अक्टूबर 21, 2026
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Police Commemoration Day: नक्सलवाद के बाद अब नशे पर निशाना, शाह बोले- 2029 के अंत तक देश को ड्रग्स से मुक्त कराना है

दिल्ली के राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर पुलिस स्मृति दिवस पर भाषण देते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार, 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस पर कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब देश को नशे के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़नी है। दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देने के बाद उन्होंने कहा, “देश अभी सभी समस्याओं से मुक्त नहीं हुआ है। हमें नशे के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़नी है और 31 दिसंबर 2029 तक देश को ड्रग्स की समस्या से मुक्त कराना है।”

गृह मंत्री के कार्यालय के आधिकारिक X हैंडल के मुताबिक, शाह ने बताया कि इस साल भी देश के 156 पुलिसकर्मियों ने ड्यूटी निभाते हुए अपनी जान दी। उन्होंने कहा कि वे इन सभी बलिदानियों को हाथ जोड़कर नमन करते हैं। कार्यक्रम में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और दिल्ली पुलिस की संयुक्त परेड भी हुई।

नक्सलवाद की लड़ाई में 3,600 से ज्यादा जवान शहीद

शाह ने 2026 को भारतीय पुलिस के लिए बेहद अहम साल बताया। उनके मुताबिक इसी साल 31 मार्च को देश को नक्सलवाद से मुक्ति मिली। उन्होंने कहा, “नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष में 3,600 से अधिक वीर जवान शहीद हुए और लगभग 13,700 निर्दोष नागरिकों ने अपनी जान गंवाई।” गृह मंत्री के अनुसार यह आंकड़ा 1981 से मार्च 2026 तक का है और सुरक्षा बलों में सबसे ज्यादा जवान छत्तीसगढ़ में शहीद हुए।

शहीदों के परिवारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज देश विकास के जिस रास्ते पर आगे बढ़ रहा है, उसकी नींव में इन जवानों और निर्दोष नागरिकों का बलिदान है। नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में उन्होंने खास तौर पर CRPF की कोबरा बटालियन और छत्तीसगढ़ पुलिस के योगदान की सराहना की।

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अब नशे के खिलाफ 2029 की डेडलाइन

अपने भाषण में शाह ने नशे को सबसे बड़ी अगली चुनौती के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा, “नशा न केवल हमारी अर्थव्यवस्था पर बोझ है, बल्कि युवा पीढ़ियों का भविष्य भी बर्बाद करता है। इसके साथ ही ड्रग्स का अवैध कारोबार अपराध और आतंकवाद को आर्थिक सहायता भी प्रदान करता है।” उन्होंने बताया कि सरकार ने नशामुक्त भारत का रोडमैप तैयार कर लक्ष्य तय कर दिया है और इसे पूरा करने के लिए सभी को पूरे मन से जुटना होगा।

31 दिसंबर 2029 की यह समय-सीमा नई नहीं है। शाह ने 22 सितंबर को दिल्ली में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) प्रमुखों के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन में पहली बार यह लक्ष्य रखा था। डीडी न्यूज के मुताबिक, तब उन्होंने बताया था कि 2026-2029 के विजन डॉक्यूमेंट में चार मोर्चों पर 100 से ज्यादा लक्ष्य तय किए गए हैं। इनमें कार्रवाई और खुफिया तंत्र, सिंथेटिक ड्रग्स और उनके कच्चे रसायनों पर नियंत्रण, नशे की मांग घटाना और एजेंसियों की क्षमता बढ़ाना शामिल है। उसी सम्मेलन में उन्होंने बताया था कि एक लाख के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 46,780 ‘नशामुक्त मित्र’ पंजीकृत हो चुके हैं, जो देशभर के 10 लाख स्कूलों, कॉलेजों और संस्थानों में जाकर युवाओं को जागरूक करेंगे।

