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US-China Trade: ओवरकैपेसिटी पर भारत समेत 14 देशों के साथ अमेरिका का साझा बयान, चीन ने दी जवाबी कदम की चेतावनी

बंदरगाह पर क्रेनों के बीच कंटेनरों से लदा चीनी शिपिंग कंपनी COSCO का मालवाहक जहाज

वॉशिंगटन/बीजिंग: वैश्विक व्यापार में “ओवरकैपेसिटी” यानी जरूरत से ज्यादा उत्पादन का मुद्दा एक बार फिर अमेरिका और चीन के बीच टकराव की वजह बन गया है। अमेरिका की अगुवाई में भारत समेत 14 अर्थव्यवस्थाओं ने एक साझा मंत्रिस्तरीय बयान पर दस्तखत किए हैं, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सोलर पैनल और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में “संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता” से मिलकर निपटने का संकल्प लिया गया है। चीन ने इसे व्यापार संरक्षणवाद का बहाना बताते हुए चेतावनी दी है कि अगर उसके हितों को नुकसान पहुंचाया गया, तो वह जवाब में हर जरूरी कदम उठाएगा।

बयान में चीन का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन US-China Trade के मौजूदा माहौल में बीजिंग की तीखी प्रतिक्रिया बताती है कि उसने इसे अपने खिलाफ मोर्चेबंदी के तौर पर देखा है।

साझा बयान में क्या कहा गया

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने 7 अक्टूबर को बताया कि आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) की ट्रेड कमेटी की बैठक के दौरान उसने 14 अर्थव्यवस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई। बयान पर अमेरिका के साथ अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, मेक्सिको, पोलैंड, तुर्किये और ब्रिटेन के व्यापार मंत्रियों के नाम हैं। यह पहल 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को अमेरिका के मिलवॉकी में हुई G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक की चर्चाओं पर आधारित है।

बयान के मुताबिक, ऐसी अतिरिक्त क्षमता वैश्विक मांग से लगातार ज्यादा रहती है, बाजार की सामान्य स्थितियों में टिक नहीं पाती और सरकारी नीतियों या हस्तक्षेप से खड़ी या कायम रखी जाती है। इससे कीमतें और उत्पादन के तौर-तरीके बिगड़ते हैं, नए खिलाड़ी बाजार में नहीं आ पाते और व्यापारिक साझेदारों की उस देश पर निर्भरता बढ़ती है। बयान में यह भी कहा गया है कि यह निर्भरता “मनमाने निर्यात प्रतिबंधों” समेत आर्थिक दबाव के प्रति जोखिम बढ़ा सकती है।

बिंदुसाझा बयान में क्या है
हस्ताक्षरकर्ताअमेरिका + 14 अर्थव्यवस्थाएं, जिनमें भारत, जापान, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और कनाडा शामिल
चिंता वाले पहले 5 क्षेत्रऑटो और इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, केमिकल्स, बुनियादी सेमीकंडक्टर, सोलर पैनल
व्यवस्थाहर क्षेत्र के लिए अलग “सेक्टोरल प्लेटफॉर्म”
अगला कदमदिसंबर 2026 से पहले तकनीकी स्तर की बैठक, कामकाज की शर्तें तय करना और आंकड़े साझा करना
न्योताOECD के भीतर और बाहर के दूसरे देशों को भी जुड़ने का आमंत्रण
स्रोत: USTR की प्रेस रिलीज और साझा मंत्रिस्तरीय बयान (7 अक्टूबर 2026)

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीयर ने कहा कि अगर इन मुद्दों पर लगाम न लगी तो ये घरेलू उद्योगों को पंगु बना देंगे, स्थानीय उत्पादन को बाहर कर देंगे और कामगारों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने की कोशिशों में बाधा डालेंगे। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन अपने उद्योगों और कामगारों की रक्षा के लिए साझेदार देशों के साथ काम करता रहेगा।

चीन का पलटवार: “जरूरी कदम उठाएंगे”

चीन के सरकारी अखबार चाइना डेली और समाचार सेवा ECNS के मुताबिक, चीन के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को एक ऑनलाइन बयान में इस साझा बयान पर प्रतिक्रिया दी। प्रवक्ता ने कहा कि चीन “तथाकथित ओवरकैपेसिटी” के मुद्दे पर कई बार अपनी स्थिति साफ कर चुका है और जुलाई में इस पर एक पोजिशन पेपर भी जारी किया था।

प्रवक्ता के अनुसार, उत्पादन क्षमता के मुद्दे को व्यापक, निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ तरीके से देखा जाना चाहिए, और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा की चिंता में आर्थिक-व्यापारिक मामलों का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। चीन का कहना है कि ओवरकैपेसिटी के नाम पर संरक्षणवाद वैश्विक व्यापार व्यवस्था और सप्लाई चेन की स्थिरता को बिगाड़ेगा और दुनिया की आर्थिक वृद्धि के लिए लंबे समय का जोखिम पैदा करेगा। ECNS के मुताबिक, प्रवक्ता ने कहा कि अगर संबंधित अर्थव्यवस्थाएं इसे बहाना बनाकर चीन के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले कदम उठाती हैं, तो चीन जवाब में हर तरह के जरूरी उपाय करेगा।

ट्रेड ट्रूस के बीच नया तनाव, भारत के लिए क्या मायने

यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्धविराम जारी है। ब्लूमबर्ग लॉ और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने चीन के उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग से बातचीत के बाद घोषणा की थी कि 10 नवंबर को खत्म होने वाला यह युद्धविराम दो महीने बढ़ाकर 10 जनवरी 2027 तक कर दिया गया है। यानी बड़ी डील पर बातचीत चल रही है, लेकिन ओवरकैपेसिटी जैसे मुद्दों पर दोनों के बीच गहरी खाई बनी हुई है।

भारत के लिहाज से अहम बात यह है कि वह इस साझा बयान के हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल है। बयान में जिन क्षेत्रों का जिक्र है, यानी इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सोलर पैनल और सेमीकंडक्टर, वे भारत की औद्योगिक महत्वाकांक्षाओं के लिहाज से भी अहम हैं। दिसंबर से पहले होने वाली तकनीकी बैठकों में इन मंचों की रूपरेखा तय होगी, जिससे साफ होगा कि यह पहल कितनी ठोस शक्ल लेती है।

निष्कर्ष

फिलहाल यह साझा बयान इरादे का ऐलान है, कोई नया टैरिफ या प्रतिबंध नहीं। लेकिन चीन की चेतावनी ने साफ कर दिया है कि ओवरकैपेसिटी के मुद्दे पर अगर कोई ठोस कदम उठा, तो बीजिंग चुप नहीं बैठेगा। अमेरिका-चीन युद्धविराम की नई समयसीमा, 10 जनवरी 2027, से पहले यह मुद्दा दोनों देशों की बातचीत को और पेचीदा बना सकता है।

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