NSAP Cabinet Approval: कैबिनेट ने सामाजिक सहायता योजना पांच साल बढ़ाई; दिव्यांग पेंशन में उम्र और पात्रता के बड़े बदलाव

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच साल के लिए जारी रखने को मंजूरी दे दी। ग्रामीण विकास विभाग के प्रस्ताव पर लिए गए इस फैसले में कुल ₹53,428 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के अनुसार इससे देश के सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में करीब 3.20 करोड़ लाभार्थी जुड़ेंगे।
योजना का नया नाम प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना होगा। उप-योजनाओं के नाम भी बदले गए हैं, जबकि वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और पारिवारिक लाभ योजना अपने मौजूदा स्वरूप में जारी रहेंगी। सबसे बड़ा बदलाव दिव्यांगजन पेंशन में किया गया है—पात्रता की सीमा घटी है, सहायता राशि बढ़ी है और पात्रता अब जन्म से लागू होगी।

नए नाम क्या हैं
PIB के अनुसार मुख्य योजना और उसकी चार उप-योजनाओं के स्वीकृत नाम इस प्रकार हैं:
- NSAP → प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना → प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना → प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगता पेंशन योजना → प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना
- राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना → प्रधानमंत्री पारिवार लाभ योजना
दिव्यांग पेंशन में क्या बदला
नए नियमों के तहत दिव्यांगजन पेंशन की मासिक सहायता 0 से 79 वर्ष की आयु वालों के लिए ₹375 और 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र वालों के लिए ₹625 होगी। बेंचमार्क दिव्यांगता की शर्त अब 40 प्रतिशत है; पहले यह सीमा 80 प्रतिशत थी। न्यूनतम आयु की शर्त हटाकर पात्रता जन्म से लागू की गई है।
सरकार का कहना है कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के कारण पात्रता को 40 प्रतिशत बेंचमार्क से जोड़ना जरूरी हो गया। अधिनियम यह भी कहता है कि दिव्यांगता से जुड़ी सहायता इसी श्रेणी की अन्य योजनाओं से कम से कम 25 प्रतिशत अधिक होनी चाहिए। पात्रता, लाभार्थियों की संख्या और सहायता दर से जुड़े नए दिशानिर्देश तीन महीने के भीतर जारी कर लागू किए जाएंगे।

बाकी योजनाएं कैसे चलेंगी
वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और पारिवारिक लाभ योजना अपने मौजूदा स्वरूप में जारी रहेंगी; केवल उनके नाम बदले गए हैं। NSAP की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को हुई थी। संविधान के अनुच्छेद 41 के निर्देशक सिद्धांतों के तहत गरीब परिवारों को सहायता देना केंद्र की जिम्मेदारी मानी जाती है। PIB के अनुसार योजना पर 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता इसलिए दी जाती है कि देशभर में लाभ एक जैसा उपलब्ध रहे।

यह फैसला बुजुर्गों, विधवाओं, दिव्यांगजनों और परिवार की मुख्य कमाई खो चुके घरों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा साफ करता है। खासकर दिव्यांग बच्चों और युवाओं के लिए जन्म से पात्रता और 40 प्रतिशत बेंचमार्क का मतलब है कि पहले छूट जाने वाले कई परिवार अब योजना के दायरे में आ सकते हैं—बशर्ते तीन महीने में जारी दिशानिर्देशों के मुताबिक पंजीकरण और सत्यापन पूरा हो।
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