India-US Trade Deal: अमेरिका के साथ ट्रेड डील का पहला चरण फाइनल, गोयल बोले- कानूनी ड्राफ्टिंग जारी

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) का पहला चरण तय हो गया है और अब इसकी कानूनी ड्राफ्टिंग चल रही है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार, 15 अक्टूबर को दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी सम्मेलन में छात्रों से बातचीत के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने साफ किया कि समझौता जल्द अंतिम रूप ले लेगा, लेकिन इसे तभी लागू किया जाएगा जब भारत को अपने प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बढ़त मिलेगी।
समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक गोयल ने कहा, “अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला हिस्सा तय हो चुका है। अभी इसकी अंतिम रूपरेखा और कानूनी ड्राफ्टिंग पर काम चल रहा है। हमें उम्मीद है कि हम इसे जल्द अंतिम रूप दे देंगे और प्रतिस्पर्धी देशों पर बढ़त मिलते ही इसे लागू कर देंगे।”
वाणिज्य सचिव बोले- जल्द से जल्द होंगे हस्ताक्षर
इसी दिन व्यापार के मासिक आंकड़ों पर मीडिया ब्रीफिंग में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी पुष्टि की कि समझौते का पहला चरण तय हो चुका है और इसकी कानूनी ड्राफ्टिंग जारी है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन के साथ बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। अग्रवाल ने कहा, “हमें उम्मीद है कि हम जल्द से जल्द इस समझौते को अंतिम रूप देकर इस पर हस्ताक्षर कर लेंगे।” उनके मुताबिक भारत इस समझौते के जरिए अमेरिकी बाजार में तरजीही पहुंच (प्रेफरेंशियल मार्केट एक्सेस) और टैरिफ में ज्यादा स्थिरता चाहता है।
अग्रवाल ने यह भी बताया कि समझौते पर हस्ताक्षर अमेरिका के नए टैरिफ ढांचे से जुड़े हैं। अमेरिका में व्यापार कानून की धारा 301 (सेक्शन 301) के तहत एक समानांतर प्रक्रिया चल रही है और उसके नतीजों के आधार पर वहां का टैरिफ ढांचा नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत को प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले मिलने वाली तरजीही पहुंच इसी नए टैरिफ ढांचे का हिस्सा होगी।

अमेरिकी राजदूत गोर बोले- ‘बड़े मुद्दे तय, डील के बहुत करीब’
अमेरिका की ओर से भी यही संकेत मिले हैं। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने गुरुवार को दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा, “बड़ी तस्वीर, बड़ा ढांचा और बड़े मुद्दे तय हो चुके हैं।” उन्होंने कहा कि दोनों देश समझौते को अंजाम तक पहुंचाने के बहुत करीब हैं। गोर ने माना कि कुछ छोटे मुद्दों पर अभी बातचीत जारी है और लंबी बातचीत के दौरान तकनीक में बदलाव जैसे कुछ नए मुद्दे भी सामने आए हैं।
गोर के मुताबिक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीयर और पीयूष गोयल के बीच कई दौर की बातचीत हुई है, जिनमें अलग-अलग उत्पादों और टैरिफ की दरों तक पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा, “भारत में 1.4 अरब लोग हैं। यह एक जटिल देश है और हम भी जटिल हैं, इसलिए सब कुछ रातोंरात तय नहीं हो सकता।”

रुबियो के भारत दौरे से ठीक पहले आई खबर
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर के बीच भारत और उज्बेकिस्तान के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे सरकार और कारोबार जगत के नेताओं से ऊर्जा सहयोग, व्यावसायिक निवेश और आर्थिक संबंधों पर बात करेंगे। भारत में उनका कार्यक्रम मुंबई और जामनगर में है।
रूसी तेल पर फैसला भी अहम
बातचीत में एक पेच रूसी तेल को लेकर भी है। अमेरिका में पास हुए एक नए कानून के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगा सकते हैं। गोर ने कहा कि यह कानून किसी एक देश को निशाना बनाकर नहीं लाया गया है, बल्कि इसका मकसद रूस पर दबाव बढ़ाकर यूक्रेन युद्ध खत्म कराना है। उन्होंने कहा कि इस पर दोनों देशों में बात चल रही है और राष्ट्रपति ट्रंप अगले कुछ दिनों में फैसला करेंगे।
फरवरी के फ्रेमवर्क से 50% टैरिफ घटकर 18% हुआ था
दोनों देशों ने इस साल फरवरी में अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क पर सहमति जताई थी। इसके बाद ज्यादातर भारतीय सामान पर लगा 50% का दंडात्मक अमेरिकी टैरिफ घटकर 18% पर आ गया था। भारत बातचीत में अपने निर्यातकों के लिए कम शुल्क की मांग कर रहा है, लेकिन कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को बचाकर रखना चाहता है। गोयल पहले ही कह चुके हैं कि गेहूं, चावल, मक्का और सोयामील जैसे उत्पादों पर शुल्क में कोई रियायत नहीं दी जाएगी, ताकि भारतीय किसानों को अमेरिकी उपज से सीधी टक्कर न झेलनी पड़े।
टैरिफ के बावजूद अमेरिका को निर्यात 11% बढ़ा
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान भारत से अमेरिका को माल निर्यात 11.1% बढ़कर 50.81 अरब डॉलर पर पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 45.73 अरब डॉलर था। इसी दौरान अमेरिका से आयात करीब 26% बढ़कर 25.66 अरब डॉलर से 32.33 अरब डॉलर हो गया। इस वजह से अमेरिका के साथ भारत का व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस), यानी निर्यात और आयात का अंतर, एक साल पहले के 20.07 अरब डॉलर से घटकर 18.48 अरब डॉलर रह गया। अमेरिका अब भी भारतीय सामान का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है।
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निर्यातकों और युवाओं के लिए क्यों अहम है यह डील
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। अगर इस समझौते के तहत भारतीय सामान को प्रतिस्पर्धी देशों से कम शुल्क पर अमेरिकी बाजार मिलता है, तो इसका सीधा फायदा भारतीय निर्यातकों को होगा। गोयल की शर्त भी यही है कि समझौता तभी लागू हो, जब भारत को यह बढ़त मिले। टैरिफ में स्थिरता आने से निर्यात करने वाली कंपनियों के लिए लंबे ऑर्डर लेना और आगे की योजना बनाना आसान होता है। इसका असर निर्यात से जुड़े उद्योगों के कारोबार और वहां मिलने वाले रोजगार पर भी पड़ता है।
EU के साथ FTA पर दिसंबर में दस्तखत
गोयल ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर भी बड़ा अपडेट दिया। PTI के मुताबिक उन्होंने कहा कि भारत-EU FTA पर दिसंबर में हस्ताक्षर होंगे और यह फरवरी या मार्च 2027 से लागू हो जाएगा। ऐसे में अमेरिका और EU, दोनों बड़े बाजारों के साथ भारत के व्यापार समझौतों पर अगले कुछ महीनों में बड़ी प्रगति हो सकती है।
अब सबकी नजर इस पर है कि कानूनी ड्राफ्टिंग पूरी होने के बाद भारत और अमेरिका कब इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर करते हैं और भारतीय सामान पर अमेरिकी टैरिफ की नई दरें क्या होंगी।
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