Blackbuck Rescue: खेतों पर नीचे उड़ता हेलीकॉप्टर, 2 दिन में 176 काले हिरण पकड़े; शाजापुर में क्यों अपनानी पड़ी अफ्रीकी ‘बोमा’ तकनीक

मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में इन दिनों खेतों के ऊपर एक हेलीकॉप्टर बेहद नीचे उड़ता दिख रहा है। वह न फसल पर दवा छिड़क रहा है और न किसी को ढूंढ रहा है। उसका काम है काले हिरणों (कृष्णमृग) के झुंड को धीरे-धीरे हांककर एक खास बाड़े, यानी “बोमा”, तक पहुंचाना। दक्षिण अफ्रीका की इस तकनीक से शुजालपुर क्षेत्र में दो दिन में 176 कृष्णमृग सुरक्षित पकड़कर कूनो नेशनल पार्क भेजे गए हैं।
जरूरत क्यों पड़ी
शाजापुर और शुजालपुर क्षेत्र में कृष्णमृग और नीलगाय लंबे समय से किसानों के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। बड़े-बड़े झुंड खड़ी फसलें चर जाते हैं और किसानों की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं। कृष्णमृग वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित है, इसलिए उसे नुकसान पहुंचाए बिना समस्या सुलझाने के लिए वन विभाग ने उन्हें दूसरी जगह बसाने (ट्रांसलोकेशन) का अभियान शुरू किया है।
क्या है बोमा तकनीक
बोमा तकनीक में जानवरों को न जाल में फंसाया जाता है और न बेहोशी की दवा दी जाती है। खेतों में कपड़े और जाल की दीवारों से करीब एक किलोमीटर लंबा, अंग्रेजी के V अक्षर जैसा कीप के आकार का रास्ता बनाया जाता है, जो आगे जाकर संकरा होता जाता है और सीधे ट्रकों तक पहुंचता है।
हेलीकॉप्टर जमीन से महज कुछ फीट की ऊंचाई पर उड़ते हुए झुंड को इसी रास्ते की ओर मोड़ता है। जमीन पर मौजूद टीम उसके साथ तालमेल बनाए रखती है। हिरण जैसे ही ट्रक के भीतर पहुंचते हैं, पीछे के पर्दे गिरा दिए जाते हैं ताकि वे लौट न सकें।

दो दिन, 176 हिरण
अभियान 10 अक्टूबर को हन्नूखेड़ी और पोलायकलां (बड़ी पोलाय) के खेतों से शुरू हुआ। पहले दिन 97 और दूसरे दिन 79 कृष्णमृगों को खास तौर पर तैयार वन्यजीव ट्रकों में श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क रवाना किया गया। यह ऑपरेशन मध्य प्रदेश वन विभाग दक्षिण अफ्रीका की “कंजर्वेशन सॉल्यूशंस” टीम के साथ मिलकर चला रहा है।
अभियान की नोडल अधिकारी और मुख्य वन संरक्षक डॉ. किरण बिसेन ने बताया कि पहले दिन तापमान बढ़ने पर बाकी काम रोक दिया गया, क्योंकि जानवरों की सुरक्षा और सेहत को सबसे ऊपर रखा गया है। गर्मी में ज्यादा दौड़ाने से हिरणों पर तनाव का खतरा रहता है, इसलिए हांका सुबह के ठंडे घंटों में ही किया जा रहा है।
लक्ष्य 2,000 कृष्णमृग, 31 अक्टूबर तक चलेगा अभियान
अधिकारियों के मुताबिक अभियान 31 अक्टूबर तक जिले के चिह्नित इलाकों में चलेगा। कुल करीब 2,000 कृष्णमृगों को स्थानांतरित करने का लक्ष्य है और नीलगायों को भी हटाने की योजना है। जैसे-जैसे काम आगे बढ़ेगा, बोमा का ढांचा दूसरी जगहों पर ले जाया जाएगा।
जिला प्रशासन और वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि अभियान के दौरान वे अपने खेतों से दूर रहें, पालतू कुत्तों को बांधकर रखें और मौके पर बेवजह भीड़ न लगाएं। भीड़ और शोर से झुंड बिखर सकता है और पूरी मेहनत बेकार जा सकती है।
फीचर्ड फोटो: X/@PROJSShajapur (जनसंपर्क विभाग, शाजापुर)

























































































