाती बढ़ाई है।
जुलाई में ही अरुणाचल की क्षेत्रीय पार्टी पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) की एक तथ्य-खोजी टीम ने दावा किया था कि चीनी सैनिक टकसिंग में भारतीय जवानों को तय गश्त बिंदुओं तक जाने से रोक रहे हैं। सरकार ने उस समय इन दावों को खारिज करते हुए दोहराया था कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इंडिया टुडे से कहा है कि अरुणाचल में चीन ने कोई नया कब्जा नहीं किया है, हालांकि उन्होंने माना कि सीमा के पास कुछ चरागाहों तक पहुंच को लेकर स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है।

बातचीत के तीन दौर, फिर भी तनाव बरकरार
यह स्थिति तब बनी हुई है, जब जुलाई के बाद से दोनों देशों के बीच सीमा मुद्दे पर उच्च स्तर की तीन बैठकें हो चुकी हैं। 6 अगस्त को भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय तंत्र (WMCC) की 36वीं बैठक हुई। 26 अगस्त को बीजिंग में सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की बातचीत हुई, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद 6 सितंबर को अरुणाचल में वाचा-दमाई सीमा बैठक स्थल पर पूर्वी सेक्टर में पहली बार दोनों सेनाओं के कोर कमांडरों की बैठक हुई। ऐसी बैठकें अब तक ज्यादातर पूर्वी लद्दाख के चुशूल-मोल्डो में होती रही हैं।
इसी बीच 11 से 13 सितंबर तक भारत की मेजबानी में हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शामिल हुए थे। सितंबर में ही चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने कहा था कि LAC पर हालात फिलहाल स्थिर हैं और चिंता की कोई बात नहीं है।
ड्रोन, जमीन के नीचे बंकर और ‘स्ट्राइक’ कोर्स
कपूर ने चीन सीमा को सबसे कठिन मोर्चा बताते हुए कहा कि पारंपरिक तरीकों से चीन का मुकाबला मुश्किल होगा, क्योंकि उसने अपनी सेना के आधुनिकीकरण पर भारी निवेश किया है। उनके मुताबिक, ITBP को आधुनिकीकरण के लिए मिले 400 करोड़ रुपये का 70 फीसदी हिस्सा ड्रोन क्षमता बढ़ाने पर खर्च हुआ है। सीमा की निगरानी करने वाली हर बटालियन में अब एक ड्रोन प्लाटून है, ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और बल खुद भी ड्रोन बना रहा है। करीब 3,500 से 4,000 करोड़ रुपये की एक और आधुनिकीकरण योजना में से 1,000 करोड़ रुपये ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणालियों के लिए रखे जाएंगे।
उन्होंने बताया कि अगले तीन साल में चीन सीमा की हर चौकी पर जमीन के ऊपर जितने ढांचे हैं, उतने ही जमीन के नीचे भी बनाए जाएंगे। उनके शब्दों में, “जमीन के ऊपर की कोई भी चीज निशाना बन सकती है। युद्ध जैसी स्थिति में भूमिगत शेल्टर सबसे जरूरी हैं।” सभी कंपनियों में इसके पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो चुके हैं। बल ने जून 2020 की गलवान झड़प जैसी स्थितियों से निपटने के लिए ‘स्ट्राइक’ नाम का नया प्रशिक्षण कोर्स भी तैयार किया है। गलवान घाटी की उस झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे। कपूर 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
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कांग्रेस ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर उठाए सवाल
महानिदेशक के बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पार्टी सांसद जयराम रमेश ने X पर लिखा कि ITBP महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश में PLA के साथ हाल के फेस-ऑफ में बल के प्रदर्शन की सही ही सराहना की है, लेकिन इस पर प्रधानमंत्री और उनकी सरकार ने “गहरी चुप्पी” साध रखी है। उन्होंने सरकार पर चीन को रियायतें देने का आरोप भी लगाया।
रमेश ने सितंबर की कोर कमांडर स्तर की बातचीत के नतीजे पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि स्थानीय लोगों के मुताबिक लद्दाख की तरह यहां भी गश्त के कुछ बिंदु हाथ से निकल गए हैं। उन्होंने अरुणाचल की जगहों के नाम बदलने की चीन की कोशिशों और 60,000 मेगावाट के उस बांध का भी जिक्र किया, जिसे उन्होंने भारत की पारिस्थितिकी और जल सुरक्षा के लिए खतरा बताया। सरकार की ओर से इन आरोपों पर खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया था।
अब नजर इस पर है कि सरकार या सेना इस स्थिति पर आधिकारिक तौर पर क्या कहती है और सर्दियां शुरू होने से पहले दोनों देश तनाव घटाने के लिए कोई नया कदम उठाते हैं या नहीं। अरुणाचल में लंबी दूरी की गश्त आमतौर पर जून से अक्टूबर के बीच ही होती है, क्योंकि उसके बाद मौसम ऊंचे इलाकों में आवाजाही मुश्किल कर देता है।











































































































































































