El Nino Record: प्रशांत महासागर में रिकॉर्ड 29.70°C, गेहूं की फसल पर कितना खतरा?

नई दिल्ली: प्रशांत महासागर में पनप रहा एल नीनो अब रिकॉर्ड तोड़ने लगा है। यूरोपीय संघ की जलवायु एजेंसी कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) ने सोमवार को जारी मासिक बुलेटिन में बताया कि सितंबर में एल नीनो की निगरानी वाले ‘नीनो 3.4’ क्षेत्र में समुद्री सतह का औसत तापमान 29.70 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह अब तक का सबसे ऊंचा मासिक स्तर है। इसने 1982-83, 1997-98 और 2015-16 के बेहद ताकतवर एल नीनो के चरम को भी पीछे छोड़ दिया है।
भारत के लिए यह सिर्फ समुद्र के आंकड़ों की खबर नहीं है। देश एक दशक के सबसे कमजोर मानसून से अभी-अभी निकला है और अब सरकार की चिंता अक्टूबर-नवंबर में शुरू होने वाली रबी बुवाई, खासकर गेहूं को लेकर है।
चरम अभी बाकी, फिर भी टूट गया रिकॉर्ड
कोपरनिकस के मुताबिक यह आंकड़ा मौजूदा एल नीनो की “असाधारण तीव्रता” दिखाता है, जबकि यह अभी अपने चरम पर भी नहीं पहुंचा है। फिर भी एजेंसी इसे “अब तक का सबसे ताकतवर एल नीनो” कहने से बच रही है। उसका तर्क है कि महासागरों के लगातार गर्म होने से पुराने और नए एल नीनो की सीधी तुलना मुश्किल हो गई है।
दूसरी बड़ी एजेंसियां ज्यादा साफ शब्दों में बात कर रही हैं। जापान मौसम एजेंसी (JMA) ने 9 अक्टूबर को कहा कि एल नीनो “अब तक की सबसे ज्यादा तीव्रता” पर पहुंच गया है। उसके अनुसार सितंबर में नीनो-3 क्षेत्र का तापमान सामान्य से 4.0 डिग्री ऊपर रहा, जबकि पिछला रिकॉर्ड दिसंबर 1997 का +3.6 डिग्री था। अमेरिकी एजेंसी NOAA के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर ने 8 अक्टूबर की समीक्षा में अक्टूबर-दिसंबर के दौरान “ऐतिहासिक” एल नीनो की संभावना 83 प्रतिशत बताई है, यानी ऐसा एल नीनो जो 1950 के बाद के सभी एल नीनो से ज्यादा ताकतवर हो।
| एजेंसी | ताजा आकलन | तारीख |
|---|---|---|
| कोपरनिकस (यूरोपीय संघ) | नीनो 3.4 का मासिक तापमान 29.70°C, अब तक का सबसे ऊंचा | 12 अक्टूबर |
| JMA (जापान) | नीनो-3 सामान्य से 4.0°C ऊपर, 1949 से अब तक का रिकॉर्ड | 9 अक्टूबर |
| NOAA (अमेरिका) | अक्टूबर-दिसंबर में ऐतिहासिक एल नीनो की 83% संभावना | 8 अक्टूबर |
| IMD (भारत) | मजबूत एल नीनो, साल के अंत तक और तेज होने का अनुमान | 8 अक्टूबर |

