CEC Protest: सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, कानून के बिना हिरासत नहीं

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राजधानी में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच रविवार को सुप्रीम कोर्ट ने अहम दखल दिया। CEC Protest से जुड़ी याचिकाओं पर छुट्टी के दिन हुई विशेष सुनवाई में शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि कानून द्वारा तय प्रक्रिया के बिना किसी भी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया जाएगा, खासकर शांतिपूर्ण और निहत्थे लोगों की सभा को। अदालत ने मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रखने, शहर में आवाजाही की छूट देने और इंटरनेट बहाल रखने के भी निर्देश दिए।
यह सुनवाई ऐसे समय हुई जब शनिवार को दिल्ली लगभग किले में तब्दील हो गई थी। बिजनेस स्टैंडर्ड ने समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से बताया कि शनिवार को 7,000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिनमें विपक्षी नेता और कई पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल थे।
CEC Protest पर सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देश
लीगल न्यूज पोर्टल लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कई अंतरिम निर्देश जारी किए। इनमें सबसे अहम यह था कि जिस इलाके में BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है, उसके बाहर शांतिपूर्ण सभा करने वालों को मनमाने ढंग से हिरासत में नहीं लिया जाएगा।
अदालत के प्रमुख निर्देश इस तरह हैं:
- मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलेंगी। पाबंदी तभी लगेगी जब संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने का खतरा हो।
- शहर में लोगों की आवाजाही ट्रैफिक नियमों के अधीन खुली रहेगी और बैरिकेडिंग की तुरंत समीक्षा की जाएगी।
- इंटरनेट सेवाएं बाधित नहीं होंगी। हालांकि जस्टिस बागची ने मौखिक रूप से कहा कि अदालत आईटी एक्ट के तहत अधिकारियों की शक्तियां नहीं छीन रही है।
- सुप्रीम कोर्ट के आसपास धारा 163 लागू होने का बोर्ड, अगर अब तक नहीं हटा है, तो हटाया जाए, ताकि अदालत तक पहुंचने को लेकर कोई आशंका न रहे।
- किसी वकील को उसके पेशेवर कर्तव्य निभाने से नहीं रोका जाएगा।
अदालत ने अवमानना याचिका पर कथित अवमाननाकर्ताओं को नोटिस जारी कर हलफनामा और अनुपालन रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र को मंगलवार तक जवाब दाखिल करना है।
सरकार और याचिकाकर्ताओं की दलीलें
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि शनिवार रात 10 बजे से मेट्रो पूरी तरह चल रही है, सभी स्टेशन खुले हैं, ट्रेनें सामान्य हैं और इंटरनेट बहाल कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली मेट्रो के 303 स्टेशनों में से 47 स्टेशन 10 अक्टूबर को बंद या प्रतिबंधित थे, लेकिन कुल मेट्रो संचालन में कोई कटौती नहीं हुई। उनका यह भी कहना था कि जिन लोगों को हिरासत में लिया गया था, वे रिहा हो चुके हैं, इसलिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का औचित्य नहीं बचता।
दूसरी ओर, राजद सांसद मनोज झा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि पुलिस ट्रेनों से और जंतर-मंतर के निषेधाज्ञा क्षेत्र से बाहर भी लोगों को उठा रही थी। तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें हैं, लेकिन सरकार कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं दे रही। वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने अदालत में कहा कि प्रदर्शन के दौरान उन्हें खुद पकड़कर बस में डाल दिया गया।
गुरुस्वामी की याचिका में अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, पिनाराई विजयन और माणिक सरकार जैसे पूर्व मुख्यमंत्रियों की हिरासत को चुनौती दी गई है। वहीं, अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की अवमानना याचिका में आरोप है कि 9 अक्टूबर के अदालती आदेश के बावजूद मेट्रो स्टेशन बंद रखे गए।
क्या है पूरा विवाद, और आगे क्या
विवाद की जड़ मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रक्रिया में अब तक कम से कम 13 करोड़ नाम मतदाता सूचियों से हटाए जा चुके हैं। चुनाव आयोग इसे मृत, दोहरे और अपात्र मतदाताओं को हटाने की नियमित कवायद बताता है, जबकि विपक्ष और युवाओं का आंदोलन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
रविवार सुबह CJP के नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत ने रिहा कर दिया। एपी के मुताबिक, संगठन की लीगल हेड रत्ना सिंह ने बताया कि रिहाई इस शर्त पर हुई है कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे। इन नेताओं को शनिवार को मुंबई से दिल्ली पहुंचते ही विमान से हिरासत में लिया गया था। यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी शनिवार को हिरासत में लिया गया था और देर रात छोड़ दिया गया।
बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, शनिवार को राजधानी में 30,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात थे और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 120 से अधिक कंपनियां लगाई गई थीं। रविवार को भी करीब 30 प्रमुख जगहों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहा और पुलिस ने गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, INDIA गठबंधन ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का ऐलान किया है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधिमंडल मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपेगा। इससे पहले शुक्रवार को विपक्ष के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर CEC के इस्तीफे और SIR पर तत्काल रोक की मांग की थी।
साफ है कि मामला अब सड़क से अदालत तक पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट के रविवार के निर्देशों ने प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच एक संतुलन खींचने की कोशिश की है। अब सबकी नजर मंगलवार को सरकार के जवाब और सोमवार के विपक्षी मार्च पर है। ये दोनों तय करेंगे कि यह टकराव किस दिशा में जाता है।
