Riyadh Airport Attack: रियाद एयरपोर्ट पर हमला, 12 की मौत, 309 घायल

रियाद: सऊदी अरब की राजधानी रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शनिवार को हुए हमले में 12 लोगों की मौत हो गई और 309 लोग घायल हो गए। Riyadh Airport Attack को एक दशक से ज्यादा समय में सऊदी जमीन पर हुआ सबसे घातक हमला बताया जा रहा है। सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने इसके लिए यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया है और “निर्णायक जवाब” देने की चेतावनी दी है।
हमले के बाद हवाई अड्डे पर उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। सऊदी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (GACA) ने कहा है कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
Riyadh Airport Attack: किन देशों के लोग मारे गए
अरब न्यूज के मुताबिक, GACA ने रविवार तड़के जारी बयान में बताया कि मृतकों में चार सऊदी नागरिक, बांग्लादेश के दो नागरिक और अमेरिका, मिस्र, जॉर्डन, सीरिया, फलस्तीन व सूडान का एक-एक नागरिक शामिल है। बयान के अनुसार, 309 घायलों में से कुछ की हालत गंभीर है और उनका इलाज कई अस्पतालों में चल रहा है। प्राधिकरण की ओर से जारी राष्ट्रीयता सूची में किसी भारतीय नागरिक का नाम नहीं है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के हवाले से अल-मॉनिटर ने बताया कि यह हमला बिना किसी चेतावनी के हुआ और सऊदी अरब के खतरा-चेतावनी सिस्टम ने कोई अलर्ट जारी नहीं किया। एक प्रत्यक्षदर्शी ने रॉयटर्स को बताया कि उसने धमाका होते देखा और फिर टर्मिनल के अंदर कई घायल लोग जमीन पर पड़े थे। मौके पर दर्जनों एम्बुलेंस दौड़ती दिखीं।
सिंगापुर के न्यूज चैनल CNA से बात करते हुए एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, “मैं गेट 403 पर था। मैंने 401 पर हमला होते देखा, मेरी आंखों के सामने लोग घायल हुए। हर कोई भाग रहा था।” CNA के मुताबिक, घायलों की बड़ी संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य अधिकारियों को डॉक्टरों की आपात तैनाती करनी पड़ी।
एक हफ्ते में तीसरा हमला
यह इस हफ्ते रियाद एयरपोर्ट पर तीसरा हमला है। अरब न्यूज के अनुसार, गुरुवार को हुए हमलों में सऊदी एयरलाइंस के एक पायलट समेत तीन लोग मारे गए थे और एक यात्री विमान को नुकसान पहुंचा था। बुधवार को इसी हवाई अड्डे पर हुए हमले में सूडान के एक नागरिक की मौत हुई थी। इससे पहले मंगलवार को असीर प्रांत के आभा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमले में मोरक्को और अल्जीरिया की दो महिलाओं की जान चली गई थी।
हूतियों ने गुरुवार के हमलों की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन बीबीसी और CNA के मुताबिक शनिवार के हमले पर उन्होंने अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है। बीबीसी ने लिखा है कि शनिवार का हमला मई 2015 के बाद से सऊदी अरब में सबसे घातक है।
गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मालिकी ने एक्स पर जारी बयान में कहा कि यात्री टर्मिनल पर हुए इस हमले में आम यात्री और हवाई अड्डे के कर्मचारी मारे गए और घायल हुए हैं। उन्होंने इसे “कायराना आतंकी हमला” और “पूर्ण युद्ध अपराध” करार दिया। अरब न्यूज के अनुसार, गठबंधन ने शनिवार आधी रात दम्माम और अल-खर्ज में भी हमलों की जानकारी दी है।
क्षेत्रीय तनाव और अमेरिका का रुख
