Neville Roy Singham: फ्रांस आंदोलन, NewsClick और चीन से जुड़ा नेटवर्क


फ्रांस में सितंबर के आखिर से चल रहे छात्र आंदोलन पर अब अमेरिका से एक बड़ा दावा आया है। Fox News Digital ने 9 अक्टूबर को प्रकाशित अपनी जांच में कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय वामपंथी नेटवर्क इस आंदोलन को दुनिया भर में “बढ़ा-चढ़ाकर” पेश कर रहा है, और इस नेटवर्क की एक अहम कड़ी, न्यूयॉर्क स्थित BreakThrough News, शंघाई में रहने वाले अमेरिकी कारोबारी नेविल रॉय सिंघम के पैसे से चलती है। भारत के लिए यह नाम नया नहीं है। यही सिंघम दिल्ली पुलिस की NewsClick जांच के केंद्र में रहे हैं।
लेकिन सोशल मीडिया पर जो दावा घूम रहा है, कि “सिंघम ही फ्रांस और अल्बानिया की हिंसा के पीछे हैं”, वह Fox News की रिपोर्ट में भी नहीं कहा गया। NCI ने मूल रिपोर्ट और बाकी स्रोतों को पढ़कर तथ्यों और आरोपों को अलग-अलग किया है।
Fox News ने असल में क्या कहा
पत्रकार असरा क्यू. नोमानी की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस के छात्र आंदोलन से जुड़े 50 संगठनों में से सिर्फ 15 छात्र या युवा संगठन हैं। बाकी में मजदूर यूनियनें, कम्युनिस्ट और समाजवादी समूह, ला फ्रांस इंसूमिज़ और फ्रेंच कम्युनिस्ट पार्टी जैसे दल शामिल हैं। रिपोर्ट का आरोप है कि यह “इकोसिस्टम” एक घरेलू शिक्षा विवाद को पूंजीवाद, पुलिस और युद्ध के खिलाफ बड़े वैचारिक संघर्ष की तरह पेश कर रहा है।
सिंघम का नाम BreakThrough News के जरिए आता है। Fox के मुताबिक इस आउटलेट ने आंदोलन को “ऐतिहासिक हड़ताल” बताया, पुलिस से टकराव के वीडियो चलाए और ‘YOUTH RISE UP AROUND THE WORLD’ जैसे कोलाज में फ्रांस, भारत, ब्राज़ील और अमेरिका के प्रदर्शनों को एक साथ दिखाया। एक बाद की Fox रिपोर्ट ने 9 देशों के 101 संगठनों की सूची दी, जिनमें Progressive International भी है। IANS के मुताबिक, उसने 16 अक्टूबर की ब्रीफिंग में फ्रांस, स्पेन, भारत और अल्बानिया के प्रदर्शनों को एक साथ रखा।
अहम बात: रिपोर्ट नेटवर्क द्वारा आंदोलन के प्रचार और उसे बढ़ावा देने की बात करती है। उसमें यह सबूत नहीं है कि सिंघम ने फ्रांस के प्रदर्शनों को पैसा दिया, उन्हें चलाया या हिंसा करवाई। IANS ने भी अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा कि दस्तावेज़ में मिले संबंध “कवरेज, प्रचार और एकजुटता” तक सीमित हैं। अल्बानिया के प्रदर्शनों से सिंघम का कोई सीधा संबंध किसी विश्वसनीय स्रोत ने नहीं बताया है।

