CJP Arrest: जंतर मंतर में बिना अनुमति घुसने के आरोप में सौरव दास, अशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे निवारक हिरासत में; आज मजिस्ट्रेट के सामने पेशी

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास, अशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को जंतर मंतर में बिना अनुमति घुसने के आरोप में निवारक हिरासत (preventive arrest) में लिया है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि तीनों को बुधवार को मंदिर मार्ग स्थित विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) के न्यायालय में पेश किया जाएगा।
पुलिस का आरोप है कि मंगलवार सुबह ये नेता हाल ही में प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाई किए गए जंतर मंतर क्षेत्र में बिना अनुमति घुसे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की। निवारक हिरासत का मतलब है कि किसी व्यक्ति को संज्ञेय अपराध या शांति भंग रोकने के लिए बिना वारंट हिरासत में लिया जा सकता है; मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना 24 घंटे से ज्यादा पुलिस हिरासत में नहीं रखा जा सकता।

कैसे घुसे जंतर मंतर
सूचनाओं के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब 14 सदस्यीय समूह ने जंतर मंतर रोड से जुड़ी संकरी गली का इस्तेमाल कर JD(U) कार्यालय परिसर तक पहुंच बनाई और बंद लोहे के गेट को फांदकर अंदर घुसा। वहां उन्होंने तिरंगा फहराया और “ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो” तथा “भारत माता की जय” जैसे नारे लगाए। इसके तुरंत बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने X पर लिखा कि तिरंगा लेकर जंतर मंतर पहुंचे कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। उन्होंने रांका, दास, शिंदे सहित अन्य सदस्यों की हिरासत की पुष्टि करते हुए कहा, “You cannot denotify the resistance।”
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FIR, आरोप और पेशी
सूत्रों के अनुसार, तीनों के खिलाफ अतिक्रमण (trespass), निषेधात्मक आदेशों का उल्लंघन, शांति बंधपत्र तोड़ना और लोक सेवक के कर्तव्य में बाधा डालने जैसे आरोप दर्ज किए गए हैं। CJP के वकीलों ने कहा कि कनॉट प्लेस थाने में FIR दर्ज हुई है, हालांकि उन्हें अभी इसकी प्रति नहीं मिली।
CJP की कानूनी टीम प्रमुख रत्ना सिंह ने X पर बताया कि तीनों को रात करीब 3 बजे निजी वैन में संसद मार्ग थाना लाया गया और देर रात तक वकीलों से मुलाकात नहीं होने दी गई। उन्होंने न्यायिक हिरासत (तिहाड़) की संभावना भी जताई और हिरासत को अवैध बताया। पुलिस पक्ष इसे निवारक हिरासत बता रहा है।

पहले का बॉन्ड और पृष्ठभूमि
रांका और दास 10 अक्टूबर को भी दिल्ली में हिरासत में लिए गए थे। तब उन्हें 50-50 हजार रुपये के जमानत बॉन्ड पर रिहा किया गया था, इस शर्त के साथ कि वे एक साल तक शांति भंग या सार्वजनिक अशांति का कोई कृत्य नहीं करेंगे। पुलिस का पक्ष है कि जंतर मंतर घुसपैठ उसी बॉन्ड का उल्लंघन भी है।
जंतर मंतर को हाल में नामित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया है। पुलिस ने वैकल्पिक स्थलों के रूप में रामलीला मैदान, शाहदरा का CBD ग्राउंड और बुराड़ी ग्राउंड नामित किए हैं। CJP और विपक्षी दल विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। चुनाव आयोग इन आरोपों से इनकार करता रहा है। तीनों की पेशी के बाद मजिस्ट्रेट आगे का आदेश तय करेंगे।
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