Bharat Rice: लद्दाख से पूर्वोत्तर तक जवानों की थाली में अब “भारत राइस”; FCI के गोदाम भी बनेंगे सेना की ताकत

नई दिल्ली: लद्दाख की बर्फीली चौकियों और पूर्वोत्तर के दुर्गम इलाकों में तैनात जवानों की थाली अब बदलने वाली है। भारतीय सेना ने सोमवार को सैनिकों के लिए “भारत राइस” लॉन्च किया, यानी रक्षा मानकों पर तैयार उच्च गुणवत्ता वाला चावल, जो अब सीधे सेना के सप्लाई डिपो तक पहुंचेगा। इसके साथ ही सेना और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के बीच एक ऐसा समझौता भी हुआ है, जिसके तहत युद्ध या आपात स्थिति में FCI के गोदाम सेना के काम आएंगे।
नई दिल्ली में हुए कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी मौजूद रहे। थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ भी इस मौके पर उपस्थित थे।
पहले क्या होता था, अब क्या बदलेगा
अब तक सेना के डिपो स्थानीय FCI केंद्रों से चावल उठाते थे। नई व्यवस्था में चावल सीधे सेना के सप्लाई डिपो तक पहुंचाया जाएगा, जिनमें लद्दाख और पूर्वोत्तर के दूर-दराज के डिपो भी शामिल हैं। पत्र सूचना कार्यालय (PIB) के मुताबिक भारत राइस की प्रमुख बातें ये हैं:
- चावल रक्षा मानकों के अनुसार मिल किया जाएगा और वित्त वर्ष 2026-27 में NAFED के जरिए आपूर्ति होगी।
- गुणवत्ता जांच के बाद ही आपूर्ति होगी; चावल बाहरी पदार्थ और मिलावट से मुक्त रहेगा, टूटे, खराब और बदरंग दाने न्यूनतम होंगे।
- 10 किलो और 30 किलो के बैग में खरीद होगी, जिससे अग्रिम चौकियों तक ढुलाई आसान होगी।
- यह पहल सेना, FCI, NAFED और खाद्य विभाग के बीच करीब 18 महीने के तालमेल का नतीजा है।

“किसान के खेत से सैनिक की थाली तक”
राजनाथ सिंह ने भारत राइस को “भरोसे का बंधन” बताया, जो किसान के खेत से शुरू होकर सैनिक की थाली तक पहुंचता है। उन्होंने कहा कि यह पहल “जय जवान, जय किसान” की भावना को ठोस रूप देती है।
यह पहल भले छोटी दिखे, लेकिन दुर्गम इलाकों में राशन पहुंचाने वाले सैनिकों को इससे बहुत बड़ी परिचालन राहत मिलेगी।
राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री
ऑपरेशन सिंदूर से मिला सबक
समझौते का दूसरा हिस्सा रणनीतिक है। रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक युद्ध में “लॉजिस्टिक्स खुद एक युद्धक शक्ति है”। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के विश्लेषण से साफ हुआ कि भविष्य के संघर्षों में चेतावनी का समय बेहद कम, यहां तक कि शून्य भी हो सकता है, इसलिए सप्लाई चेन को मजबूत बनाना जरूरी है।
MoU के तहत सेना को आपात स्थिति में FCI के चिन्हित गोदामों, श्रमबल और माल ढुलाई उपकरणों के इस्तेमाल का औपचारिक ढांचा मिलेगा। यह पांच साल के लिए वैध रहेगा और आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकेगा। राजनाथ सिंह ने इसकी तुलना एक्सप्रेसवे पर उतरते लड़ाकू विमानों और BRO की सड़कों से की, जिनका इस्तेमाल नागरिक और सेना, दोनों करते हैं।
मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि देश की रक्षा करने वालों को बेहतरीन चावल उपलब्ध कराना उनके विभाग के लिए गर्व की बात है। PIB के अनुसार सेना अग्निवीर रंगरूटों के लिए अतिरिक्त राशन जैसे कदम पहले ही उठा चुकी है और आगे जैविक (ऑर्गेनिक) राशन शुरू करने का भी प्रस्ताव है।


























































































