Ayodhya Seat: योगी बोले- अखिलेश भी नामांकन करें, आमने-सामने हो मुकाबला; सपा का पलटवार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी वक्त है, लेकिन सियासी मुकाबले का सबसे बड़ा मंच शायद तय होने लगा है: अयोध्या। समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी, तो योगी ने पलटकर कहा कि अखिलेश भी वहीं से नामांकन करें और मुकाबला आमने-सामने हो। जवाब में अखिलेश ने कुछ ही घंटों में कह दिया कि भाजपा को हराने के लिए सपा का एक युवा कार्यकर्ता ही काफी है।
राम मंदिर आंदोलन से लेकर 2024 के लोकसभा नतीजों तक, अयोध्या लंबे समय से यूपी की राजनीति का प्रतीक रही है। ऐसे में दोनों बड़े नेताओं की यह जुबानी जंग साफ बताती है कि 2027 की लड़ाई में आस्था, विकास और प्रतिष्ठा, तीनों दांव पर होंगे।
अखिलेश की चुनौती: ‘अयोध्या का मैदान खुला है’
द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, अखिलेश यादव ने 8 अक्टूबर को अयोध्या में पूर्व विधायक पवन पांडेय की ओर से आयोजित भागवत कथा में हिस्सा लिया। वहां उन्होंने दावा किया कि भाजपा को अयोध्या सीट के लिए नया उम्मीदवार नहीं मिल रहा। अखिलेश ने कहा, “अगर बड़े-बड़े दावे करने वाले मुख्यमंत्री को इतना भरोसा है, तो वे खुद अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाएं… अयोध्या का मैदान उनके लिए खुला है।”
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, अखिलेश ने यह भी कहा कि सपा के उम्मीदवार घोषित होने के बाद से भाजपा एक के बाद एक सर्वे करा रही है और हर सर्वे में पिछड़ रही है। सपा अयोध्या से तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय को पहले ही अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी है।
योगी का पलटवार: ‘चेलों से क्यों लड़ाते हो, आमने-सामने आइए’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार, 10 अक्टूबर को बलरामपुर में 803 करोड़ रुपये से ज्यादा की 78 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के मौके पर इस चुनौती का जवाब दिया। उन्होंने कहा, “अखिलेश जी, मैं आपको ऑफर करता हूं। आइए, आप भी श्री अयोध्या धाम में नामांकन करिए और मैं भी करता हूं।” योगी ने यह भी कहा कि चेलों के जरिए लड़ने के बजाय दोनों एक बार किस्मत आजमाएं और लड़ाई आमने-सामने हो।
मुख्यमंत्री ने यही ऑफर एक्स (X) पर भी पोस्ट किया:
द हिंदू और द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्टों के मुताबिक, योगी ने अयोध्या को ‘आस्था का पावन धाम’ बताया और आरोप लगाया कि सपा के शासन में वहां सिर्फ तीन-चार घंटे बिजली मिलती थी। उन्होंने अपना ’80-20′ वाला दावा भी दोहराया और कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाला NDA 80 फीसदी सीटें जीतेगा, जबकि विपक्षी गठबंधन को 20 फीसदी मिलेंगी। सपा के PDA नारे पर तंज कसते हुए उन्होंने इसे ‘परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी’ करार दिया।
अखिलेश का जवाब: ‘हमारा एक युवा पीडीए प्रहरी ही काफी’
योगी के बयान के कुछ ही घंटों बाद अखिलेश यादव ने एक्स पर जवाब दिया। उन्होंने लिखा कि अयोध्या में ‘चढ़ावा-चंदा-दान’ चोरों को हराने के लिए उनका एक युवा ‘पीडीए प्रहरी’ ही काफी है। उन्होंने भाजपा को 2024 के लोकसभा चुनाव की याद भी दिलाई, जब अयोध्या वाली फैजाबाद सीट पर भाजपा को हार मिली थी। अखिलेश का इशारा राम मंदिर से जुड़े कथित दान चोरी विवाद की ओर था, जिसे विपक्ष लगातार उठा रहा है।
अयोध्या सीट का सियासी गणित
| पहलू | स्थिति |
|---|---|
| मौजूदा विधायक | वेद प्रकाश गुप्ता (भाजपा), जिन्होंने 2022 में सपा के पवन पांडेय को हराया |
| सपा प्रत्याशी (घोषित) | तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय |
| योगी आदित्यनाथ की मौजूदा सीट | गोरखपुर शहर |
| 2024 लोकसभा | फैजाबाद (अयोध्या) सीट पर भाजपा की हार |
चुनौती और जवाबी चुनौती के बीच अखिलेश के जवाब से साफ है कि सपा फिलहाल अपने घोषित प्रत्याशी पर ही दांव लगा रही है। वहीं, अयोध्या से भाजपा उम्मीदवार को लेकर पार्टी की ओर से अभी कोई औपचारिक ऐलान सामने नहीं आया है।
रविवार को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर लखनऊ के JPNIC में श्रद्धांजलि देने के बाद अखिलेश ने फिर दोहराया कि 2027 में सत्ता परिवर्तन तय है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, उन्होंने अयोध्या सीट को लेकर मुख्यमंत्री पर फिर तंज कसा और चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
निष्कर्ष
फिलहाल यह मुकाबला बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित है, और यह कहना जल्दबाजी होगी कि योगी या अखिलेश वाकई अयोध्या से नामांकन करेंगे। लेकिन इतना साफ है कि दोनों दल अयोध्या को 2027 के चुनावी विमर्श के केंद्र में रखना चाहते हैं। भाजपा के लिए यह आस्था और विकास के दावे की परीक्षा है, तो सपा के लिए 2024 की जीत को विधानसभा में दोहराने का मौका। आने वाले महीनों में टिकटों के ऐलान से तय होगा कि यह चुनौती सियासी बयानबाजी थी या सचमुच ‘महामुकाबले’ की शुरुआत।
























