इसी मुहिम के तहत शाह ने आज राष्ट्रीय पुलिस स्मारक से ‘फाइट अगेंस्ट ड्रग्स’ थीम वाली मोटरसाइकिल रैली को हरी झंडी दिखाई। गृह मंत्रालय के मुताबिक, इसमें जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली की पुलिस के साथ CRPF, CISF, BSF, SSB, ITBP, NSG, RPF, NDRF और NIA के करीब 90 राइडर शामिल हैं। सभी राज्यों और केंद्रीय बलों के राइडर 31 अक्टूबर को गुजरात के एकता नगर पहुंचकर सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर होने वाली एकता परेड में हिस्सा लेंगे।

नई दिल्ली के राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर पुलिस स्मृति दिवस 2026 के कार्यक्रम में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और दिल्ली पुलिस की संयुक्त परेड
राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर बुधवार को पुलिस स्मृति दिवस के कार्यक्रम में CAPF और दिल्ली पुलिस की संयुक्त परेड। फोटो: डीडी न्यूज लाइव प्रसारण से

“पुलिसकर्मियों के लिए कोई त्योहार नहीं होता”

शाह ने पुलिस की नौकरी को सरकार की सबसे कठिन सेवा बताया। उन्होंने कहा, “पुलिसकर्मियों के लिए कोई त्योहार नहीं होता। जिस दिन पूरा देश अपने परिवार के साथ त्योहारों की खुशियां मना रहा होता है, उस दिन भी हमारे पुलिसकर्मी अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे होते हैं।” उन्होंने पुलिस को देश की आंतरिक सुरक्षा की “प्रथम और अंतिम रक्षा पंक्ति” बताया।

गृह मंत्री ने कहा कि आंतरिक सुरक्षा के तीन बड़े हॉटस्पॉट, यानी नक्सल प्रभावित इलाके, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर, आज शांति और विकास के रास्ते पर हैं। चुनावों में केंद्रीय बलों की भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि बिहार और उत्तर प्रदेश में चुनावी हिंसा खत्म हो चुकी है और इस बार सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के चलते पश्चिम बंगाल में भी पहली बार बिना किसी हिंसा के चुनाव संपन्न हुए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी X पर पुलिसकर्मियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने लिखा कि पुलिस स्मृति दिवस उन पुलिसकर्मियों के प्रति गहरी कृतज्ञता जताने का अवसर है, जो अक्सर बेहद कठिन हालात में पूरी निष्ठा से सेवा करते हैं। प्रधानमंत्री ने ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका साहस और सर्वोच्च बलिदान देश की स्मृति में हमेशा अंकित रहेगा।

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21 अक्टूबर को ही क्यों मनाया जाता है पुलिस स्मृति दिवस

21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स इलाके में भारी हथियारों से लैस चीनी सैनिकों ने घात लगाकर गश्ती दल पर हमला किया था। इसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के 10 जवान शहीद हुए थे। तभी से हर साल 21 अक्टूबर को इन जवानों और ड्यूटी पर जान देने वाले सभी पुलिसकर्मियों की याद में पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। शाह ने कहा कि इन जवानों ने देश की एक इंच जमीन भी विदेशी ताकतों के हाथ में न जाने देने के संकल्प के साथ अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने 2018 में पुलिस स्मृति दिवस पर ही चाणक्यपुरी में राष्ट्रीय पुलिस स्मारक देश को समर्पित किया था। गृह मंत्रालय के मुताबिक, स्मारक में ग्रेनाइट के एक ही पत्थर से बना 30 फुट ऊंचा केंद्रीय स्तंभ, शहीद पुलिसकर्मियों के नामों वाली ‘शौर्य दीवार’ और एक संग्रहालय है। स्मारक सोमवार को छोड़कर हर दिन आम लोगों के लिए खुला रहता है।

मंत्रालय ने बताया है कि 22 से 30 अक्टूबर तक केंद्रीय बल स्मारक पर कई कार्यक्रम करेंगे। इनमें शहीदों के परिवारों का दौरा, पुलिस बैंड का प्रदर्शन, मोटरसाइकिल रैलियां, शहीदों के लिए दौड़, रक्तदान शिविर और बच्चों के लिए निबंध व चित्रकला प्रतियोगिताएं शामिल हैं। देशभर में राज्य पुलिस भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित करेगी।

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