अक्टूबर 16, 2026
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Prashant Bhushan Regime Change: ‘हम सब सत्ता परिवर्तन चाहते हैं’ बयान पर बवाल, भाजपा बोली—यह तख्तापलट की मंशा

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के एक वाक्य ने राजधानी की सियासत गरमा दी है। गुरुवार (15 अक्टूबर 2026) को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “हम सब रिजीम चेंज चाहते हैं। क्या इसमें कुछ गलत है?” भाजपा ने इसे विपक्ष की “तख्तापलट” की मंशा का सबूत बताते हुए तीखा पलटवार किया है। शुक्रवार सुबह तक X पर भारत की ट्रेंडिंग सूची में “Regime” और “PRASHANT BHUSHAN IS A TRAITOR” जैसे ट्रेंड बने रहे।

यह प्रेस कॉन्फ्रेंस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में चल रहे आंदोलन के सिलसिले में बुलाई गई थी। द हिंदू के मुताबिक, मंच पर भूषण के साथ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके, AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, अभिनेता-कार्यकर्ता प्रकाश राज और SFI की आइशी घोष मौजूद थे।

भूषण ने आखिर कहा क्या?

समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, भूषण ने कहा, “यह सरकार बार-बार कहती है कि यह विपक्ष का रिजीम चेंज ऑपरेशन है। हम तो सिर्फ देश में चुनावी लोकतंत्र बचाने की अपील कर रहे हैं। अगर ऐसी बर्बरता जारी रही, तो सत्ता परिवर्तन निश्चित रूप से होगा। हम सब रिजीम चेंज चाहते हैं। क्या इसमें कुछ गलत है? रिजीम चेंज हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है, और सरकार के प्रति असंतोष पैदा करना कोई अपराध नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा कि जो सरकार देश में चुनावी लोकतंत्र को कुचलने पर आमादा है और नागरिकों के मौलिक अधिकारों से खिलवाड़ कर रही है, वह चल नहीं सकती। द वायर की ओर से जारी वीडियो क्लिप में भी भूषण यही दोहराते दिखते हैं कि सत्ता परिवर्तन चाहना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण दिल्ली के एक कार्यक्रम में, फाइल फोटो
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण। फाइल फोटो (2017): Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0) — Sidheeq

भाजपा का पलटवार: “सरकार बदलने का रास्ता चुनाव है”

प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ ही घंटों बाद भाजपा सांसद संबित पात्रा ने मोर्चा संभाला। भाजपा के आधिकारिक X हैंडल पर जारी उनके बयान में कहा गया, “प्रशांत भूषण ने कहा कि यह लड़ाई ‘रिजीम चेंज’ की है और हम रिजीम चेंज करके ही रहेंगे।” पात्रा ने आरोप लगाया कि आंदोलन से जुड़े लोगों की “मंशा केवल एक ही है— देश का तख्तापलट करना” और “बिना चुनाव लड़े” अपनी सरकार बनाना।

PTI के वीडियो में पात्रा ने कहा कि संविधान ने सरकार बदलने की साफ प्रक्रिया तय की है, हर पांच साल में चुनाव होते हैं और 2014, 2019 व 2024 में भी चुनाव के जरिए ही जनादेश तय हुआ। उन्होंने यह भी कहा, “यह देश किसी की मिल्कियत नहीं है, न ही किसी एक परिवार की जागीर है। यह देश 140 करोड़ देशवासियों का है।” पात्रा ने आंदोलन से जुड़े लोगों पर “विदेशी हाथों में बिक जाने” का आरोप भी लगाया।

भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने गुरुवार रात कहा कि प्रशांत भूषण, दीपके और नेहा बोरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके “रिजीम चेंज” और “बांग्लादेश के पैटर्न पर देश में तख्तापलट” की बात की है। उनके मुताबिक, “भारत की जनता देश में अराजकता और अस्थिरता फैलाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगी।”

शुक्रवार सुबह चेन्नई में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केशवन ने ANI से कहा कि भूषण का बयान साबित करता है कि राहुल गांधी और उनके “इकोसिस्टम” के लिए SIR का मुद्दा “सिर्फ एक बहाना” था। केशवन ने राहुल गांधी को नेता प्रतिपक्ष पद के लिए अयोग्य बताया और कहा कि “यह इंदिरा गांधी के आपातकाल का दौर नहीं, प्रधानमंत्री मोदी का नया भारत है।”

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बांग्लादेश वाली टिप्पणी ने बढ़ाई आग

भाजपा के हमले में भूषण के साथ नेहा बोरा का नाम भी लगातार आ रहा है। पात्रा के मुताबिक, बोरा ने अपने एक वीडियो संदेश में बांग्लादेश के युवा आंदोलन की तारीफ करते हुए कहा था, “थैंक यू, बांग्लादेश। बांग्लादेश ने हमें रास्ता दिखाया और प्रेरित किया।” भाजपा का कहना है कि भूषण के बयान और बोरा की इस टिप्पणी को साथ रखकर देखें, तो आंदोलन का असली मकसद साफ हो जाता है।

दूसरी ओर, कांग्रेस के एक स्थानीय नेता ने खुलकर भूषण का समर्थन किया है। तेलंगाना के हनमकोंडा से कांग्रेस जिला अध्यक्ष एंगला वेंकटराम रेड्डी ने ANI से कहा कि भूषण ने संवैधानिक अधिकार के तौर पर सत्ता परिवर्तन की बात कही है और भाजपा इसे गलत ढंग से राष्ट्र-विरोधी बता रही है। रेड्डी ने यहां तक दावा कर दिया कि नवंबर में सरकार में “बड़ा बदलाव” होगा।

नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का प्रवेश द्वार
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली। फाइल फोटो: Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0) — Sidheeq

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भूषण का रुख और आज का तिरंगा जुटान

शुक्रवार सुबह 10 बजे तक भूषण के X हैंडल पर इस बयान को लेकर अलग से कोई सफाई नहीं आई थी। इसके बजाय उन्होंने सरकार पर निशाना साधना जारी रखा। गुरुवार देर रात उन्होंने लिखा कि युवाओं ने जंतर मंतर पर “वोट चोरी” के खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान किया तो मध्य दिल्ली बंद कर दी गई और अब तिरंगा फहराने के आह्वान पर कनॉट प्लेस का सेंट्रल पार्क बंद कर दिया गया। उन्होंने सवाल किया, “आगे वे क्या बंद करेंगे?”

शुक्रवार सुबह भूषण ने इकनॉमिक टाइम्स की उस खबर को साझा किया, जिसके मुताबिक दिल्ली की एक रामलीला में इस बार रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के साथ 30 फुट ऊंचे कॉकरोच का पुतला भी जलाया जाएगा। इस पर उन्होंने लिखा, “सरकार और दक्षिणपंथी समूह हमारे युवाओं से इतने डरे हुए हैं!” गौरतलब है कि आंदोलन की अगुवाई कर रहे युवा संगठन का नाम ही कॉकरोच जनता पार्टी है।

बयान पर छिड़ा यह घमासान ऐसे समय में आया है, जब CJP और उससे जुड़े संगठनों ने आज शाम कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में “लहरा दो तिरंगा” जुटान का आह्वान कर रखा है। NDMC ने पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को आम लोगों के लिए बंद रखने की सूचना जारी की है और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने आसपास की सड़कों पर डायवर्जन की चेतावनी दी है। ऐसे में भूषण के बयान पर शुरू हुई जुबानी जंग आज सड़क पर होने वाले घटनाक्रम का माहौल भी तय कर सकती है।

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