Delhi Police Response: 20 से ज्यादा FIR, मारपीट के 4 आरोपी गिरफ्तार और फर्जी वीडियो पर चेतावनी; प्रदर्शनों पर पुलिस का पक्ष क्या है?

नई दिल्ली: तीन दिन से राजधानी में चल रहे CEC-विरोधी प्रदर्शनों के बीच विपक्ष और छात्र संगठनों के आरोप सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं, लेकिन दिल्ली पुलिस भी अपने आधिकारिक हैंडल के जरिए लगातार अपना पक्ष रख रही है। हिरासत की प्रक्रिया से लेकर मारपीट के वायरल वीडियो और “फर्जी” क्लिप तक, पुलिस ने हर मोर्चे पर बयान जारी किए हैं।
यह रिपोर्ट उन्हीं आधिकारिक बयानों, अदालत में सरकार की दलीलों और अधिकारियों के कथनों के आधार पर तैयार की गई है, ताकि पूरे घटनाक्रम का दूसरा पक्ष भी सामने आए।
CJP नेताओं की गिरफ्तारी पर पुलिस की सफाई
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास की हिरासत पर सबसे ज्यादा सवाल उठे। इस पर दिल्ली पुलिस ने एक्स पर लिखा कि तीनों की BNSS की धारा 126/170 के तहत 10 अक्टूबर को एहतियाती गिरफ्तारी की गई थी।
सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया और उन्हें 11.10.2026 को SEM कोर्ट, दिल्ली कैंट के समक्ष पेश किया गया। शांति और अच्छे आचरण के लिए एक वर्ष की अवधि हेतु ₹50,000 का जमानत बांड भरा गया, जिसके बाद SEM कोर्ट ने उन्हें रिहा कर दिया।
दिल्ली पुलिस, आधिकारिक एक्स हैंडल
पुलिस ने यह भी बताया कि हिरासत के दौरान अभिजीत दिपके को उनकी दादी के निधन की सूचना संवेदनशीलता के साथ दी गई और अंतिम संस्कार में पहुंचने के लिए हरसंभव सहायता की पेशकश की गई।
प्रदर्शनकारी की पिटाई: चारों आरोपी पकड़े गए
10 अक्टूबर को एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें चार लोग एक प्रदर्शनकारी के साथ मारपीट करते दिख रहे थे। दिल्ली पुलिस ने बताया कि कमला मार्केट थाने ने इस पर स्वतः संज्ञान लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू की और चारों की पहचान कर ली गई। रविवार सुबह चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

20 से ज्यादा FIR, 200 से ज्यादा हिरासत में
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक शनिवार की घटनाओं को लेकर 20 से अधिक FIR दर्ज की गई हैं। इनमें पुलिसकर्मियों पर हमले और सरकारी काम में बाधा डालने जैसे आरोप शामिल हैं, और सभी FIR अज्ञात लोगों के खिलाफ हैं। रविवार को जंतर मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे 200 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को कनॉट प्लेस, आरके आश्रम मार्ग, विजय चौक और आकाशवाणी भवन जैसे इलाकों से हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार अकेले आरके आश्रम मार्ग मेट्रो स्टेशन के पास से 40 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया।
हिरासत में मारपीट और फोन छीने जाने के कुछ प्रदर्शनकारियों के आरोपों पर DCP (द्वारका) कुशल पाल सिंह ने कहा कि किसी नाबालिग को हिरासत में नहीं लिया गया और सभी लोगों को रात 10 बजे से पहले छोड़ दिया गया। मारपीट के आरोपों पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की।
“पुराने और AI वीडियो से सावधान”
पुलिस ने कई बार चेताया है कि सोशल मीडिया पर दूसरे राज्यों की, पुरानी या AI से बनी क्लिप्स को मौजूदा प्रदर्शन से जोड़कर फैलाया जा रहा है। सोमवार को एक हैंडल का नाम लेकर पुलिस ने लिखा कि उसका “भ्रामक मीडिया और पुरानी फुटेज फैलाने का इतिहास” रहा है और अफवाह फैलाना कानूनन दंडनीय अपराध है, जिस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। एक अन्य पोस्ट में पुलिस ने उस वीडियो को भी झूठा बताया जिसमें एक व्यक्ति खुद को आंदोलन के लिए नौकरी छोड़ने वाला दिल्ली पुलिस का सब-इंस्पेक्टर बता रहा था।
अदालत में सरकार की दलील
रविवार को सुप्रीम कोर्ट की विशेष सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के आदेश की अवहेलना के आरोपों को नकारा। उन्होंने कहा कि 10 अक्टूबर को मेट्रो सेवा सामान्य चली, कानून-व्यवस्था के लिए 303 में से 45 स्टेशन बंद किए गए थे, जो रात 10 बजे तक खोल दिए गए। उन्होंने इंटरनेट बहाल होने की जानकारी भी दी। इस मामले पर अब मंगलवार को फिर सुनवाई होगी।

























































































