Rahul Gandhi Petition: स्वतंत्र जांच समिति से ECI की फाइल-नोटिंग तक, सुप्रीम कोर्ट से विपक्ष ने क्या-क्या मांगा?

नई दिल्ली: सड़क पर मार्च बैरिकेड्स पर रुक गया, लेकिन विपक्ष की असली लड़ाई अब अदालत की फाइलों में दर्ज हो चुकी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नौ अन्य नेताओं ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग के भीतर उससे जुड़ी निर्णय-प्रक्रिया की जांच एक स्वतंत्र समिति से कराने की मांग की है।
सवाल यह है कि याचिका में ऐसा क्या है जिसे विपक्ष “वोट चोरी” के खिलाफ निर्णायक कदम बता रहा है, और चुनाव आयोग अब तक इन आरोपों पर क्या कहता आया है।
याचिका में चार बड़ी मांगें
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार याचिका शाम 4:37 बजे अधिवक्ता प्रसन्ना एस. के जरिए दाखिल हुई और इसमें भारत निर्वाचन आयोग (ECI) प्रतिवादी है। याचिका की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के भीतर उससे जुड़े फैसलों की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति का गठन।
- SIR से जुड़े रिकॉर्ड और आधिकारिक नोटिंग्स (फाइल टिप्पणियां) आयोग से तलब की जाएं, ताकि पता चले कि कौन-सा फैसला किस स्तर पर लिया गया।
- ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण की व्यवस्था और ECINet पोर्टल जैसी सेवाओं की दोबारा समीक्षा।
- कथित तौर पर बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और अनियमितताओं की पड़ताल।

सड़क पर विपक्ष की मांगें इससे भी आगे हैं। मुख्य न्यायाधीश को सौंपे जाने वाले ज्ञापन में “वोट चोरी” पर रोक, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR पर तत्काल रोक और मतपत्र (पेपर बैलेट) से चुनाव कराने की मांग शामिल थी।
CJI ने मुलाकात क्यों नहीं की
राहुल गांधी और खड़गे ने सोमवार शाम 4 से 5 बजे के बीच मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मिलकर ज्ञापन देने का समय मांगा था। रविवार को CJI ने यह अनुरोध अस्वीकार कर दिया। उनका कहना था कि उठाए गए मुद्दे न्यायिक पक्ष पर पहले से विचाराधीन हैं और प्रशासनिक स्तर पर अदालत चुनाव आयोग के कामकाज में दखल नहीं दे सकती। साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि कोई भी पक्षकार किसी भी दिन शाम 4:30 बजे तक रजिस्ट्री में याचिका दाखिल कर सकता है।
राहुल गांधी ने सुबह एक्स पर लिखा, “हमने CJI को पत्र लिखा था। उन्होंने हमें याचिका दाखिल करने का निर्देश दिया। अब ‘वोट चोरी’ के खिलाफ INDIA गठबंधन के नेता सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे और याचिका दाखिल करेंगे।”
चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग विपक्ष के आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है। फॉर्म-6 में बदलाव के आरोप पर आयोग ने अपने आधिकारिक हैंडल @ECISVEEP से “फैक्ट चेक” जारी कर राहुल गांधी के दावे को “भ्रामक” बताया था। आयोग के मुताबिक बिहार में SIR का 24 जून 2025 का आदेश आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के फैसले में बरकरार रखा। आयोग ने अपने 26 सितंबर 2026 के प्रेस नोट का हवाला देते हुए यह भी कहा कि SIR के दौरान फॉर्म-6 के साथ जोड़ी गई घोषणा को सर्वोच्च अदालत ने सही ठहराया है।
सोमवार को भी आयोग के एक्स हैंडल पर अलग-अलग राज्यों में चल रहे विशेष शिविरों की जानकारी साझा की जाती रही, इस संदेश के साथ कि “कोई भी पात्र मतदाता सूची से छूटे नहीं।”
अब आगे क्या
SIR से जुड़े मिलते-जुलते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई होनी है। मुख्य न्यायाधीश पहले ही संकेत दे चुके हैं कि विपक्षी नेताओं की ओर से दाखिल याचिका पर भी लंबित मामलों के साथ विचार किया जा सकता है। यानी अगले कुछ दिनों में यह साफ होने लगेगा कि अदालत SIR की प्रक्रिया पर कितनी गहराई से जांच करना चाहती है।

























































































