Nasal Spray Alert: जुकाम में रोज स्प्रे करते हैं? सरकार ने दी चेतावनी

जुकाम में नाक बंद होते ही ज्यादातर लोग मेडिकल स्टोर से नेजल स्प्रे खरीद लेते हैं और कई दिन तक उसका इस्तेमाल करते रहते हैं। अब देश की दवा सुरक्षा निगरानी संस्था ने ऐसे ही दो आम नेजल डीकंजेस्टेंट, जाइलोमेटाजोलिन और ऑक्सीमेटाजोलिन, को लेकर ड्रग सेफ्टी अलर्ट जारी किया है। अलर्ट के मुताबिक इनके इस्तेमाल से ‘रीबाउंड नेजल कंजेशन’ यानी नाक दोबारा और ज्यादा बंद होने के मामले सामने आए हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन भारतीय भेषज संहिता आयोग (IPC) ने यह अलर्ट फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया (PvPI) के तहत जारी किया है। 30 सितंबर 2026 की तारीख वाले इस अलर्ट में बताया गया है कि PvPI के डेटाबेस में दर्ज दवाओं के दुष्प्रभावों के विश्लेषण से ये संकेत मिले हैं। इसी अलर्ट में मिर्गी की दवा लेवेटिरासेटम से मसूड़ों में असामान्य सूजन (जिंजिवल हाइपरट्रॉफी) की आशंका भी जताई गई है।
रीबाउंड कंजेशन होता क्या है
ये स्प्रे नाक की रक्त नलिकाओं को सिकोड़ देते हैं, जिससे सूजन घटती है और कुछ ही मिनट में सांस खुल जाती है। लेकिन लगातार कई दिन इस्तेमाल करने पर असर खत्म होते ही नाक पहले से ज्यादा बंद महसूस होने लगती है। डॉक्टरी भाषा में इसे राइनाइटिस मेडिकामेंटोसा कहते हैं। लोग इसे जुकाम का बिगड़ना समझकर बार-बार स्प्रे करते हैं और धीरे-धीरे स्प्रे की आदत पड़ जाती है।
ज्यादातर नेजल डीकंजेस्टेंट के पैक पर ही लिखा होता है कि इन्हें कुछ ही दिनों तक इस्तेमाल करना है। डॉक्टर भी आम तौर पर लगातार तीन से पांच दिन से ज्यादा इस्तेमाल न करने की सलाह देते हैं।
आपको क्या करना चाहिए
- पैक पर लिखी अवधि से ज्यादा स्प्रे न करें। नाक कुछ दिन बाद भी बंद रहे तो डॉक्टर को दिखाएं।
- अगर हर बार स्प्रे का असर खत्म होने पर नाक और ज्यादा बंद लगे, तो खुराक बढ़ाने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें। एलर्जी, साइनस या नाक की हड्डी टेढ़ी होना भी इसकी वजह हो सकती है।
- बच्चों के लिए कोई भी नेजल ड्रॉप डॉक्टर की सलाह से ही इस्तेमाल करें।
- लेवेटिरासेटम लेने वाले मरीज दवा अपने मन से बंद न करें। मसूड़ों में सूजन, खून आना या दर्द दिखे तो अपने डॉक्टर या डेंटिस्ट को बताएं।
अलर्ट का मतलब यह नहीं है कि इन दवाओं पर रोक लगा दी गई है। यह डॉक्टरों, फार्मासिस्टों और मरीजों से सतर्क रहने और ऐसे मामलों की रिपोर्ट करने की अपील है। दवा बाजार में आने के बाद उसके दुष्प्रभावों पर इसी तरह नजर रखी जाती है, क्योंकि क्लिनिकल ट्रायल में हर दुर्लभ दुष्प्रभाव पकड़ में नहीं आता।
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दुष्प्रभाव दिखे तो यहां करें शिकायत
IPC ने डॉक्टरों और आम लोगों, दोनों से दवाओं के संदिग्ध दुष्प्रभाव की जानकारी देने को कहा है। इसके लिए PvPI की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-180-3024, PvPI मोबाइल ऐप और ADR मॉनिटरिंग सिस्टम का पोर्टल (adrmsipc.in) उपलब्ध है। मरीज को अगर पक्का भरोसा न भी हो कि परेशानी दवा से ही हुई है, तब भी वह रिपोर्ट कर सकता है। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर आगे चलकर दवाओं के लेबल और चेतावनियों में बदलाव होते हैं।








































