CNA की रिपोर्ट के मुताबिक, यमन सरकार और हूतियों के बीच जुलाई में संघर्षविराम टूटने के बाद से सऊदी अरब पर हूती हमलों की अभूतपूर्व लहर चल रही है। बीबीसी के अनुसार, हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ “समुद्री नाकेबंदी” का ऐलान किया है और सऊदी हवाई अड्डों, तेल ठिकानों और टैंकरों पर मिसाइल व ड्रोन हमले शुरू किए हैं। एपी के मुताबिक, यह ईरान युद्ध शुरू होने के बाद किसी भी खाड़ी अरब देश में हुआ सबसे घातक हमला है।
अल जजीरा के अनुसार, हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब के साथ हमलों में शामिल होने पर “विचार करेंगे”। उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बात करने की योजना की भी बात कही। एपी का आकलन है कि यह हमला अमेरिका समेत सहयोगियों पर सऊदी अरब को सैन्य मदद देने का दबाव बढ़ाएगा।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी हमले की निंदा की है। डॉन अखबार के मुताबिक, उन्होंने कहा कि सऊदी अरब के खिलाफ किसी भी आक्रामकता को पाकिस्तान बर्दाश्त नहीं करेगा और यह उसके लिए “रेड लाइन” है।
भारत के लिए क्यों अहम
सऊदी अरब में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं और रियाद एयरपोर्ट भारत से आने-जाने वाली कई उड़ानों का अहम केंद्र है। ऐसे में हवाई अड्डे पर कामकाज रुकने और खाड़ी में बढ़ते तनाव का असर यात्रियों पर पड़ सकता है। सऊदी अरब की यात्रा करने वाले लोगों को सलाह है कि वे अपनी एयरलाइन से उड़ान की स्थिति की पुष्टि करते रहें और आधिकारिक परामर्शों पर नजर रखें।
खाड़ी क्षेत्र पहले ही ईरान से जुड़े संघर्ष, होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों पर हमलों और ऊंची तेल कीमतों से जूझ रहा है। रियाद पर यह हमला इस आग को और भड़का सकता है। अब सबकी नजर इस पर है कि सऊदी गठबंधन का “निर्णायक जवाब” किस रूप में सामने आता है और क्या अमेरिका सीधे इस मोर्चे पर उतरता है।
रियाद: सऊदी अरब की राजधानी रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शनिवार को हुए हमले में 12 लोगों की मौत हो गई और 309 लोग घायल हो गए। Riyadh Airport Attack को एक दशक से ज्यादा समय में सऊदी जमीन पर हुआ सबसे घातक हमला बताया जा रहा है। सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने इसके लिए यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया है और “निर्णायक जवाब” देने की चेतावनी दी है।
हमले के बाद हवाई अड्डे पर उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। सऊदी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (GACA) ने कहा है कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
Riyadh Airport Attack: किन देशों के लोग मारे गए
अरब न्यूज के मुताबिक, GACA ने रविवार तड़के जारी बयान में बताया कि मृतकों में चार सऊदी नागरिक, बांग्लादेश के दो नागरिक और अमेरिका, मिस्र, जॉर्डन, सीरिया, फलस्तीन व सूडान का एक-एक नागरिक शामिल है। बयान के अनुसार, 309 घायलों में से कुछ की हालत गंभीर है और उनका इलाज कई अस्पतालों में चल रहा है। प्राधिकरण की ओर से जारी राष्ट्रीयता सूची में किसी भारतीय नागरिक का नाम नहीं है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के हवाले से अल-मॉनिटर ने बताया कि यह हमला बिना किसी चेतावनी के हुआ और सऊदी अरब के खतरा-चेतावनी सिस्टम ने कोई अलर्ट जारी नहीं किया। एक प्रत्यक्षदर्शी ने रॉयटर्स को बताया कि उसने धमाका होते देखा और फिर टर्मिनल के अंदर कई घायल लोग जमीन पर पड़े थे। मौके पर दर्जनों एम्बुलेंस दौड़ती दिखीं।
