Brilliance AI: अब AI बनाएगा पेपर और जांचेगा कॉपियां, हैदराबाद में लॉन्च

हैदराबाद में विकसित एक AI सॉफ्टवेयर अब स्कूल-कॉलेजों में प्रश्नपत्र बनाने से लेकर कॉपियां जांचने तक का काम संभालेगा। तेलंगाना के आईटी और उद्योग मंत्री दुद्दिल्ला श्रीधर बाबू ने रविवार को बंजारा हिल्स स्थित ताज दक्कन होटल में ‘ब्रिलियंस AI’ नाम के इस सॉफ्टवेयर सूट को लॉन्च किया।
यह सूट शिक्षण संस्थानों के लिए बनाया गया है। इसमें छात्रों के सवालों और शंकाओं के समाधान के लिए टेक्स्ट और वॉयस, दोनों तरह की सुविधा दी गई है। यानी छात्र लिखकर भी सवाल पूछ सकेंगे और बोलकर भी।
शिक्षकों का कौन-सा काम करेगा AI
- प्रश्नपत्र तैयार करना: AI आधारित टूल से परीक्षा के प्रश्नपत्र बनाए जा सकेंगे।
- उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन: कॉपियां जांचने में AI की मदद ली जा सकेगी।
- छात्रों की शंकाओं का समाधान: टेक्स्ट और वॉयस के जरिये।
- अभिभावकों को रिपोर्ट: बच्चों की पढ़ाई की प्रगति की जानकारी रिपोर्ट के रूप में माता-पिता तक पहुंचेगी।
स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में शिक्षकों का बड़ा समय प्रश्नपत्र बनाने, कॉपियां जांचने और अभिभावकों को प्रगति बताने में जाता है। ऐसे सॉफ्टवेयर का दावा यही है कि इन कामों का बोझ घटेगा और शिक्षक पढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे।
“तकनीक और पारंपरिक पढ़ाई का मेल जरूरी”
लॉन्च के मौके पर श्रीधर बाबू ने कहा कि उभरती तकनीकें शिक्षा क्षेत्र को बदल रही हैं और AI आधारित समाधान छात्रों के सीखने के नतीजे बेहतर कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक को पारंपरिक शिक्षण पद्धति के साथ जोड़ा जाए, तो पढ़ाई ज्यादा असरदार बन सकती है।
मंत्री ने ‘एडटेक 2025’ सर्वे का हवाला देते हुए बताया कि शैक्षणिक तकनीक का इस्तेमाल करने वाले 77 प्रतिशत बच्चे इसका उपयोग अभ्यास और सीखने के लिए करते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों का अपनी पढ़ाई मजबूत करने के लिए तकनीक की ओर बढ़ना उत्साहजनक है।
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पेपर लीक का जिक्र, डेटा सुरक्षा पर जोर
श्रीधर बाबू ने अपने संबोधन में नीट पेपर लीक का जिक्र करते हुए कहा कि डेटा में सेंधमारी रोकना और डिजिटल सुरक्षा मजबूत करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में डेटा सुरक्षा और निजता का सवाल खास तौर पर अहम है, क्योंकि यहां बच्चों की जानकारी दांव पर होती है।
मंत्री ने यह भी कहा कि AI टूल्स के जिम्मेदार ढंग से काम करने का आकलन होना चाहिए और इन्हें अपनाते समय जवाबदेही, पारदर्शिता और जिम्मेदार इस्तेमाल अनिवार्य हैं। उनके मुताबिक राज्य सरकार डेटा सेंटरों के विकास समेत हर स्तर पर डेटा निजता और सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है।
कॉपी जांच में AI: सवाल भी कम नहीं
मंत्री की यह चेतावनी ऐसे वक्त आई है, जब देश भर में परीक्षाओं की शुचिता पर बहस तेज है। नीट री-एग्जाम में फर्जी अभ्यर्थी बैठाने के आरोपों से लेकर महाराष्ट्र में MPSC पेपर लीक के आरोपों तक, युवाओं का भरोसा बार-बार डगमगाया है। ऐसे में प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाएं जैसे संवेदनशील काम AI और क्लाउड पर ले जाने वाले संस्थानों के लिए डेटा सुरक्षा सबसे बड़ी कसौटी होगी।
मूल्यांकन में AI की भूमिका पर भी सवाल उठते रहे हैं, खासकर लंबे और व्याख्यात्मक उत्तरों की जांच में। ब्रिलियंस AI कितने स्कूल-कॉलेजों तक पहुंचता है और कॉपियों की जांच में इसकी सटीकता कैसी रहती है, यह आने वाले महीनों में संस्थानों के अनुभव से ही साफ होगा। फिलहाल मंत्री का संदेश साफ है: AI अपनाइए, लेकिन बच्चों के डेटा की सुरक्षा से समझौता किए बिना।







































