समुद्र से जमीन तक, दुनिया का पारा चढ़ा
कोपरनिकस के अनुसार सितंबर में दुनिया के समुद्रों का औसत सतही तापमान 21.05 डिग्री रहा, जो इस महीने का नया रिकॉर्ड है। कुल मिलाकर यह अब तक का दूसरा सबसे गर्म सितंबर रहा, जब धरती का औसत तापमान औद्योगिक युग से पहले के स्तर से 1.63 डिग्री ज्यादा दर्ज हुआ।
कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के निदेशक कार्लो बुओनटेम्पो ने कहा, “हम 1.5 डिग्री से ऊपर वाले महीनों के नए दौर में हैं और लगातार मजबूत होते एल नीनो के कारण यह सिलसिला 2027 तक चल सकता है।”
भारत में मानसून पहले ही दे चुका है झटका
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार जून-सितंबर के मानसून में देश में 759.4 मिमी बारिश हुई, जो दीर्घावधि औसत (LPA) का सिर्फ 87 प्रतिशत है। यह 2001 के बाद की चौथी सबसे कम बारिश है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में तो 1901 के बाद सबसे कम बारिश दर्ज हुई, जबकि दक्षिण प्रायद्वीप को औसत की 76 प्रतिशत बारिश ही मिली। देश के 36 मौसम उप-संभागों में से 17 में बारिश सामान्य से कम रही, जिनके दायरे में देश का 42 प्रतिशत क्षेत्रफल आता है।
अक्टूबर की शुरुआत भी सूखी रही। IMD के मुताबिक 1 से 7 अक्टूबर के बीच देशभर में बारिश सामान्य से 72 प्रतिशत कम हुई। विभाग ने 8 अक्टूबर को कहा कि प्रशांत में “मजबूत एल नीनो स्थितियां” बनी हुई हैं और आने वाले महीनों में इनके और मजबूत होने की उम्मीद है।
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गेहूं पर क्यों है सबसे ज्यादा चिंता
वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) ने 1 अक्टूबर को जारी सितंबर की मासिक आर्थिक समीक्षा में साफ चेतावनी दी है, “मजबूत एल नीनो गर्मी के तनाव और मिट्टी की घटती नमी के जरिए आगामी रबी फसल के लिए जोखिम पैदा कर सकता है, हालांकि सकारात्मक हिंद महासागर डाइपोल (IOD) इन प्रभावों की कुछ हद तक भरपाई कर सकता है।” इससे पहले अगस्त की समीक्षा में मंत्रालय ने खासतौर पर गेहूं और सरसों का नाम लेते हुए कहा था कि एल नीनो मिट्टी की नमी और इन फसलों के लिए जरूरी ठंड, दोनों पर असर डाल सकता है।
सरकार ने इसी जोखिम को देखते हुए इस साल का खाद्यान्न लक्ष्य पिछले साल के उत्पादन से नीचे रखा है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 29 सितंबर को रबी अभियान सम्मेलन के बाद मीडिया से कहा, “2025-26 में 362.60 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले उत्पादन 376.56 मिलियन टन पहुंचा था। एल नीनो को देखते हुए 2026-27 का लक्ष्य 373.93 मिलियन टन रखा गया है।” रबी सीजन के लिए खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य 177.72 मिलियन टन तय किया गया है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा गेहूं का है।

कृषि मंत्रालय ने राज्यों से कहा है कि हर जिले में सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी का आकलन करके ही फसल योजना बनाई जाए और जहां पानी कम है, वहां दलहन-तिलहन जैसी कम पानी वाली फसलों को तरजीह दी जाए। चौहान ने कहा, “ऐसी स्थिति नहीं आनी चाहिए कि ज्यादा पानी वाली फसल बो दी जाए और बाद में पानी न मिलने से फसल बर्बाद हो जाए।”
अब नजर नवंबर पर है, जब जापान मौसम एजेंसी 10 नवंबर और NOAA 12 नवंबर को अपना नया आकलन जारी करेंगी। JMA पहले ही कह चुकी है कि उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों तक इस रिकॉर्ड-तोड़ एल नीनो का बने रहना “लगभग तय” (100 प्रतिशत) है और इसी मौसम में यह रिकॉर्ड स्तर पर चरम छू सकता है। यानी गेहूं की बुवाई से लेकर कटाई तक भारत के किसानों और नीति-निर्माताओं की नजर प्रशांत महासागर पर टिकी रहेगी।







































































