India-New Zealand FTA: न्यूजीलैंड में आज से हर भारतीय सामान ड्यूटी-फ्री, युवाओं को मिलेंगे नए वर्क वीजा

नई दिल्ली: भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) विजयादशमी के दिन मंगलवार, 20 अक्टूबर से लागू हो गया। इसके साथ ही न्यूजीलैंड ने भारत से जाने वाले सभी उत्पादों पर सीमा शुल्क खत्म कर दिया है, यानी अब भारत का हर निर्यात वहां बिना ड्यूटी के पहुंचेगा। समझौते में भारतीय पेशेवरों के लिए नए वर्क वीजा, छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद काम के अधिकार और न्यूजीलैंड की ओर से भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश कराने की प्रतिबद्धता भी शामिल है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार सुबह X पर लिखा, “भारत-न्यूजीलैंड FTA आज से लागू हो गया है। अवसरों का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है।” एक दिन पहले उन्होंने इसे दोनों देशों के लिए “सचमुच एक ‘विजय’” बताया था। गोयल पहले ही कह चुके थे कि समझौता लागू करने के लिए दशहरे यानी विजयादशमी का शुभ दिन चुना गया है।
वाणिज्य मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी बयान के मुताबिक गोयल ने कहा, “न्यूजीलैंड के बाजार में 100 प्रतिशत ड्यूटी-फ्री पहुंच हमारे निर्यातकों, खासकर MSME, कारीगरों, किसानों और महिला उद्यमियों के लिए बड़े नए अवसर खोलती है। किसानों के लिए इस समझौते में नए मौकों के साथ जरूरी सुरक्षा उपाय भी हैं।”
किन भारतीय उत्पादों को सबसे ज्यादा फायदा
मंत्रालय के मुताबिक न्यूजीलैंड ने भारतीय निर्यात से जुड़ी सभी टैरिफ लाइनों पर सीमा शुल्क हटा दिया है। अब तक वहां कुछ भारतीय उत्पादों पर 10 प्रतिशत तक शुल्क लगता था। कपड़ा और परिधान, चमड़ा और जूते-चप्पल, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स, रसायन, दवाएं, कृषि उत्पाद और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है। लकड़ी के लट्ठे, कोकिंग कोल और धातु का स्क्रैप भी बिना शुल्क के भारत आ सकेंगे, जिससे भारतीय उद्योगों का कच्चा माल सस्ता होगा।

