Reporting Live Review: नेटफ्लिक्स पर परिणीति की फिल्म, समीक्षकों की राय बंटी

मुंबई: परिणीति चोपड़ा की नई फिल्म Reporting Live 9 अक्टूबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो गई है और पहले वीकेंड में ही यह चर्चा के केंद्र में है। अवैध रेत खनन माफिया का पर्दाफाश करने निकली एक टीवी रिपोर्टर और उसके कैमरामैन की इस कहानी को लेकर समीक्षकों की राय बंटी हुई है। कहीं इसके विषय और कलाकारों की तारीफ हो रही है, तो कहीं कमजोर लेखन पर सवाल उठ रहे हैं।
ओटीटी पर पत्रकारिता आधारित कहानियों की बढ़ती कतार में यह फिल्म इसलिए भी अहम है, क्योंकि यह न्यूजरूम के दबाव, टीआरपी की होड़ और सत्ता-कारोबार के गठजोड़ को एक साथ दिखाने की कोशिश करती है।
क्या है ‘रिपोर्टिंग लाइव’ की कहानी
हिंदुस्तान टाइम्स की समीक्षा के मुताबिक, फिल्म की कहानी संध्या यादव (परिणीति चोपड़ा) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने पहले प्राइमटाइम ‘स्कूप’ का इंतजार कर रही एक पत्रकार है। उसकी टीम में वीडियो जर्नलिस्ट विनोद शर्मा (देवेन भोजानी) है। विसरगांव नाम की जगह पर एक पुल गिरता है, बस नदी में जा गिरती है और 15 लोगों की जान चली जाती है। हादसे को महज दुर्घटना बताकर रफा-दफा कर दिया जाता है, लेकिन संध्या और विनोद को इसके पीछे अवैध रेत खनन का खेल नजर आता है।
इसके बाद दोनों को अपनी जान और नौकरी, दोनों पर खतरे का सामना करना पड़ता है। करीब दो घंटे की यह फिल्म इसी जांच और उसके नतीजों की कहानी है। फिल्म का निर्देशन ध्रुव त्रिपाठी ने किया है, जिन्होंने मिहिर जाधव के साथ मिलकर इसे लिखा भी है।
स्टारकास्ट में कई मंझे हुए चेहरे
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी कास्ट मानी जा रही है। परिणीति और देवेन भोजानी के अलावा इसमें अमोल पालेकर, आदिल हुसैन, शेखर सुमन, पीतोबाश त्रिपाठी, प्राची शाह पंड्या, नासर और शाश्वत चटर्जी जैसे कलाकार हैं। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार अमोल पालेकर ‘काका’ के किरदार में हैं, जो शुरुआती हिचक के बाद सच सामने लाने का जरिया बनते हैं, जबकि नासर एक कंस्ट्रक्शन कारोबारी की भूमिका में हैं।
समीक्षकों ने क्या कहा
फिल्म को बड़े अखबारों से मिली-जुली से लेकर कमजोर समीक्षाएं मिली हैं। नीचे दो प्रमुख समीक्षाओं का सार है:
| प्रकाशन / समीक्षक | रेटिंग | मुख्य राय |
|---|---|---|
| हिंदुस्तान टाइम्स (ऋषभ सूरी) | 2.5/5 | तेज रफ्तार और अच्छा अभिनय, लेकिन कहानी अनुमान लगाने लायक |
| इंडियन एक्सप्रेस (शुभ्रा गुप्ता) | 1.5/5 | विषय में दम, पर कमजोर लेखन के नीचे दबी फिल्म |
हिंदुस्तान टाइम्स ने लिखा कि फिल्म का न्यूजरूम माहौल पत्रकारिता को बेवजह ग्लैमराइज नहीं करता और इस मामले में यह ‘नो वन किल्ड जेसिका’ के ज्यादा करीब है। समीक्षा में देवेन भोजानी के अभिनय को ‘शानदार’ बताया गया और परिणीति के काम को ठीक-ठाक कहा गया। हालांकि समीक्षक के मुताबिक, कहानी का अंदाजा पहले ही लग जाता है और जांच का वह रोमांच नहीं बन पाता, जिसका वादा फिल्म का विषय करता है। समीक्षा में फिल्म की तुलना हंसल मेहता की वेब सीरीज ‘स्कूप’ से भी की गई।
इंडियन एक्सप्रेस की समीक्षक शुभ्रा गुप्ता ज्यादा सख्त रहीं। उन्होंने लिखा कि फिल्म में शोध के संकेत साफ दिखते हैं, जैसे जमीन के पट्टे, संरक्षित क्षेत्र और ग्रीन ट्रिब्यूनल का जिक्र, लेकिन न्यूजरूम के घिसे-पिटे दृश्य और रिपोर्टरों को ‘फिल्मी जासूस’ बना देना इसे कमजोर करता है। उनकी नजर में परिणीति का अभिनय एक ही सुर में रहा, जबकि देवेन भोजानी बेहतर लगे।
सोशल मीडिया पर भी दर्शकों की प्रतिक्रिया बंटी हुई है। द डेली जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ दर्शकों को फिल्म का विषय और क्लाइमैक्स पसंद आया, जबकि कुछ ने इसकी रफ्तार और कहानी कहने के तरीके की आलोचना की।
देखें या नहीं?
अगर आपको पत्रकारिता और सामाजिक मुद्दों पर बनी फिल्में पसंद हैं, तो ‘रिपोर्टिंग लाइव’ एक बार देखी जा सकती है, खासकर देवेन भोजानी और परिणीति की जोड़ी की केमिस्ट्री के लिए। लेकिन अगर आप ‘स्कूप’ जैसी कसी हुई, रोमांचक खोजी कहानी की उम्मीद कर रहे हैं, तो समीक्षकों की मानें तो यह फिल्म उस स्तर तक नहीं पहुंचती।
निष्कर्ष
‘रिपोर्टिंग लाइव’ ऐसे समय आई है जब रेत खनन जैसे जमीनी मुद्दे लगातार परदे पर जगह बना रहे हैं। फिल्म का इरादा नेक है और कलाकार मजबूत हैं, लेकिन समीक्षकों की आम राय यही है कि कमजोर पटकथा इसकी सबसे बड़ी कमी है। अब देखना यह है कि नेटफ्लिक्स पर दर्शक इसे कितना पसंद करते हैं। फिल्म नेटफ्लिक्स पर हिंदी में स्ट्रीम हो रही है।
























































