अक्टूबर 12, 2026
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CJP Ultimatum: “तारीख आप चुनिए, जगह जंतर मंतर ही होगी”; दिल्ली पुलिस को GenZ आंदोलन के 24 घंटे

नई दिल्ली: जिस जंतर मंतर को दशकों से देश की “आवाज का पता” कहा जाता रहा, वही अब इस आंदोलन की सबसे बड़ी जिद बन गया है। 24 घंटे की हिरासत से छूटने के अगले ही दिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका सोमवार को संसद मार्ग थाने पहुंचे और दिल्ली पुलिस को लिखित अल्टीमेटम थमा दिया: 24 घंटे में जवाब दीजिए, वरना हम खुद नई तारीख का ऐलान करेंगे।

दिलचस्प यह है कि यह पत्र ऐसे समय दिया गया जब दिल्ली पुलिस के एक स्थायी आदेश के जरिए जंतर मंतर को नामित प्रदर्शन स्थल की सूची से ही हटा दिया गया है और उसकी जगह रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को नामित किया गया है।

पत्र में क्या लिखा है

संसद मार्ग थाने के DCP को संबोधित पत्र में CJP ने दावा किया कि पिछले तीन दिनों में राजधानी में 55,000 से ज्यादा पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती से “नागरिक जीवन लगभग ठप” हो गया है, दुकानें लगातार बंद रहीं और राहगीरों, पत्रकारों व प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। संगठन ने इसे “संरचित अव्यवस्था” (structured disorder) का नाम दिया।

सरकार और पुलिस की ओर से लगातार यह आरोप लगाया जाता है कि प्रदर्शन की सूचना कम से कम 10 दिन पहले नहीं दी गई। इसलिए हम आपको यह विकल्प देते हैं कि आप अपनी पसंद की तारीख पर हमें जंतर मंतर उपलब्ध कराएं।

दिल्ली पुलिस को लिखे CJP के पत्र का अंश

पत्र में चार मांगें रखी गईं: भारी पुलिस तैनाती में कमी, “मनमानी” हिरासत पर रोक, स्वतंत्र पत्रकारों का उत्पीड़न बंद हो और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए जंतर मंतर दिया जाए। संगठन ने लिखा कि जवाब न मिलने पर प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखेंगे और CJP बड़े प्रदर्शन की नई तारीख घोषित करेगी।

CJP द्वारा दिल्ली पुलिस को लिखा गया पत्र
संसद मार्ग थाने के DCP को सौंपे गए CJP के पत्र का पहला पन्ना। फोटो: X/@SauravDassss

जंतर मंतर हटाए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया

जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने की खबर पर CJP के आधिकारिक हैंडल ने लिखा, “आगे क्या? लोकतंत्र को ही डी-नोटिफाई कर देंगे?” एक अन्य पोस्ट में संगठन ने कहा, “अब पूरा देश जंतर मंतर बनेगा।” सौरव दास ने बयान जारी कर सवाल किया कि क्या गृह मंत्रालय ने यह फैसला लेने से पहले किसी से परामर्श किया था।

पुलिस का कहना है कि जंतर मंतर को गृह मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों के आधार पर डी-नोटिफाई किया गया है और नागरिकों के धरना-प्रदर्शन के अधिकार के लिए वैकल्पिक स्थल तय किए गए हैं।

पांच महीने पुराना संगठन, जिसने सरकार को उलझा दिया

CJP कोई पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है। इसकी शुरुआत मई में अभिजीत दिपके के एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई थी, जो बेरोजगार युवाओं को “कॉकरोच” कहे जाने वाली एक टिप्पणी पर व्यंग्य के रूप में लिखा गया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत बाद में कह चुके हैं कि उनकी टिप्पणी को गलत संदर्भ में लिया गया। बेरोजगारी, पेपर लीक और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर यह मंच तेजी से युवाओं के बीच फैला और गर्मियों में शिक्षा सुधारों को लेकर पांच हफ्ते लंबा प्रदर्शन कर चुका है।

अब संगठन का फोकस मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे पर है। CJP नेताओं ने रविवार को साफ कहा था कि मांग पूरी होने तक देशभर में प्रदर्शन जारी रहेंगे। ऐसे में अगले 24 घंटे अहम हैं: पुलिस तारीख देती है, कोई वैकल्पिक स्थल सुझाती है या फिर CJP खुद अगला कदम घोषित करती है।

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