अक्टूबर 13, 2026

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Governors Reshuffle: कारगिल शहीद की पत्नी सुधा यादव बनीं कर्नाटक की राज्यपाल; राष्ट्रपति ने 6 राज्यों में बदले राज्यपाल, जानें किसे कहां भेजा

डॉ. सुधा यादव, कर्नाटक की नवनियुक्त राज्यपाल

नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार, 12 अक्टूबर को छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति और फेरबदल को मंजूरी दे दी। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार केरलम, तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक, उत्तराखंड और सिक्किम को नए राज्यपाल मिलेंगे। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा हरियाणा की पूर्व सांसद डॉ. सुधा यादव की है, जिन्हें कर्नाटक का राज्यपाल बनाया गया है। उनके पति, सीमा सुरक्षा बल (BSF) के डिप्टी कमांडेंट सुखबीर सिंह यादव, कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे।

राष्ट्रपति भवन की विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि ये सभी नियुक्तियां उस तिथि से प्रभावी होंगी, जिस दिन संबंधित व्यक्ति अपने पद का कार्यभार ग्रहण करेंगे। इस फेरबदल में दो मौजूदा राज्यपालों को नए राज्यों में भेजा गया है, जबकि चार नए चेहरों को पहली बार राजभवन की जिम्मेदारी मिली है।

किस राज्य में कौन होगा नया राज्यपाल

राज्यनए राज्यपालअब तक की भूमिका
केरलमओम प्रकाश माथुरसिक्किम के राज्यपाल
तमिलनाडुराजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकरकेरलम के राज्यपाल, तमिलनाडु का अतिरिक्त प्रभार
ओडिशाब्रज मोहन रामपलामू (झारखंड) से पूर्व लोकसभा सांसद
कर्नाटकडॉ. सुधा यादवमहेंद्रगढ़ (हरियाणा) से पूर्व लोकसभा सांसद
उत्तराखंडडॉ. ढाल सिंह बिसेनबालाघाट (मध्य प्रदेश) से पूर्व लोकसभा सांसद
सिक्किमदुष्यंत गौतमपूर्व राज्यसभा सांसद, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव रह चुके
कर्नाटक की नवनियुक्त राज्यपाल डॉ. सुधा यादव
कर्नाटक की नवनियुक्त राज्यपाल डॉ. सुधा यादव। फोटो: Indic Scholar / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

कारगिल की विधवा से संसद और अब राजभवन तक

डॉ. सुधा यादव का सार्वजनिक जीवन एक निजी त्रासदी के बाद शुरू हुआ। 1999 के कारगिल युद्ध में उनके पति, BSF के डिप्टी कमांडेंट सुखबीर सिंह यादव ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उसी वर्ष भाजपा ने उन्हें हरियाणा की महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया और राजनीति में पहला कदम रखते ही उन्होंने कांग्रेस के राव इंद्रजीत सिंह को हराकर संसद में प्रवेश किया। वे 1999 से 2004 तक लोकसभा सदस्य रहीं।

राजनीति में आने से पहले वे शिक्षा जगत से जुड़ी थीं। उन्होंने IIT रुड़की से 1987 में रसायन विज्ञान में एमएससी और 1992 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। अगस्त 2022 में उन्हें भाजपा के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले निकाय, केंद्रीय संसदीय बोर्ड में शामिल किया गया। सुषमा स्वराज के बाद इस बोर्ड में जगह पाने वाली वे दूसरी महिला हैं। कर्नाटक में वे थावरचंद गहलोत का स्थान लेंगी।

नियुक्ति की घोषणा के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक्स पर लिखा, “भाजपा केंद्रीय संसदीय बोर्ड एवं केंद्रीय चुनाव समिति की सदस्य, पूर्व लोकसभा सांसद व हरियाणा की वरिष्ठ भाजपा नेत्री श्रीमती डॉ. सुधा यादव जी को कर्नाटक की राज्यपाल नियुक्त होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।” वहीं कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने लिखा कि सुधा यादव के व्यापक अनुभव और जनसेवा के प्रति समर्पण से राज्य के संवैधानिक मूल्य और मजबूत होंगे।

दो राज्यपालों के राज्य बदले

राजस्थान से राज्यसभा सदस्य रह चुके वरिष्ठ भाजपा नेता ओम प्रकाश माथुर जुलाई 2024 से सिक्किम के राज्यपाल थे। अब वे केरलम के राजभवन की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनकी जगह सिक्किम में दुष्यंत गौतम राज्यपाल होंगे, जो भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा से लंबे समय तक जुड़े रहे हैं।

गोवा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर इससे पहले बिहार और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल भी रह चुके हैं। केरलम के राज्यपाल रहते हुए वे तमिलनाडु का अतिरिक्त प्रभार भी देख रहे थे। अब उन्हें तमिलनाडु का पूर्णकालिक राज्यपाल बनाया गया है।

तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर
राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर अब तमिलनाडु के पूर्णकालिक राज्यपाल होंगे। फोटो: PIB / Wikimedia Commons (GODL-India)

चुनावी राज्य उत्तराखंड और ओडिशा को नए चेहरे

उत्तराखंड, जहां अगले वर्ष की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं, अब डॉ. ढाल सिंह बिसेन को राज्यपाल के रूप में मिलेगा। बिसेन 2019 में मध्य प्रदेश की बालाघाट सीट से लोकसभा पहुंचे थे और 2003 से 2005 तक मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। वे चार बार विधायक भी चुने गए। उत्तराखंड में वे लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह के उत्तराधिकारी होंगे, जिनका कार्यकाल सितंबर में पूरा हो गया था।

ओडिशा के नए राज्यपाल ब्रज मोहन राम 1996 से 2004 तक लगातार तीन बार झारखंड की पलामू सीट से लोकसभा सांसद रहे हैं।

राज्यपाल की नियुक्ति कैसे होती है

संविधान के अनुच्छेद 155 के तहत राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुहर वाले अधिपत्र से करते हैं। अनुच्छेद 156 के अनुसार राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहते हैं और उनका सामान्य कार्यकाल पद ग्रहण की तिथि से पांच वर्ष का होता है। पद की शपथ संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दिलाते हैं। राष्ट्रपति भवन ने कार्यभार ग्रहण की तारीखें घोषित नहीं की हैं, इसलिए आने वाले दिनों में छहों राजभवनों में शपथ ग्रहण समारोह होंगे।

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