Pilibhit Voter List: पीलीभीत में 10,470 मतदाताओं का ब्योरा बदला गया, पर दफ्तर में एक भी फॉर्म नहीं मिला; दो SDM और कंप्यूटर ऑपरेटर पर FIR

लखनऊ/पीलीभीत: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में बड़ी गड़बड़ी की आधिकारिक पुष्टि हुई है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा के कार्यालय के मुताबिक, यहां करीब तीन महीने में 10,470 मतदाताओं के ब्योरे में बदलाव मंजूर कर दिए गए, लेकिन इन बदलावों से जुड़ा एक भी आवेदन फॉर्म दफ्तर के रिकॉर्ड में नहीं मिला। मामले में दो उपजिलाधिकारियों (SDM) और मतदाता पंजीकरण केंद्र के एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
मामला तब खुला, जब शिकायतें आईं कि ऑनलाइन खोजने पर कुछ मतदाताओं के EPIC नंबर (मतदाता पहचान पत्र संख्या) पर किसी दूसरे मतदाता का ब्योरा दिख रहा है। ये वे मतदाता थे, जिनके नाम 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में दर्ज थे। यह सूची प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पूरा होने के बाद जारी की गई थी।

जांच में क्या सामने आया
CEO कार्यालय की ओर से गुरुवार, 22 अक्टूबर को जारी बयान के मुताबिक, पीलीभीत के जिला निर्वाचन अधिकारी की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि 127-पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र के मतदाता पंजीकरण केंद्र (VRC) के कंप्यूटर ऑपरेटर ने 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच कुल 13,779 फॉर्म-8 सिस्टम में दर्ज किए। इनमें से 4,717 फॉर्म 16 जुलाई तक और बाकी 9,062 फॉर्म 17 जुलाई से 29 अगस्त के बीच दर्ज हुए।
जांच में इनमें से किसी भी एंट्री से जुड़ा फॉर्म-8 दफ्तर के रिकॉर्ड में नहीं मिला। इसके बावजूद 10,470 फॉर्म मंजूर कर दिए गए थे और 3,309 खारिज हुए थे। बयान के मुताबिक, मंजूर किए गए सभी 10,470 मामलों में अनियमितता पाई गई है।
फॉर्म-8 का इस्तेमाल मतदाता सूची में दर्ज नाम, पते या दूसरे ब्योरे में सुधार, निवास बदलने और नया मतदाता पहचान पत्र लेने के लिए किया जाता है। यानी सिस्टम में दिखाया गया कि हजारों मतदाताओं ने अपना ब्योरा बदलवाने की अर्जी दी थी, जबकि दफ्तर में ऐसी अर्जियों के कागज मौजूद ही नहीं थे।
किस पर क्या कार्रवाई हुई
भारत निर्वाचन आयोग ने कंप्यूटर ऑपरेटर और जांच की अवधि में इस क्षेत्र में तैनात रहे दोनों निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) को गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार माना है। आयोग ने तीनों के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई करने को कहा है। दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रिपोर्ट देने को भी कहा गया है।
पीलीभीत के जिलाधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारी आलोक कुमार ने गुरुवार शाम प्रेस वार्ता में बताया कि ये दोनों अधिकारी पूरनपुर के SDM मयंक गोस्वामी और अमरिया के SDM हेमंत चौधरी हैं, जो जांच की अवधि में मतदाता सूची तैयार करने के लिए जिम्मेदार थे। दोनों को बुधवार रात उनके पदों से हटाकर जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की सेवाएं खत्म कर दी गई हैं। गुरुवार को सहायक निर्वाचन अधिकारी की तहरीर पर तीनों के खिलाफ कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 मतदाता सूची तैयार करने या उसमें सुधार से जुड़े सरकारी कर्तव्य के उल्लंघन पर लागू होती है। इसमें दोष साबित होने पर कम से कम तीन महीने और अधिकतम दो साल की कैद के साथ जुर्माने का प्रावधान है।

यह भी पढ़ें: ECI SSR: 17 राज्यों में मतदाता सूची का विशेष सारांश पुनरीक्षण, ड्राफ्ट 12 नवंबर को—अंतिम सूची 4 जनवरी 2027
नाम जोड़ने-हटाने की भी होगी जांच
मामला सिर्फ फॉर्म-8 तक सीमित नहीं रहेगा। CEO ने जिला निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिया है कि इसी कंप्यूटर ऑपरेटर ने 10 अप्रैल से 21 अक्टूबर के बीच नाम जोड़ने के जो फॉर्म-6 और नाम हटाने के जो फॉर्म-7 दर्ज किए, उन सभी की बारीकी से जांच कर एक दिन के भीतर रिपोर्ट दी जाए। गड़बड़ी वाली फॉर्म-8 एंट्री को तय नियमों के तहत ठीक करने का काम भी शुरू हो गया है।
जिलाधिकारी आलोक कुमार के मुताबिक, मंजूर हुए सभी 10,470 फॉर्म की नए सिरे से जांच होगी। जांच का दायरा सदर क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिले के पूरनपुर, बीसलपुर और बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियां भी खंगाली जाएंगी।
विपक्ष की शिकायत से शुरू हुआ मामला
उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया था कि पीलीभीत सदर क्षेत्र की अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद 13,150 मतदाताओं के नाम बदल दिए गए, जबकि उनके EPIC नंबर और क्रम संख्या पहले जैसी ही रहीं। पार्टी ने चुनाव आयोग से की गई शिकायत में क्षेत्र में रह रहे कुछ मतदाताओं के नाम हटाने और वहां न रहने वाले 2,600 लोगों के नाम जोड़ने का भी आरोप लगाया था। समाजवादी पार्टी ने भी ऐसी ही चिंताएं उठाईं। इसी शिकायत के बाद CEO ने उसी शाम ERO और VRC ऑपरेटर को मतदाता सूची के काम से तुरंत हटाने का आदेश दिया था।
पीलीभीत सदर सीट से भाजपा विधायक संजय सिंह गंगवार प्रदेश सरकार में मंत्री हैं। उन्होंने 2022 का विधानसभा चुनाव 6,920 वोटों से जीता था। कांग्रेस और सपा ने आरोप लगाया है कि अफसरों ने यह सब मंत्री के इशारे पर किया और मामले की CBI जांच की मांग की है। खबर लिखे जाने तक इन आरोपों पर मंत्री की कोई प्रतिक्रिया हमें नहीं मिली थी।
यह भी पढ़ें: SIR Case: राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को नोटिस, CJI बोले- न्यायपालिका को कोई धमका नहीं सकता
अब आगे क्या
अब सबकी नजर फॉर्म-6 और फॉर्म-7 की जांच रिपोर्ट पर है। उसी से साफ होगा कि गड़बड़ी सिर्फ ब्योरा बदलने तक सीमित थी या नाम जोड़ने और हटाने में भी हेरफेर हुआ। FIR के बाद पुलिस जांच में यह भी देखा जाएगा कि बिना फॉर्म के इतनी बड़ी संख्या में एंट्री कैसे मंजूर हुईं और इसके पीछे किसका हाथ था।
पीलीभीत के मतदाता चुनाव आयोग की वेबसाइट electoralsearch.eci.gov.in पर अपना EPIC नंबर डालकर देख सकते हैं कि उनका नाम, पता और बाकी ब्योरा सही दर्ज है या नहीं। कोई गलती दिखने पर अपने बूथ लेवल अधिकारी (BLO) या निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के दफ्तर से संपर्क किया जा सकता है।










































































































































































