NEET Paper Leak: CBI ने 14वें आरोपी के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की; NTA या किसी सरकारी अधिकारी का नाम नहीं

नई दिल्ली: सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने बुधवार को NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में दिल्ली की अदालत में पूरक चार्जशीट दाखिल की। इसमें 14वें आरोपी शेषराव बजरंग सूर्यवंशी उर्फ राज सूर्यवंशी का नाम है। एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने सह-आरोपी शुभम खैरनार के साथ मिलकर उम्मीदवारों को कथित लीक प्रश्न उपलब्ध कराए और उनके परिवारों से पैसे वसूले।
विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने चार्जशीट की प्रति आरोपी के वकील को देने का निर्देश दिया और मामले की आगे की सुनवाई 15 अक्टूबर को तय की। पीटीआई के अनुसार आरोपी महाराष्ट्र के नांदेड़ का रहने वाला है और उसे 2 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया था।

आरोप क्या है
पूरक चार्जशीट के मुताबिक सूर्यवंशी ने खैरनार के साथ मिलकर कई उम्मीदवारों को मेडिकल प्रवेश परीक्षा का कथित लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया। उम्मीदवारों को नांदेड़ में एक जगह बुलाया गया, जहां प्रश्न दिए गए। भुगतान सुनिश्चित करने के लिए उनके मूल दस्तावेज—शैक्षणिक प्रमाणपत्र और पहचान पत्र—जमानत के रूप में रख लिए गए।
यह CBI की इस मामले में पहली पूरक चार्जशीट है। इससे पहले 28 जुलाई को दाखिल मुख्य चार्जशीट में 13 आरोपी नामजद थे। उनमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा नियुक्त तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट, बिचौलिए और कोचिंग सेंटर से जुड़े लोग शामिल थे। 12 अगस्त को अदालत ने उस चार्जशीट पर संज्ञान लिया था।

NTA या सरकारी अधिकारी का नाम नहीं
पूरक चार्जशीट में किसी NTA अधिकारी या अन्य सरकारी अधिकारी का नाम नहीं है। जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि लीक में सरकारी अमले की भूमिका पता लगाने के लिए जांच की गई, लेकिन ऐसा कोई सबूत नहीं मिला। कुछ अधिकारियों ने यह भी कहा कि लीक से जुड़ी जांच इस पूरक चार्जशीट के साथ लगभग पूरी मानी जा रही है।
मुख्य चार्जशीट के अनुसार CBI ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग और सबूत मिटाने जैसे आरोपों के साथ भ्रष्टाचार निरोधक कानून और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 के प्रावधान भी लगाए थे। एजेंसी का दावा है कि मोबाइल फोरेंसिक इमेजिंग से डिलीट व्हाट्सऐप चैट और लीक प्रश्नों वाली पीडीएफ फाइलें बरामद हुईं।
परीक्षा रद्द होने से लेकर सीबीआई कार्रवाई तक
NTA ने 3 मई 2026 को हुई NEET-UG परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बीच 12 मई को रद्द कर दिया था। दोबारा परीक्षा 21 जून को हुई। विवाद राजनीतिक मुद्दा बना; कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में युवा प्रदर्शन हुए और उस समय के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया।
FIR दर्ज होने के बाद CBI ने महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली समेत कई राज्यों में 92 जगहों पर छापे मारे। 13 मई से गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू हुआ। जांच में लीक के स्रोत से लेकर लाभार्थी उम्मीदवारों तक की कड़ी जोड़ने का दावा एजेंसी ने पहले की चार्जशीट में किया था।

छात्रों और परीक्षा देने वाले युवाओं के लिए यह मामला इसलिए अहम है कि इसमें प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता और जांच एजेंसी के निष्कर्ष दोनों जुड़े हैं। अदालत अब पूरक चार्जशीट पर आगे की कार्यवाही तय करेगी।
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