सिंगापुर के न्यूज चैनल CNA से बात करते हुए एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, “मैं गेट 403 पर था। मैंने 401 पर हमला होते देखा, मेरी आंखों के सामने लोग घायल हुए। हर कोई भाग रहा था।” CNA के मुताबिक, घायलों की बड़ी संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य अधिकारियों को डॉक्टरों की आपात तैनाती करनी पड़ी।
एक हफ्ते में तीसरा हमला
यह इस हफ्ते रियाद एयरपोर्ट पर तीसरा हमला है। अरब न्यूज के अनुसार, गुरुवार को हुए हमलों में सऊदी एयरलाइंस के एक पायलट समेत तीन लोग मारे गए थे और एक यात्री विमान को नुकसान पहुंचा था। बुधवार को इसी हवाई अड्डे पर हुए हमले में सूडान के एक नागरिक की मौत हुई थी। इससे पहले मंगलवार को असीर प्रांत के आभा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमले में मोरक्को और अल्जीरिया की दो महिलाओं की जान चली गई थी।
हूतियों ने गुरुवार के हमलों की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन बीबीसी और CNA के मुताबिक शनिवार के हमले पर उन्होंने अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है। बीबीसी ने लिखा है कि शनिवार का हमला मई 2015 के बाद से सऊदी अरब में सबसे घातक है।
गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मालिकी ने एक्स पर जारी बयान में कहा कि यात्री टर्मिनल पर हुए इस हमले में आम यात्री और हवाई अड्डे के कर्मचारी मारे गए और घायल हुए हैं। उन्होंने इसे “कायराना आतंकी हमला” और “पूर्ण युद्ध अपराध” करार दिया। अरब न्यूज के अनुसार, गठबंधन ने शनिवार आधी रात दम्माम और अल-खर्ज में भी हमलों की जानकारी दी है।
क्षेत्रीय तनाव और अमेरिका का रुख
CNA की रिपोर्ट के मुताबिक, यमन सरकार और हूतियों के बीच जुलाई में संघर्षविराम टूटने के बाद से सऊदी अरब पर हूती हमलों की अभूतपूर्व लहर चल रही है। बीबीसी के अनुसार, हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ “समुद्री नाकेबंदी” का ऐलान किया है और सऊदी हवाई अड्डों, तेल ठिकानों और टैंकरों पर मिसाइल व ड्रोन हमले शुरू किए हैं। एपी के मुताबिक, यह ईरान युद्ध शुरू होने के बाद किसी भी खाड़ी अरब देश में हुआ सबसे घातक हमला है।
अल जजीरा के अनुसार, हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब के साथ हमलों में शामिल होने पर “विचार करेंगे”। उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बात करने की योजना की भी बात कही। एपी का आकलन है कि यह हमला अमेरिका समेत सहयोगियों पर सऊदी अरब को सैन्य मदद देने का दबाव बढ़ाएगा।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी हमले की निंदा की है। डॉन अखबार के मुताबिक, उन्होंने कहा कि सऊदी अरब के खिलाफ किसी भी आक्रामकता को पाकिस्तान बर्दाश्त नहीं करेगा और यह उसके लिए “रेड लाइन” है।
भारत के लिए क्यों अहम
सऊदी अरब में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं और रियाद एयरपोर्ट भारत से आने-जाने वाली कई उड़ानों का अहम केंद्र है। ऐसे में हवाई अड्डे पर कामकाज रुकने और खाड़ी में बढ़ते तनाव का असर यात्रियों पर पड़ सकता है। सऊदी अरब की यात्रा करने वाले लोगों को सलाह है कि वे अपनी एयरलाइन से उड़ान की स्थिति की पुष्टि करते रहें और आधिकारिक परामर्शों पर नजर रखें।
खाड़ी क्षेत्र पहले ही ईरान से जुड़े संघर्ष, होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों पर हमलों और ऊंची तेल कीमतों से जूझ रहा है। रियाद पर यह हमला इस आग को और भड़का सकता है। अब सबकी नजर इस पर है कि सऊदी गठबंधन का “निर्णायक जवाब” किस रूप में सामने आता है और क्या अमेरिका सीधे इस मोर्चे पर उतरता है।

































































