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Ganga Erosion: भागलपुर में गंगा का कटाव, दो मंजिला मकान नदी में समाया

भागलपुर में गंगा नदी का किनारा — सांकेतिक तस्वीर

भागलपुर: बाढ़ का पानी उतरते ही गंगा का कटाव बिहार के भागलपुर जिले के नौगछिया अनुमंडल में फिर सक्रिय हो गया है। खारिक प्रखंड के राघोपुर दियारा में महादेवपुर घाट के पास शुक्रवार रात से कटाव तेज हुआ, जिससे दर्जनों मकान क्षतिग्रस्त हुए। रविवार को नौगछिया के छोटी अलालपुर गांव में एक दो मंजिला पक्का मकान नदी में समा गया; इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैली। जिला प्रशासन का कहना है कि बाढ़ नियंत्रण की चौबीसों घंटे निगरानी जारी है और रविवार को ताजा कटाव की कोई नई रिपोर्ट नहीं मिली, जबकि बाढ़ का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है।

टाइम्स ऑफ इंडिया (पटना) की रिपोर्ट के अनुसार, घटते बाढ़ जल ने मिट्टी को कमजोर कर दिया, जिसके बाद राघोपुर दियारा में कटाव शुरू हुआ। करीब 40 से 50 मकान क्षतिग्रस्त बताए गए हैं; इनमें चार पक्के मकान पूरी तरह ध्वस्त हुए और करीब 10 मकानों में दरारें आ गईं। कटाव का दायरा लगभग 150 मीटर बताया गया है, जिसमें परित्यक्त रेलवे लाइन के पास करीब 50 मीटर का तटबंध भी शामिल है।

राघोपुर–छोटी अलालपुर: कटाव का सिलसिला

इंडिया टुडे (नौगछिया) के मुताबिक, रविवार को छोटी अलालपुर गांव में दो मंजिला पक्का मकान गंगा में समा गया। राघोपुर पंचायत में कटाव जारी है और कई अन्य घर खतरे में बताए गए हैं। एबीपी लाइव (भागलपुर) की रिपोर्ट में भी राघोपुर/छोटी अलालपुर में घरों के नदी में समा जाने का जिक्र है; दो मंजिला मकान इनमें शामिल है।

दैनिक भास्कर (नौगछिया) के अनुसार, शुक्रवार रात करीब 150 मीटर कटाव के बाद शनिवार सुबह रेलवे टैगिंग तटबंध का और करीब 50 मीटर हिस्सा बह गया; अब तक कुल करीब 200 मीटर प्रभावित बताया गया है। सावधानी के तौर पर करीब आधे किलोमीटर दायरे के घरों से लोगों को खाली कराया गया।

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, प्रभावित परिवार रात भर में अपने सामान और पशुओं के साथ सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए। प्रशासन की राहत और निगरानी के साथ स्थानीय स्तर पर भी लोग सतर्क हैं।

तटबंध, सड़क नंबर 14 और प्रशासनिक निगरानी

एबीपी लाइव के अनुसार, करीब 125 वर्ष पुराना रेलवे लाइन वाला तटबंध भी पहले क्षतिग्रस्त हो चुका है; रेत की बोरियों और करोड़ों रुपये खर्च के दावे स्थानीय चर्चा में हैं। अब दबाव सड़क नंबर 14 (लट्टीपुर–विक्रमशिला पहुंच मार्ग) पर बताया जा रहा है; दरारों की शिकायतें आई हैं और जल संसाधन विभाग रेत की बोरियां लगा रहा है।

जिलाधिकारी अलंकृता पांडे ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्थल का निरीक्षण किया। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार उन्होंने चौबीसों घंटे बाढ़ नियंत्रण की व्यवस्था का निर्देश दिया; शिफ्टों में करीब 600 मजदूर लगे बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और रविवार को ताजा कटाव की कोई नई रिपोर्ट नहीं मिली। यह बयान तटबंध/कटाव निगरानी के संदर्भ में है; छोटी अलालपुर में रविवार को मकान के गिरने की अलग घटना समाचार एजेंसियों ने दर्ज की है।

विवरणआंकड़ा / स्थिति
शुक्रवार रात कटाव (TOI)लगभग 150 मीटर; तटबंध ~50 मीटर
कुल कटाव अब तक (दैनिक भास्कर)लगभग 200 मीटर (शुक्रवार + शनिवार)
क्षतिग्रस्त मकान (TOI)~40–50; 4 पक्के पूरी तरह ध्वस्त; ~10 में दरारें
गंगा जलस्तर (भागलपुर)खतरे के निशान से नीचे; पिछले 24 घंटे में ~12 सेमी गिरावट
बाढ़ नियंत्रण मजदूरशिफ्टों में करीब 600
स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया, दैनिक भास्कर (11 अक्टूबर 2026)

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार भागलपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है और पिछले 24 घंटे में करीब 12 सेंटीमीटर गिरा है। अगले 24 घंटे में स्थिति और सुधरने की उम्मीद जताई गई है।

मंत्री दौरे और राजनीतिक प्रतिक्रिया

दैनिक भास्कर के अनुसार पथ निर्माण मंत्री ई. कुमार शैलेन्द्र और ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल स्थल पर पहुंचे और निर्देश दिए। एबीपी लाइव के मुताबिक ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल ने कहा कि सरकार सड़क को बचाने के लिए काम कर रही है। कांग्रेस नेता अजित शर्मा और वीआईपी की अपर्णा कुमारी ने सरकार की आलोचना की और इस्तीफे की मांग रखी।

  • जिला प्रशासन: चौबीसों घंटे निगरानी, मजदूर पाली में तैनात; डीएम का रविवार को ‘ताजा कटाव नहीं’ वाला बयान।
  • जल संसाधन विभाग: सड़क नंबर 14 के आसपास रेत की बोरियां लगाने का काम।
  • स्थानीय चेतावनी: कटाव प्रभावित क्षेत्र और दरार वाले मकानों से दूरी बनाए रखें; अधिकारी सलाह का पालन करें।

निष्कर्ष

गंगा का कटाव भागलपुर–नौगछिया के दियारा इलाकों के लिए पुरानी चुनौती है, पर बाढ़ उतरने के बाद मिट्टी कमजोर होने से नुकसान अचानक बढ़ सकता है। शुक्रवार–शनिवार का तटबंध कटाव और रविवार को छोटी अलालपुर में दो मंजिला मकान का नदी में समा जाना एक ही समस्या की दो तस्वीरें हैं। जलस्तर गिरने से राहत की उम्मीद है, लेकिन तटबंध, सड़क नंबर 14 और खतरे वाले मकानों पर लगातार निगरानी जरूरी है। प्रशासनिक दावों और विपक्षी आलोचना के बीच असली परीक्षा यही है कि बाढ़ नियंत्रण और पुनर्वास जमीन पर कितनी तेजी से पहुंचाया जाता है।

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