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राजधानी में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच रविवार को सुप्रीम कोर्ट ने अहम दखल दिया। CEC Protest से जुड़ी याचिकाओं पर छुट्टी के दिन हुई विशेष सुनवाई में शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि कानून द्वारा तय प्रक्रिया के बिना किसी भी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया जाएगा, खासकर शांतिपूर्ण और निहत्थे लोगों की सभा को। अदालत ने मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रखने, शहर में आवाजाही की छूट देने और इंटरनेट बहाल रखने के भी निर्देश दिए।
यह सुनवाई ऐसे समय हुई जब शनिवार को दिल्ली लगभग किले में तब्दील हो गई थी। बिजनेस स्टैंडर्ड ने समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से बताया कि शनिवार को 7,000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिनमें विपक्षी नेता और कई पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल थे।
CEC Protest पर सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देश
लीगल न्यूज पोर्टल लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कई अंतरिम निर्देश जारी किए। इनमें सबसे अहम यह था कि जिस इलाके में BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है, उसके बाहर शांतिपूर्ण सभा करने वालों को मनमाने ढंग से हिरासत में नहीं लिया जाएगा।
अदालत के प्रमुख निर्देश इस तरह हैं:
- मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलेंगी। पाबंदी तभी लगेगी जब संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने का खतरा हो।
- शहर में लोगों की आवाजाही ट्रैफिक नियमों के अधीन खुली रहेगी और बैरिकेडिंग की तुरंत समीक्षा की जाएगी।
- इंटरनेट सेवाएं बाधित नहीं होंगी। हालांकि जस्टिस बागची ने मौखिक रूप से कहा कि अदालत आईटी एक्ट के तहत अधिकारियों की शक्तियां नहीं छीन रही है।
- सुप्रीम कोर्ट के आसपास धारा 163 लागू होने का बोर्ड, अगर अब तक नहीं हटा है, तो हटाया जाए, ताकि अदालत तक पहुंचने को लेकर कोई आशंका न रहे।
- किसी वकील को उसके पेशेवर कर्तव्य निभाने से नहीं रोका जाएगा।
अदालत ने अवमानना याचिका पर कथित अवमाननाकर्ताओं को नोटिस जारी कर हलफनामा और अनुपालन रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र को मंगलवार तक जवाब दाखिल करना है।
सरकार और याचिकाकर्ताओं की दलीलें
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि शनिवार रात 10 बजे से मेट्रो पूरी तरह चल रही है, सभी स्टेशन खुले हैं, ट्रेनें सामान्य हैं और इंटरनेट बहाल कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली मेट्रो के 303 स्टेशनों में से 47 स्टेशन 10 अक्टूबर को बंद या प्रतिबंधित थे, लेकिन कुल मेट्रो संचालन में कोई कटौती नहीं हुई। उनका यह भी कहना था कि जिन लोगों को हिरासत में लिया गया था, वे रिहा हो चुके हैं, इसलिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का औचित्य नहीं बचता।
दूसरी ओर, राजद सांसद मनोज झा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि पुलिस ट्रेनों से और जंतर-मंतर के निषेधाज्ञा क्षेत्र से बाहर भी लोगों को उठा रही थी। तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें हैं, लेकिन सरकार कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं दे रही। वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने अदालत में कहा कि प्रदर्शन के दौरान उन्हें खुद पकड़कर बस में डाल दिया गया।
गुरुस्वामी की याचिका में अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, पिनाराई विजयन और माणिक सरकार जैसे पूर्व मुख्यमंत्रियों की हिरासत को चुनौती दी गई है। वहीं, अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की अवमानना याचिका में आरोप है कि 9 अक्टूबर के अदालती आदेश के बावजूद मेट्रो स्टेशन बंद रखे गए।
क्या है पूरा विवाद, और आगे क्या
विवाद की जड़ मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रक्रिया में अब तक कम से कम 13 करोड़ नाम मतदाता सूचियों से हटाए जा चुके हैं। चुनाव आयोग इसे मृत, दोहरे और अपात्र मतदाताओं को हटाने की नियमित कवायद बताता है, जबकि विपक्ष और युवाओं का आंदोलन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
रविवार सुबह CJP के नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत ने रिहा कर दिया। एपी के मुताबिक, संगठन की लीगल हेड रत्ना सिंह ने बताया कि रिहाई इस शर्त पर हुई है कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे। इन नेताओं को शनिवार को मुंबई से दिल्ली पहुंचते ही विमान से हिरासत में लिया गया था। यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी शनिवार को हिरासत में लिया गया था और देर रात छोड़ दिया गया।
बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, शनिवार को राजधानी में 30,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात थे और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 120 से अधिक कंपनियां लगाई गई थीं। रविवार को भी करीब 30 प्रमुख जगहों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहा और पुलिस ने गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, INDIA गठबंधन ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का ऐलान किया है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधिमंडल मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपेगा। इससे पहले शुक्रवार को विपक्ष के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर CEC के इस्तीफे और SIR पर तत्काल रोक की मांग की थी।
साफ है कि मामला अब सड़क से अदालत तक पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट के रविवार के निर्देशों ने प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच एक संतुलन खींचने की कोशिश की है। अब सबकी नजर मंगलवार को सरकार के जवाब और सोमवार के विपक्षी मार्च पर है। ये दोनों तय करेंगे कि यह टकराव किस दिशा में जाता है।
























































