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Maharashtra Drought: 265 तालुकों में सूखा, फडणवीस बोले- अगस्त 2027 तक पीने के पानी को प्राथमिकता

महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित धाराशिव (उस्मानाबाद) जिले में सरकारी चारा शिविर में बंधे पंढरपुरी नस्ल के मवेशी

मुंबई: महाराष्ट्र इस साल गंभीर सूखे की चपेट में है और अब राहत की पूरी लड़ाई केंद्र की एक रिपोर्ट पर टिकी है। राज्य के 358 में से 265 तालुकों में सूखा घोषित हो चुका है। हालात का जायजा लेने आई केंद्रीय टीम के साथ रविवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बैठक की और कहा कि सरकार अगले छह से आठ महीनों के लिए रोजगार, अनाज, पीने के पानी और पशुओं के चारे की विस्तृत योजना बना रही है।

समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, मुंबई में मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ‘वर्षा’ पर हुई इस बैठक में फडणवीस ने साफ किया कि उपलब्ध पानी अगस्त 2027 तक सबसे पहले इंसानों और पशुओं के पीने के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। बाकी जरूरतों के लिए पानी इसके बाद ही दिया जाएगा।

बारिश की कमी ने बिगाड़ी खरीफ, रबी पर भी संकट

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 1 जून से 30 सितंबर के बीच महाराष्ट्र में 804.4 मिमी बारिश हुई, जबकि इस अवधि का औसत 994.5 मिमी है। यानी करीब 19 फीसदी कम बारिश। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 3 अक्टूबर को राज्य से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी का ऐलान किया, जो चार साल में सबसे जल्दी वापसी है। राज्य के 21 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई, जिनमें नागपुर, चंद्रपुर, हिंगोली, बीड और धाराशिव शामिल हैं।

फडणवीस ने बैठक में बताया कि फसल बढ़ने के अहम दौर में बारिश न होने से कई इलाकों में सोयाबीन को भारी नुकसान हुआ है, जबकि कपास, तूर और गन्ने की फसल भी प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि पानी की कमी के कारण रबी की बुवाई की संभावनाएं भी कमजोर हैं, यानी किसानों के पास खरीफ के नुकसान की भरपाई का रास्ता भी सीमित है।

सूखे की तस्वीर, आंकड़ों में

पैमानाआंकड़ा
सूखाग्रस्त घोषित तालुके265 (कुल 358 में से, करीब 74%)
बारिश (1 जून-30 सितंबर)804.4 मिमी, औसत 994.5 मिमी (करीब 19% कम)
कम बारिश वाले जिले21
सूखा प्रभावित गांव32,927 (इनमें 28,039 में मौका मुआयना)
केंद्र से मांगी गई अंतरिम मदद17,500 करोड़ रुपये
चारे का मौजूदा भंडार90 से 120 दिन तक का अनुमान
स्रोत: महाराष्ट्र सरकार के हवाले से PTI, हिंदुस्तान टाइम्स, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस

केंद्रीय टीम ने 7 जिलों में देखा हाल

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, फडणवीस ने 7 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर 17,500 करोड़ रुपये की अंतरिम आर्थिक मदद मांगी थी। इसके बाद केंद्रीय कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव मुक्तानंद अग्रवाल के नेतृत्व में 11 सदस्यों वाली अंतर-मंत्रालयी टीम राज्य पहुंची। इसमें कृषि, जल संसाधन, ग्रामीण विकास, खाद्य, वित्त मंत्रालय और नीति आयोग के अधिकारी शामिल हैं।

PTI के अनुसार, टीम के तीन दलों ने अहिल्यानगर, सोलापुर, जालना, बीड, धाराशिव, वाशिम और यवतमाल जिलों के सूखा प्रभावित गांवों में खेतों और जल स्रोतों का निरीक्षण किया और किसानों से बात की। राज्य के कृषि आयुक्त सूरज मांढरे ने कहा कि टीम की रिपोर्ट सात दिनों में आने की उम्मीद है, जबकि आम तौर पर ऐसी रिपोर्ट में एक महीने तक का समय लगता है।

मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद एक्स (X) पर लिखा कि महाराष्ट्र इस साल असाधारण रूप से चुनौतीपूर्ण सूखे का सामना कर रहा है:

राहत का खाका: टैंकर, चारा कैंप और रोजगार

फडणवीस ने बैठक में राहत की जो योजना रखी, उसकी मुख्य बातें इस तरह हैं:

  • पेयजल: छोटे गांवों में जल स्रोत सूख गए हैं, इसलिए बड़े पैमाने पर टैंकरों से पानी पहुंचाया जाएगा। वितरण में पारदर्शिता के लिए तकनीक का इस्तेमाल होगा।
  • चारा: सरकार तय दरों पर चारा खरीदेगी और उसका भंडारण करेगी। जरूरत पड़ने पर अच्छी बारिश वाले दूसरे राज्यों से भी चारा खरीदा जा सकता है। जहां जरूरत होगी, वहां चारा और पशु शिविर लगेंगे।
  • रोजगार और अनाज: खेतिहर मजदूरी पर निर्भर छोटे किसानों को रोजगार और खाद्य सुरक्षा योजनाओं के जरिए मदद दी जाएगी।
  • जल संरक्षण: जल भंडारण ढांचों की गाद निकालने, मरम्मत और पुनर्जीवन का काम होगा, जिससे गांवों में रोजगार भी मिलेगा।
  • फसल बीमा: केंद्र के साथ समन्वय कर बीमित किसानों को जल्द भुगतान दिलाने की कोशिश होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र के नियमों के मुताबिक आंकड़ों के साथ विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा, जबकि एक अग्रिम ज्ञापन पहले ही दिया जा चुका है। उनके मुताबिक, गृह मंत्री ने भरोसा दिलाया है कि राहत प्रक्रिया तेज करने के लिए अंतर-मंत्रालयी समूह की बैठक जल्द बुलाई जाएगी। बैठक में आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन, कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे और राहत एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद जाधव पाटिल भी मौजूद थे।

इससे पहले शनिवार को लातूर के पालक मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले ने किसानों से अपील की थी कि वे उम्मीद न छोड़ें और आत्महत्या जैसा कदम न उठाएं। PTI के मुताबिक, उन्होंने कहा कि सरकार हर प्रभावित किसान की मदद के लिए प्रतिबद्ध है।

निष्कर्ष

महाराष्ट्र के लिए अगले कुछ हफ्ते बेहद अहम हैं। केंद्रीय टीम की रिपोर्ट और उसके बाद अंतर-मंत्रालयी समूह का फैसला तय करेगा कि राज्य को कितनी मदद मिलेगी और कितनी जल्दी। लेकिन मराठवाड़ा और विदर्भ के गांवों में संकट इंतजार नहीं करता। पीने का पानी, पशुओं का चारा और मजदूरों के लिए काम, ये तीनों मोर्चे समय पर नहीं संभले तो सूखा सिर्फ खेती का नहीं, पलायन और कर्ज का संकट भी बन सकता है।

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