# Tags
#Breaking News #GenZ's की बात #महाराष्‍ट्र #राज्य

MPSC Paper Leak: 11 दिन धरने पर डटे छात्र, आधी रात झुकी सरकार

MPSC पेपर लीक आंदोलन के केंद्र पुणे शहर का रात का दृश्य

पुणे के एसएम जोशी पुल पर 11 दिन से डेरा डाले बैठे महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) के अभ्यर्थियों ने सोमवार तड़के करीब सवा एक बजे अपना आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया। रविवार देर रात राज्य सरकार ने पेपर लीक और आयोग के कामकाज में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की। इसके कुछ ही देर बाद आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने की घोषणा कर दी।

अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग भीमनवार को पद से हटाने की थी। सरकार ने इस्तीफा तो नहीं लिया, लेकिन जांच के दौरान उन्हें कुर्सी से दूर रखने पर सहमति दे दी। यही वह मोड़ था, जिसके बाद धरनास्थल पर तालियां गूंज उठीं।

आधी रात तक चली बातचीत, फिर बनी सहमति

सरकार की ओर से लोक निर्माण मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने धरनास्थल पहुंचकर छात्रों से बातचीत की। उनके साथ विधायक रोहित पवार और विश्वजीत कदम भी मौजूद थे। मंत्री ने बताया कि छात्रों की ज्यादातर मांगें मान ली गई हैं, जिनमें तुकाराम मुंढे जैसे अधिकारियों को लेकर जांच समिति बनाने की मांग भी शामिल है। हालांकि छात्र इस पर अड़े रहे कि जब तक अध्यक्ष पद पर हैं, निष्पक्ष जांच संभव नहीं। लंबी खींचतान के बाद सरकार अध्यक्ष को जांच से दूर रखने पर राजी हुई।

रात 1 बजकर 24 मिनट पर भीमनवार ने X पर लिखा, “राज्य सरकार ने MPSC पेपर लीक मामले में न्यायिक जांच की घोषणा की है। मैंने जीवनभर नैतिकता को प्राथमिकता दी है। इसलिए मैंने तय किया है कि जांच पूरी होने तक पद पर बने रहने के बजाय छुट्टी पर रहूंगा। MPSC की स्वायत्तता, विश्वसनीयता और छात्रों का हित हमेशा मेरी प्राथमिकता रहे हैं और आगे भी रहेंगे।”

कौन करेगा जांच, कितने दिन में आएगी रिपोर्ट

समिति की अध्यक्षता बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दिलीप भोसले करेंगे। सदस्यों में पूर्व न्यायाधीश पी.डी. नाइक, सेवानिवृत्त सचिव गणेश पाटिल और आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी गौतम हैं। एफडीए आयुक्त और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे समिति के सचिव होंगे। समिति को पेपर लीक के आरोपों के साथ आयोग की ढांचागत खामियों की पड़ताल करनी है और दो महीने में सुधारों की विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी है।

  • अध्यक्ष: जस्टिस (सेवानिवृत्त) दिलीप भोसले
  • सचिव: तुकाराम मुंढे, आईएएस
  • सदस्य: पूर्व न्यायाधीश पी.डी. नाइक, सेवानिवृत्त सचिव गणेश पाटिल, आईपीएस लक्ष्मी गौतम
  • समयसीमा: करीब दो महीने

यह भी पढ़ें: NEET Re-Exam Scam: बायोमीट्रिक ठेके की आड़ में फर्जी अभ्यर्थी बैठाने का आरोपी गिरफ्तार

“छात्रों ने एक कदम पीछे लिया, सरकार दस कदम”

आंदोलन में शुरू से छात्रों के साथ रहे एनसीपी (शरद पवार) विधायक रोहित पवार ने इसे छात्रों की एकजुटता की जीत बताया। उन्होंने कहा, “देर से ही सही, सरकार ने छात्रों की मांगें मान लीं। हमारी पहली मांग इस्तीफे की थी, लेकिन छात्रों की परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए हमने आंदोलन स्थगित करने का फैसला किया। बच्चों ने एक कदम पीछे लिया, लेकिन सरकार दस कदम पीछे हटी।”

पवार ने साथ ही चेतावनी भी दी कि आंदोलन खत्म नहीं, सिर्फ स्थगित हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार तय बातों से पीछे हटी तो इससे बड़ा आंदोलन होगा। उनके मुताबिक भीमनवार को हटाने की प्रक्रिया जारी रहेगी और सरकार की सहमति लिखित में दी गई है।

पुणे शहर का स्काईलाइन, जहां हजारों युवा MPSC परीक्षा की तैयारी करते हैं
पुणे शहर, जो महाराष्ट्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बड़ा केंद्र है (फाइल फोटो)। फोटो: Randy Breese/Wikimedia Commons, CC BY 2.0

लाखों अभ्यर्थियों के लिए क्यों अहम है यह फैसला

MPSC राज्य की प्रशासनिक, पुलिस और कई तकनीकी सेवाओं में भर्ती करता है। हर साल लाखों युवा इसकी तैयारी करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या पुणे जैसे शहरों में किराये के कमरों में रहकर पढ़ाई करने वालों की है। पेपर लीक के आरोपों ने इन अभ्यर्थियों की बरसों की मेहनत पर सवाल खड़ा कर दिया था। छात्रों ने आयोग में सुधार और भर्तियां बढ़ाने की मांग भी उठाई थी।

धरना खत्म होने के बाद अभ्यर्थियों ने वहां तैनात पुलिसकर्मियों का तालियां बजाकर आभार जताया। अब सबकी नजर मुंढे की अगुवाई वाली प्रक्रिया पर है। समिति की रिपोर्ट से तय होगा कि आयोग की परीक्षा व्यवस्था में कितना बड़ा बदलाव आता है और छात्रों का भरोसा कितना लौटता है।

MPSC Paper Leak: 11 दिन धरने पर डटे छात्र, आधी रात झुकी सरकार

NPCIL Internship: CA-CMA इंटर पास? 20,000 रुपये

Leave a comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *