UPI MDR Deferred: त्योहारों से पहले राहत—NPCI ने 15 अक्टूबर वाला 0.4% मर्चेंट शुल्क दिवाली के बाद टाला

मुंबई: त्योहारी सीजन में दुकानदारों और छोटे व्यापारियों को राहत देते हुए राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI लेनदेन पर लागू होने वाला मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) टाल दिया है। मुंबई से 13 अक्टूबर 2026 को जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमिटी ने फैसला किया कि यह शुल्क दिवाली के तुरंत बाद किसी अलग से अधिसूचित तारीख से लागू होगा। पहले यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से शुरू होनी थी।
NPCI ने साफ कहा है कि यह फैसला त्योहारी मौसम को ध्यान में रखकर लिया गया है। दिवाली 2026 अक्टूबर के अंत में पड़ रही है और शरद नवरात्रि 11 से 19 अक्टूबर तक चल रही है। ऐसे समय में लाखों व्यापारी QR कोड और UPI ऐप से रोजाना भुगतान ले रहे हैं; शुल्क को आगे खिसकाने से त्योहारी बिक्री पर तुरंत अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

पहले क्या तय था: 0.4% और ₹300 की सीमा
15 सितंबर 2026 को जारी NPCI के आधिकारिक FAQ के मुताबिक, चुनिंदा P2M UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR तय किया गया था। ₹2,000 से ऊपर के लेनदेन पर यह दर लागू होनी थी, जबकि ₹75,000 और उससे अधिक के लेनदेन पर शुल्क की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई थी। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसे कुछ वर्गों के लिए फ्लैट ₹5 प्रति लेनदेन का प्रावधान FAQ में दर्ज है।
जरूरी बात यह है कि यह शुल्क मर्चेंट साइड पर लगता है—ग्राहक के खाते से अपने-आप नहीं कटता। FAQ साफ कहता है कि व्यापारी इस MDR को ग्राहक पर नहीं डाल सकते। पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांसफर मुफ्त रहेंगे, और ₹2,000 से कम के P2M लेनदेन भी मुफ्त रहेंगे। छोटे व्यापारियों (P2PM) के लिए, जिनका मासिक UPI कारोबार ₹1 लाख तक है, FAQ में MDR शून्य बताया गया है।
कौन राहत में, कौन इंतजार में
स्ट्रीट वेंडर, किराना दुकान और छोटे सेवा प्रदाता—जिनका ज्यादातर कारोबार छोटे QR भुगतानों पर टिका है—त्योहारों तक अतिरिक्त शुल्क से बचे रहेंगे। बड़े ऑनलाइन और ऑफलाइन मर्चेंट्स के लिए भी 15 अक्टूबर वाली तारीख अब लागू नहीं है; नई तारीख NPCI अलग से बताएगा। उपभोक्ताओं के लिए तत्काल कोई नया चार्ज नहीं जुड़ा है, क्योंकि व्यवस्था पहले भी मर्चेंट-साइड थी और फिलहाल टाली गई है।

UPI का आकार: क्यों मायने रखता है यह फैसला
NPCI के FAQ में अगस्त 2026 के आंकड़े हैं—उस महीने करीब 2,451 करोड़ UPI लेनदेन हुए और मूल्य लगभग ₹29.9 लाख करोड़ रहा। इतनी बड़ी व्यवस्था में चुनिंदा मर्चेंट शुल्क का समय तय करना सीधे त्योहारी कारोबार और डिजिटल भुगतान की रफ्तार दोनों को छूता है। स्टीयरिंग कमिटी ने शुल्क रद्द नहीं किया, केवल लागू होने की तारीख आगे बढ़ाई है; इसलिए व्यापारी समुदाय को नई अधिसूचना का इंतजार रहेगा।
बाजार में इस घोषणा के बाद फिनटेक शेयरों में उतार-चढ़ाव भी दिखा—कुछ रिपोर्टों में Paytm, Pine Labs और MobiKwik जैसे नामों का जिक्र रहा—लेकिन मूल बात NPCI की प्रेस रिलीज ही है: MDR रद्द नहीं, दिवाली के बाद लागू। उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों के लिए फिलहाल संदेश साफ है—त्योहारों में UPI से भुगतान-प्राप्ति पहले जैसी सुविधा के साथ जारी रह सकती है, जब तक नई तारीख न आए।
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