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PM Modi Bastar Diwali: जवानों संग दिवाली, बोले- हर जिला नक्सलमुक्त

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जवानों को दिवाली की मिठाई देते हुए—फाइल फोटो, लोंगेवाला, 14 नवंबर 2020

दिवाली की दोपहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छत्तीसगढ़ के बस्तर पहुंचे और सुरक्षाबलों के जवानों के बीच मिठाई बांटकर त्योहार मनाया। जिस जंगल को दशकों तक नक्सली हिंसा के लिए जाना गया, वहीं से प्रधानमंत्री ने कहा—“ये पहली दीवाली है, जब देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त है।” प्रधानमंत्री कार्यालय ने 8 नवंबर 2026 को पत्र सूचना कार्यालय (PIB) के जरिए इस कार्यक्रम की जानकारी दी और भाषण का पूरा पाठ भी जारी किया।

सुबह 10:22 बजे जारी PIB की सूचना के मुताबिक, बस्तर रवाना होते समय प्रधानमंत्री ने X पर लिखा था—”दीपावली के पावन अवसर पर बस्तर जा रहा हूं। कल तक जहां नक्सलियों का कहर था वहां आज विकास की बहार है।” जवानों के साथ जश्न के बाद उन्होंने एक वीडियो साझा कर लिखा, “Diwali is sweeter with those who protect us!”

कारगिल, लेपचा, INS विक्रांत… और इस बार बस्तर

प्रधानमंत्री हर साल दिवाली सीमा या मोर्चे पर तैनात जवानों के साथ मनाते रहे हैं। भाषण में उन्होंने खुद याद दिलाया कि कारगिल से लेपचा तक, सरक्रीक से INS विक्रांत तक वे जवानों के बीच दिवाली मना चुके हैं। इस बार चुनाव सीमा का नहीं, देश के भीतर के उस मोर्चे का था, जहां लड़ाई वामपंथी उग्रवाद से थी।

उन्होंने CRPF, कोबरा, BSF, ITBP, SSB, IRB, राज्य पुलिस, बस्तर फाइटर्स के कमांडो और महिला फाइटर्स का नाम लेकर कहा कि “देश आपकी सेवाओं के लिए आपका ऋणी है।” प्रधानमंत्री के शब्दों में, “40-50 साल के बाद आपके लिए ऐसी दिवाली आई है।”

भाषण के बड़े दावे, प्रधानमंत्री के ही शब्दों में

  • 230 से ज्यादा जिले: प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय देश के करीब 20 राज्यों में 230 से ज्यादा जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे और एक साल में दो-दो हजार तक नक्सली हमले होते थे।
  • दंतेवाड़ा 2010: उन्होंने याद दिलाया कि 2010 में दंतेवाड़ा में मुठभेड़ में CRPF के 76 जवान शहीद हुए थे और उसी साल एक अन्य घटना में 44 नागरिकों की हत्या हुई थी।
  • 47 साल में पहली बार: उनके मुताबिक पिछले एक वर्ष में CRPF के एक भी जवान को ड्यूटी के दौरान जान नहीं गंवानी पड़ी।
  • 2004–2013 का आंकड़ा: प्रधानमंत्री ने कहा कि उस दौर में हर साल मारे गए नक्सलियों से ज्यादा संख्या में जवान शहीद होते थे, और छत्तीसगढ़ में ही एक हजार से ज्यादा जवानों का बलिदान हुआ।

सरकार की रणनीति पर उन्होंने कहा कि नक्सलियों और अलगाववादियों की फंडिंग पर चोट की गई, फेक करेंसी नेटवर्क तोड़ा गया, जिससे हथियारों की सप्लाई, नक्सलियों की आवाजाही और भर्ती पर लगाम लगी। साथ ही सुरक्षाबलों को “हर जरूरी निर्णय लेने की आज़ादी” दी गई।

बंदूक के बाद सड़क, टावर और स्कूल

भाषण का बड़ा हिस्सा उन इलाकों के विकास पर था, जहां कभी स्कूल जलाए जाते थे और मोबाइल टावर नहीं लगने दिए जाते थे। प्रधानमंत्री के मुताबिक वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाकों में:

  • 15 हजार किलोमीटर से ज्यादा सड़कें बनाई गईं;
  • साढ़े नौ हजार से ज्यादा मोबाइल टावर लगाए गए;
  • आदिवासी बच्चों के लिए करीब पौने दो सौ एकलव्य स्कूल खोले गए;
  • करीब 50 ITI और 50 के आसपास स्किल डेवलपमेंट सेंटर बनाए गए;
  • हजारों पोस्ट ऑफिस, बैंक शाखाएं और ATM खोले गए, और अति पिछड़े आदिवासी इलाकों के लिए पीएम जनमन योजना शुरू हुई।

उन्होंने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास की योजनाओं का भी जिक्र किया और कहा कि आज बस्तर में “बस्तर ओलंपिक” हो रहा है, जहां “बच्चे बंदूक नहीं, स्पोर्ट्स में हाथ आजमा रहे हैं।”

गरीबी पर वर्ल्ड बैंक रिपोर्ट का हवाला

प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई को गरीबी के खिलाफ लड़ाई से जोड़ा। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि बीते 12 वर्षों में भारत में 50 करोड़ लोग भीषण गरीबी से बाहर निकले हैं। इसके पीछे उन्होंने जनधन, पीएम आवास, मुद्रा, स्वनिधि, आयुष्मान भारत, मुफ्त राशन, स्वच्छ भारत मिशन और हर घर जल जैसी योजनाओं को गिनाया—और दिवाली की रंगोली की मिसाल दी, जिसमें छोटी-छोटी रेखाएं जुड़कर बड़ी तस्वीर बनाती हैं।

“खतरा अभी टला नहीं है”

जश्न के बीच प्रधानमंत्री ने चेतावनी भी दी: “नक्सली खत्म हुए हैं, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है।” उन्होंने कहा कि जंगलों से हथियारबंद नक्सली भले मिट गए हों, लेकिन “दिमागी नक्सली” आज भी संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ लोगों को उकसा रहे हैं और इन्हें पहचानकर परास्त करना है। आगे के लक्ष्य के तौर पर उन्होंने नशा-मुक्त भारत, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत का जिक्र किया।

अंदरूनी सुरक्षा में तैनात बलों के योगदान पर हाल में पुलिस स्मृति दिवस पर भी चर्चा हुई थी—पुलिस स्मृति दिवस पर अमित शाह का संबोधन यहां पढ़ें। अर्थव्यवस्था और विकास के दावों पर बहस के लिए हमारी रिपोर्ट Economist का लेख और भारत का जवाब भी देखें।

दिवाली की पूजा का समय जानना है? शहरवार लक्ष्मी पूजा मुहूर्त यहां देखें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जवानों को दिवाली की मिठाई देते हुए—फाइल फोटो, लोंगेवाला, 14 नवंबर 2020
फाइल फोटो: लोंगेवाला (जैसलमेर) में 14 नवंबर 2020 को जवानों के साथ दिवाली मनाते प्रधानमंत्री। साभार: प्रधानमंत्री कार्यालय / Wikimedia Commons (GODL-India)। यह तस्वीर बस्तर कार्यक्रम की नहीं है।
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