समझौता लागू होने से ठीक पहले सोमवार को गोयल ने न्यूजीलैंड को पहली बार निर्यात की जा रही, पुणे में बनी JCB मशीन को हरी झंडी दिखाई। मंत्रालय के मुताबिक समझौता लागू होने के दिन कृषि, रत्न-आभूषण, इंजीनियरिंग, खेल के सामान, जूते-चप्पल और चमड़ा क्षेत्र के उत्पादों की खेपें भी रवाना करने की योजना है।
सेवा क्षेत्र में न्यूजीलैंड ने अपने किसी भी व्यापार समझौते में अब तक का सबसे अच्छा प्रस्ताव भारत को दिया है। करीब 118 सेवा क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों को बाजार तक पहुंच मिलेगी और करीब 139 उप-क्षेत्रों में उन्हें सबसे पसंदीदा राष्ट्र (MFN) जैसा व्यवहार मिलेगा। पहली बार न्यूजीलैंड ने आयुर्वेद, योग और दूसरी आयुष पद्धतियों समेत स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं के लिए भी अलग से रास्ता खोला है। दवा और मेडिकल डिवाइस कंपनियों के लिए नियामकीय प्रक्रियाएं भी आसान की गई हैं।
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युवाओं और छात्रों के लिए क्या बदला
विदेश में नौकरी और पढ़ाई का सपना देख रहे भारतीय युवाओं के लिए भी इस समझौते में कई अहम प्रावधान हैं। इमिग्रेशन न्यूजीलैंड के मुताबिक आज से भारतीयों के लिए अस्थायी रोजगार प्रवेश (TEE) वीजा की दो नई श्रेणियां शुरू हो गई हैं। ये ज्यादा कुशल पेशों और भारत की पहचान से जुड़े कुछ चुनिंदा पेशों के लिए हैं। इनके तहत एक समय में अधिकतम 5,000 भारतीय न्यूजीलैंड में काम कर सकेंगे और ज्यादातर जगहें वहां की ‘ग्रीन लिस्ट’ में शामिल कुशल पेशों के लिए होंगी।
यह वीजा पाने के लिए किसी मान्यता प्राप्त न्यूजीलैंड नियोक्ता से नौकरी का प्रस्ताव, जरूरी योग्यता और अंग्रेजी भाषा की शर्तें पूरी करनी होंगी। स्वास्थ्य और चरित्र से जुड़ी जांच भी होगी। यह वीजा तीन साल के लिए होगा, लेकिन इससे वहां स्थायी निवास (रेजिडेंस) का रास्ता नहीं खुलेगा।
वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक न्यूजीलैंड जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या पर कोई सीमा नहीं होगी। STEM विषयों में बैचलर और मास्टर डिग्री लेने वाले भारतीयों को पढ़ाई के बाद तीन साल तक और डॉक्टरेट करने वालों को चार साल तक काम करने का अधिकार मिलेगा। इमिग्रेशन न्यूजीलैंड के अनुसार न्यूजीलैंड से PhD करने वाले भारतीयों के लिए पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा की अवधि 16 नवंबर 2026 से तीन साल की जगह चार साल हो जाएगी।
फिलहाल सभी देशों के छात्र पढ़ाई के दौरान हफ्ते में 25 घंटे तक काम कर सकते हैं। समझौते में यह गारंटी दी गई है कि अगर आगे नियम बदलते हैं, तब भी भारतीय छात्रों को हफ्ते में कम से कम 20 घंटे काम की अनुमति मिलती रहेगी। इसके अलावा 18 से 30 साल के भारतीयों के लिए वर्किंग हॉलिडे योजना समझौता लागू होने के दो साल के भीतर शुरू की जाएगी। इसमें हर साल 1,000 युवाओं को 12 महीने तक न्यूजीलैंड में रहने और काम करने का मौका मिलेगा।
डेयरी और चीनी पर कोई छूट नहीं, किसानों के लिए सुरक्षा कवच
किसानों और पशुपालकों की चिंता को देखते हुए डेयरी, चीनी, खाद्य तेल और प्रमुख कृषि उत्पादों को रियायतों से बाहर रखा गया है। न्यूजीलैंड दुनिया के बड़े डेयरी निर्यातकों में गिना जाता है, इसलिए यह भारत के लिए अहम शर्त थी। सख्त ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’, द्विपक्षीय सेफगार्ड व्यवस्था और गलत रास्ते से माल भेजने पर रोक के प्रावधान भी रखे गए हैं, ताकि फायदा सिर्फ असली भारतीय निर्यातकों को मिले।
समझौते के तहत कृषि उत्पादकता साझेदारी भी बनाई गई है, जिसमें कीवी, सेब और शहद के लिए अलग कार्ययोजनाएं हैं। कीवी के लिए पहले चरण में नगालैंड के फत्सेरो और उत्तराखंड के मगरा में उत्कृष्टता केंद्र बनेंगे। सेब के दो केंद्र हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में तथा शहद के केंद्र उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित हैं। न्यूजीलैंड से आने वाले सेब, कीवी और मनुका शहद के लिए तय कोटा इन्हीं कार्ययोजनाओं की प्रगति से जोड़ा गया है।
न्यूजीलैंड को क्या मिला
न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले के मुताबिक आज से भारत को होने वाले न्यूजीलैंड के करीब 57 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क खत्म हो गया है, जो समय के साथ बढ़कर 82 प्रतिशत हो जाएगा। भेड़ के मांस, ऊन और कोयले पर शुल्क हट गया है, जबकि सेब, कीवी और मिल्क एल्ब्यूमिन के लिए तय कोटे में रियायती पहुंच मिली है। शुल्क कटौती का दूसरा दौर 1 जनवरी 2027 से शुरू होगा। मैक्ले ने बताया कि न्यूजीलैंड की वाइन पर भारत में अब तक 150 प्रतिशत शुल्क लगता था, जो अगले 10 साल में घटकर 25 या 50 प्रतिशत रह जाएगा।
मैक्ले ने कहा, “हमने मार्च 2025 में बातचीत शुरू की थी और ज्यादा मेहनत और तेजी से काम करके इसे सिर्फ नौ महीने में पूरा किया। बातचीत शुरू होने के 19 महीने बाद आज यह समझौता लागू होकर निर्यातकों के काम आ रहा है।” उन्होंने कहा कि इससे न्यूजीलैंड के कारोबारियों के लिए 1.4 अरब उपभोक्ताओं वाले भारतीय बाजार के दरवाजे खुल गए हैं।

इस समझौते के लिए बातचीत 16 मार्च 2025 को शुरू हुई थी और 22 दिसंबर 2025 को पूरी हुई। 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में गोयल और मैक्ले ने इस पर हस्ताक्षर किए और 16 सितंबर को न्यूजीलैंड की संसद ने इससे जुड़ा कानून पारित किया। न्यूजीलैंड के विदेश व्यापार मंत्रालय के मुताबिक दोनों देशों के बीच सालाना कारोबार करीब 3.95 अरब न्यूजीलैंड डॉलर का है। दोनों देशों ने 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं के इस व्यापार को दोगुना करके करीब 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर (लगभग 35,000 करोड़ रुपये) तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
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वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, “अब असली काम इस मौके को लोगों के लिए वास्तविक फायदे में बदलना है। हम सभी उद्योगों और संगठनों के साथ मिलकर यह संदेश देश के हर जिले तक पहुंचा रहे हैं।” मंत्रालय के मुताबिक यह समझौता MSME, महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों, स्टार्टअप, कारीगरों और पहली पीढ़ी के उद्यमियों के लिए एक विकसित विदेशी बाजार खोलता है। शून्य शुल्क और तेज कस्टम प्रक्रिया से उनका माल न्यूजीलैंड में सस्ता पहुंचेगा और ग्राहकों का दायरा बढ़ेगा।
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