कौन हैं नेविल रॉय सिंघम
72 वर्षीय सिंघम अमेरिका के कनेक्टिकट में पैदा हुए। उनके पिता आर्चीबाल्ड सिंघम श्रीलंकाई मूल के थे। उन्होंने IT कंसल्टिंग कंपनी Thoughtworks बनाई और 2017 में उसे करीब 78.5 करोड़ डॉलर में बेच दिया। 2001 से 2008 तक वे Huawei के तकनीकी सलाहकार भी रहे। कंपनी बेचने के बाद वे चीन चले गए और फिलहाल शंघाई में रहते हैं। उनकी पत्नी जोडी इवांस अमेरिकी संगठन CodePink की सह-संस्थापक हैं।
NYT की 2023 जांच: पूरी कहानी की जड़
अगस्त 2023 में The New York Times ने ‘A Global Web of Chinese Propaganda Leads to a U.S. Tech Mogul’ शीर्षक से रिपोर्ट छापी। उसके मुताबिक सिंघम चीनी सरकार के प्रचार तंत्र के साथ मिलकर काम करते हैं और अमेरिका, ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका और भारत में ऐसे संगठनों और मीडिया संस्थानों को पैसा देते हैं जो चीन के पक्ष की बातें आगे बढ़ाते हैं। जुलाई 2023 में वे कम्युनिस्ट पार्टी की एक वर्कशॉप में भी शामिल हुए थे। जिन संस्थाओं का नाम आया, उनमें People’s Forum, CodePink, Tricontinental, ब्राज़ील का Brasil de Fato और भारत का NewsClick शामिल थे। NYT ने लिखा कि NewsClick की कवरेज में “चीनी सरकार की बातें” झलकती थीं।
सिंघम ने NYT को दिए जवाब में कहा था कि वे किसी राजनीतिक दल या सरकार के सदस्य नहीं हैं, उनके लिए काम नहीं करते और उनसे निर्देश नहीं लेते।
भारत का एंगल: NewsClick केस अब कहां है
NYT रिपोर्ट के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 17 अगस्त 2023 को UAPA के तहत FIR दर्ज की। 3 अक्टूबर 2023 को NewsClick के संस्थापक-संपादक प्रबीर पुरकायस्थ गिरफ्तार हुए और दर्जनों पत्रकारों के ठिकानों पर छापे पड़े। पुलिस का आरोप है कि ईमेल से पता चलता है कि सिंघम कोविड-19 जैसे मुद्दों पर NewsClick को “चीन की लाइन” अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे थे, और पैसे को कंपनियों के जाल से भारत भेजा गया। मई 2024 की चार्जशीट में पुलिस ने चीनी सरकार को NewsClick का “अंतिम भुगतानकर्ता” बताया।
अदालतों में तस्वीर अलग रही है। 15 मई 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने पुरकायस्थ की गिरफ्तारी और रिमांड को अवैध ठहराया, क्योंकि उन्हें गिरफ्तारी के आधार लिखित में नहीं दिए गए थे। 29 मई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने विदेशी फंडिंग से जुड़ी EOW की FIR और ED का मनी लॉन्ड्रिंग केस रद्द कर दिया और इसे “कानून की प्रक्रिया का गंभीर दुरुपयोग” कहा। ED ने अक्टूबर 2026 में इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। UAPA का मामला अलग से चल रहा है। NewsClick सभी आरोपों से इनकार करता रहा है।
अमेरिका में बढ़ती जांच
अमेरिका में भी दबाव बढ़ा है। 2023 में सीनेटर मार्को रुबियो ने न्याय विभाग से FARA यानी विदेशी एजेंट कानून के तहत जांच की मांग की। अप्रैल 2025 में सीनेटर चक ग्रासली ने पूछा कि क्या People’s Forum और CodePink को विदेशी एजेंट के रूप में पंजीकरण कराना चाहिए। हाउस वेज़ एंड मीन्स कमेटी ने जनवरी 2026 में जांच शुरू की और जुलाई 2026 में BreakThrough News, Tricontinental और People’s Forum को समन भेजे। CBS News ने जुलाई 2026 में बताया कि सिंघम की विदेशी एजेंट और टैक्स कानूनों के तहत जांच हो रही है। अब तक सिंघम पर कोई आरोप तय नहीं हुआ है और न्याय विभाग ने जांच की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

भारत के लिए इसका मतलब
भारत की चिंता दो स्तर पर है। पहली, विदेशी पैसे से चलने वाले मीडिया के जरिए घरेलू बहस को प्रभावित करने का आरोप, जो NewsClick केस का मूल सवाल है। दूसरी, Fox की ताज़ा रिपोर्ट में भारत दो बार आता है: IANS के मुताबिक Progressive International की ब्रीफिंग में और पेरिस के संगठन Indian Alliance Paris के रूप में, जिसने 2023 में People’s Forum के साथ एक कार्यक्रम किया था और फ्रांस और भारत के युवा प्रदर्शनों को एक साथ जोड़कर पोस्ट किया। हालांकि, IANS के मुताबिक Fox रिपोर्ट खुद यह दावा नहीं करती कि यह नेटवर्क भारत के प्रदर्शनों को चला रहा है, और न ही यह सबूत देती है कि उसने उन्हें पैसा दिया।

असल सवाल पारदर्शिता का है। अगर कोई विदेशी अरबपति कई देशों के मीडिया और आंदोलनकारी संगठनों को पैसा देता है, तो पाठक को यह जानने का हक है कि खबर किसके पैसे से बन रही है। साथ ही, किसी आंदोलन के प्रचार को उसे “चलाना” बताना भी तथ्यों से आगे जाना होगा। फ्रांस के छात्र शिक्षकों की कमी और स्कूलों की हालत को लेकर सड़कों पर हैं, और यह मुद्दा उनका अपना है।
आगे की तस्वीर अमेरिकी कांग्रेस की जांच, न्याय विभाग के रुख और भारत के सुप्रीम कोर्ट में ED की अपील से साफ होगी।
स्रोत: Fox News Digital (9 अक्टूबर 2026), IANS, The New York Times (अगस्त 2023), सुप्रीम कोर्ट का फैसला (2024 INSC 414), LiveLaw, CBS News। ये आरोप हैं और किसी अदालत में साबित नहीं हुए हैं।






