Blue Drum Case Verdict: नीले ड्रम वाले सौरभ हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, 19 महीने बाद मेरठ की अदालत का फैसला

मेरठ: देशभर में सुर्खियां बटोरने वाले मेरठ के नीले ड्रम हत्याकांड में अदालत ने बुधवार को सजा सुना दी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड दिया है। अदालत ने 30 सितंबर को दोनों को हत्या और सबूत मिटाने का दोषी ठहराया था, जिसके बाद सजा के सवाल पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं।
यह फैसला वारदात के लगभग 19 महीने बाद आया है। मुकदमा 126 तारीखों तक चला। सुरक्षा कारणों से मुस्कान और साहिल जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल हुए।
सजा पर बहस में क्या हुआ
सजा पर बहस के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपराध की क्रूरता का हवाला देते हुए दोनों के लिए फांसी की मांग की। बचाव पक्ष ने दोषियों के बच्चों का हवाला देकर मौत की सजा न देने की अपील की, लेकिन अदालत ने यह दलील स्वीकार नहीं की। सुनवाई में जज ने साहिल से पूछा कि क्या उसने पहले कभी कोई अपराध किया है। साहिल ने इससे इनकार किया और सजा के मुद्दे पर कुछ भी कहने से मना कर दिया।
दोषसिद्धि के दिन अदालत ने इस वारदात को “अत्यधिक क्रूरता का कृत्य” बताया था और कहा था कि ऐसे अपराधों का समाज पर गहरा नकारात्मक असर पड़ता है। सरकारी वकील कृष्ण कुमार चौबे ने तब बताया था कि अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे जघन्य अपराध करने वालों को उचित सजा मिलनी चाहिए, ताकि समाज में संदेश जाए कि कानून का राज कायम है।

क्या था नीला ड्रम हत्याकांड
अभियोजन के अनुसार 3 मार्च 2025 को मुस्कान ने सौरभ को नशीला पदार्थ देकर बेहोश किया और फिर साहिल के साथ मिलकर चाकू से उनकी हत्या कर दी। इसके बाद शव के टुकड़े कर उन्हें एक नीले प्लास्टिक ड्रम में भरा गया और ऊपर से सीमेंट डालकर ड्रम सील कर दिया गया।
जांचकर्ताओं के मुताबिक वारदात के बाद दोनों हिमाचल प्रदेश घूमने चले गए और 17 मार्च 2025 को लौटे। पुलिस ने 18 और 19 मार्च 2025 को दोनों को गिरफ्तार किया और ठोस सबूतों के साथ आरोपपत्र दाखिल किया।
परिवार ने कहा, अब मिलेगा न्याय
सौरभ की मां रेणु और भाई राहुल उर्फ बबलू शुरू से दोनों दोषियों के लिए फांसी की मांग कर रहे थे। फैसले से पहले परिवार ने कहा था कि देश में ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, इसलिए कड़ी सजा से समाज में सख्त संदेश जाएगा। परिवार का कहना था कि उनका बेटा अब कभी लौटकर नहीं आएगा, लेकिन हत्यारों को फांसी मिलने पर ही उसकी आत्मा को शांति मिलेगी।
निचली अदालत की ओर से दी गई मौत की सजा पर अमल से पहले हाईकोर्ट की पुष्टि जरूरी होती है। दोषियों के पास इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करने का विकल्प भी है।


















































































































