अक्टूबर 24, 2026
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Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को, जानें खीर रखने का सही समय

शरद पूर्णिमा कब है, 25 अक्टूबर या 26 अक्टूबर? इस सवाल का जवाब है रविवार, 25 अक्टूबर 2026। द्रिक पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू होगी और 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे खत्म होगी। चूंकि पूर्णिमा की पूरी रात 25 अक्टूबर को ही पड़ रही है, इसलिए शरद पूर्णिमा का व्रत, कोजागरी लक्ष्मी पूजा और चांदनी में खीर रखने की परंपरा 25 अक्टूबर की रात ही निभाई जाएगी।

हावड़ा में एक बंगाली परिवार के घर कोजागरी लक्ष्मी पूजा करते लोग
पश्चिम बंगाल के हावड़ा में एक परिवार के घर कोजागरी लक्ष्मी पूजा (5 अक्टूबर 2017, फाइल फोटो)। फोटो: Biswarup Ganguly / Wikimedia Commons (CC BY 3.0)

दिल्ली में इस दिन चंद्रोदय शाम 5:00 बजे होगा। कोजागर पूजा का निशीथ काल, यानी आधी रात का पूजा मुहूर्त, रात 11:40 बजे से 12:31 बजे (26 अक्टूबर) तक रहेगा। इसकी अवधि 51 मिनट है।

26 अक्टूबर को क्यों नहीं

उलझन इसलिए है क्योंकि सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि 26 अक्टूबर को रहेगी, जबकि 25 अक्टूबर को यह दोपहर से पहले शुरू हो रही है। लेकिन शरद पूर्णिमा रात का पर्व है। द्रिक पंचांग के मुताबिक कोजागर पूजा के लिए वही दिन श्रेष्ठ माना जाता है, जिस दिन पूर्णिमा निशीथव्यापिनी हो, यानी आधी रात के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद हो।

26 अक्टूबर को पूर्णिमा सुबह 9:41 बजे ही समाप्त हो जाएगी। उस दिन शाम और रात कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा में पड़ेगी, यानी न चंद्रोदय के समय पूर्णिमा रहेगी, न आधी रात को। इसी वजह से पंचांग 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा बता रहे हैं।

आपके शहर में चंद्रोदय और पूजा का समय

पूर्णिमा तिथि के शुरू और खत्म होने का समय पूरे देश में एक ही (भारतीय मानक समय) है, लेकिन चंद्रोदय और निशीथ काल हर शहर में अलग होता है। द्रिक पंचांग के शहरवार आंकड़े नीचे दिए गए हैं।

शहरचंद्रोदय (25 अक्टूबर)कोजागर पूजा निशीथ काल
नई दिल्लीशाम 5:00 बजेरात 11:40 से 12:31 बजे तक
लखनऊशाम 4:47 बजेरात 11:25 से 12:16 बजे तक
पटनाशाम 4:31 बजेरात 11:08 से 11:59 बजे तक
कोलकाताशाम 4:21 बजेरात 10:56 से 11:46 बजे तक
जयपुरशाम 5:08 बजेरात 11:46 से 12:36 बजे तक
भोपालशाम 5:05 बजेरात 11:39 से 12:30 बजे तक
अहमदाबादशाम 5:25 बजेरात 11:59 से 12:49 बजे तक
मुंबईशाम 5:28 बजेरात 11:58 से 12:47 बजे तक
बेंगलुरुशाम 5:15 बजेरात 11:39 से 12:28 बजे तक
चेन्नईशाम 5:04 बजेरात 11:28 से 12:17 बजे तक
स्रोत: द्रिक पंचांग (कोजागर पूजा, 25 अक्टूबर 2026, शहरवार स्थानीय समय)

जिन शहरों में निशीथ काल आधी रात के बाद तक चलता है, वहां समय का बाकी हिस्सा 26 अक्टूबर की तारीख में गिना जाएगा।

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गुजरात में पावागढ़ पहाड़ी पर महाकाली मंदिर के ऊपर शरद पूनम का पूरा चांद
गुजरात के पावागढ़ में महाकाली मंदिर के ऊपर शरद पूनम का चांद (23 अक्टूबर 2018, फाइल फोटो)। फोटो: Kay_antarixa / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

खीर कब रखें और कब खाएं

शरद पूर्णिमा की सबसे चर्चित परंपरा चांदनी में खीर रखने की है। द्रिक पंचांग के अनुसार इस दिन गाय के दूध, चावल और चीनी से खीर बनाकर पूरी रात चांदनी में रखी जाती है और सुबह इसे प्रसाद के रूप में परिवार में बांटकर खाया जाता है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है।

इस हिसाब से खीर 25 अक्टूबर की शाम चंद्रोदय के बाद खुले आसमान के नीचे रखी जाएगी और 26 अक्टूबर की सुबह खाई जाएगी। ध्यान रहे कि चांदनी से जुड़े फायदे धार्मिक आस्था का विषय हैं, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खीर को रातभर बाहर रखते समय साफ, जालीदार कपड़े से ढक दें, ताकि उसमें धूल या कीड़े न गिरें।

कटोरी में परोसी गई चावल की खीर
चावल की खीर (प्रतीकात्मक फोटो)। फोटो: stu spivack / Wikimedia Commons (CC BY-SA 2.0)

कोजागरी लक्ष्मी पूजा और रास पूर्णिमा

पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में इसी रात कोजागर या कोजागरी लक्ष्मी पूजा होती है। द्रिक पंचांग के मुताबिक इस व्रत में रात को जागरण की परंपरा है। मान्यता है कि आश्विन पूर्णिमा की रात देवी लक्ष्मी पृथ्वी का भ्रमण करती हैं और पूछती हैं, ‘को जागर्ति’ यानी कौन जाग रहा है। जागकर पूजा करने वालों पर उनकी कृपा होती है। इसे कौमुदी व्रत भी कहा जाता है।

ब्रज क्षेत्र में यह रात रास पूर्णिमा के रूप में मनाई जाती है, क्योंकि मान्यता है कि इसी रात भगवान कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास किया था। गुजरात में इसे शरद पूनम कहा जाता है। पंचांग के अनुसार साल भर पूर्णिमा का व्रत रखने का संकल्प लेने वाली नवविवाहित महिलाएं इसकी शुरुआत शरद पूर्णिमा से करती हैं।

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बादल और धुंध बिगाड़ सकते हैं नजारा

इस बार कई इलाकों में मौसम चांद देखने की राह में बाधा बन सकता है। बंगाल की खाड़ी में बन रहे सिस्टम के कारण आंध्र प्रदेश और ओडिशा में भारी बारिश का अलर्ट है, जबकि तमिलनाडु और केरल में भी 26 अक्टूबर तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई थी। उत्तर भारत में दिल्ली-NCR की हवा पहले ही ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच चुकी है। ऐसे में अगर चांद बादलों या धुंध के पीछे छिपा रहे, तब भी पूजा और खीर रखने की परंपरा पंचांग के तय समय के अनुसार ही निभाई जाती है।

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