IDBI Fairfax Deal: कैबिनेट ने Fairfax को IDBI बैंक की 60.72% हिस्सेदारी ₹52,878 करोड़ में बेचने को मंजूरी दी

नई दिल्ली: आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने बुधवार, 14 अक्टूबर को कनाडा की Fairfax Financial Holdings Ltd. की सहायक कंपनी 10955230 Canada Inc. को IDBI बैंक में 60.72% हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दे दी। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के अनुसार खरीद मूल्य ₹52,878.08 करोड़ है। सौदा पूरा होने पर यह भारत के वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) होगा।
इस सौदे में सरकार की 30.48% और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की 30.24% हिस्सेदारी शामिल है। बिक्री के बाद सरकार के पास 15% और LIC के पास 19% अवशिष्ट हिस्सेदारी रहेगी। PIB के FAQ के मुताबिक दोनों पक्ष बोर्ड से अपने नामित सदस्यों को हटाकर सार्वजनिक शेयरधारक बन जाएंगे।

बिड कितनी थी और मूल्यांकन कैसे हुआ
PIB के अनुसार विजेता बोली ₹81 प्रति शेयर थी। दो स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसियों ने दो अलग तरीकों—मार्केट मल्टीपल और एसेट वैल्यूएशन—से बैंक का उचित मूल्य निकाला। दोनों का औसत ₹75.99 प्रति शेयर बेंचमार्क तय हुआ। चूंकि विजेता बोली बेंचमार्क और दोनों एजेंसियों के अनुमान से ऊपर थी, इसे उचित मानकर मंजूरी दी गई।
प्रक्रिया दो चरणों में चली। शुरुआत में पांच पक्षों ने रुचि जताई, चार पात्र ठहरे और अंत में दो ने तकनीकी-वित्तीय बोलियां दीं। पहले दौर की बोलियां उस समय तय आरक्षित मूल्य ₹94.42 प्रति शेयर से कम रह गईं। इसके बाद योग्य बोलीदाताओं से सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव मांगे गए, जिन पर यह फैसला आधारित है।
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निर्मला सीतारमण और अश्विनी वैष्णव ने क्या कहा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने X पर लिखा कि CCEA की मंजूरी भारत के सुधार पथ का एक और पड़ाव है। उन्होंने कहा कि बैंक के सुधार में सहयोग के बाद अब सरकार अल्पांश हिस्सेदारी रखते हुए FDI के जरिए इसके अगले विकास चरण को सक्षम बना रही है। उनके मुताबिक इससे बैंकिंग पारिस्थितिकी मजबूत होगी और यह रेखांकित करता है कि भारत की विकास कहानी मजबूत व अर्थव्यवस्था लचीली है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ब्रीफिंग में कहा कि वित्तीय क्षेत्र को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। ANI के अनुसार उन्होंने बताया कि इससे वित्तीय सेवाओं में नई पूंजी आएगी, FDI बढ़ेगा और MSME व नई उद्योग इकाइयों के लिए विकास के नए मौके बनेंगे। IDBI बैंक को उन्होंने MSME और नई उद्योग इकाइयों की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण संस्था बताया।
अब आगे क्या—RBI मंजूरी जरूरी
PIB कहता है कि सफल बोलीदाता को अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सामने ‘Fit and Proper’ मूल्यांकन के अनुरूप अपनी साख पेश करनी होगी और नियामकीय शर्तों के पालन का रोडमैप देना होगा। CCEA ने सरकार की बची 15% हिस्सेदारी को खुले बाजार में बेचने के लिए वैकल्पिक तंत्र (Alternative Mechanism) को भी अधिकार सौंपे हैं। LIC अपनी अवशिष्ट हिस्सेदारी अपने नियामकों के निर्देशों के अनुरूप प्रबंधित कर सकेगी।
PIB के अनुसार रणनीतिक खरीददार से निजी पूंजी, नई तकनीक और बेहतर प्रबंधन पद्धतियां आने की उम्मीद है, जिससे बैंक की ऋण व जमा वृद्धि दोनों में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। बैंक इससे पहले खराब वित्तीय हालत के कारण सरकारी व LIC पूंजी पर निर्भर रहा था; RBI ने मई 2017 में इसे Prompt Corrective Action के दायरे में रखा था और मार्च 2021 में शर्तों के साथ पाबंदियां हटाई थीं।
कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू ने मुंबई में ANI से बातचीत में भारत में कनाडाई निवेश के अवसरों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। अब नजर RBI की नियामकीय प्रक्रिया और सौदे के अगले चरणों पर है।
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