अक्टूबर 24, 2026
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Neha Bora Peace Bond: HC से याचिका खारिज, बोलीं- बॉन्ड पर साइन नहीं करूंगी

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के एक दिन बाद ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने शनिवार, 24 अक्टूबर को साफ कहा कि वह ₹10,000 के पीस बॉन्ड (शांति बनाए रखने का मुचलका) पर हस्ताक्षर नहीं करेंगी। उसी दिन वह मंदिर मार्ग थाने में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश हुईं, जहां मजिस्ट्रेट ने पुलिस को सभी दस्तावेज उनके वकील को देने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी।

पटना में एक कार्यक्रम के मंच पर माइक से संबोधित करतीं AISA अध्यक्ष नेहा बोरा
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा पटना में एक कार्यक्रम के दौरान (सितंबर 2026, फाइल फोटो)। फोटो: Hindustan Samachar / Wikimedia Commons (CC BY 4.0)

इससे पहले शुक्रवार, 23 अक्टूबर को जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने बोरा की वह याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने 17 अक्टूबर को जारी नोटिस को चुनौती दी थी। फैसला सुनाते हुए जज ने कहा, “मैं इस स्तर पर रिट याचिका खारिज कर रहा हूं।” साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि कार्यवाही में जिस भी सामग्री पर भरोसा किया गया है, वह पूरी की पूरी बोरा को दी जाए। यह जानकारी LiveLaw, Bar & Bench और टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्टों पर आधारित है।

नोटिस क्या था और क्यों जारी हुआ

दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट पर SEM ने 17 अक्टूबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 130, साथ में धारा 135(3) के तहत नोटिस जारी किया था। इसमें बोरा से पूछा गया था कि जांच की अवधि तक शांति बनाए रखने के लिए उनसे एक जमानती के साथ ₹10,000 का निजी मुचलका क्यों न भरवाया जाए। धारा 126 मजिस्ट्रेट को यह अधिकार देती है कि अगर किसी व्यक्ति के शांति भंग करने की विश्वसनीय सूचना हो, तो उससे ऐसा बॉन्ड भरवाया जा सके। कानून के जानकारों के मुताबिक यह कार्रवाई सजा नहीं, बल्कि एहतियाती (preventive) प्रकृति की होती है।

यह नोटिस 16 अक्टूबर की घटना के अगले दिन आया। उस दिन बोरा को मंडी हाउस के पास एहतियातन हिरासत में लिया गया था, जब वह कनॉट प्लेस में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में शामिल होने जा रही थीं। यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले आंदोलन का हिस्सा था, जो मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहा है। बोरा को 17 अक्टूबर की तड़के रिहा कर दिया गया था।

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टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक कार्यवाही 16 अक्टूबर को मंडी हाउस पर कथित नारेबाजी, निषेधाज्ञा के बावजूद जंतर-मंतर के आसपास बार-बार प्रदर्शन और कनॉट प्लेस के प्रदर्शन में लोगों को शामिल होने के लिए कथित तौर पर उकसाने के आरोपों से जुड़ी है। ये आरोप पुलिस के हैं; बोरा ने हाईकोर्ट में नोटिस को अस्पष्ट, तथ्यात्मक रूप से गलत और बिना ठोस आधार वाला बताया था।

हाईकोर्ट ने क्या कहा

अदालत ने माना कि SEM का नोटिस “महज सुनी-सुनाई बातों” पर आधारित नहीं था। जस्टिस प्रसाद ने दर्ज किया कि मजिस्ट्रेट ने तीन जनरल डायरी एंट्री, 17 अक्टूबर के कलंदरे और तीन गवाहों की जांच की थी, जो धारा 126 और 130 की जरूरतें पूरी करती हैं। अदालत ने यह भी कहा कि इस चरण पर SEM को “तथ्य खोजने वाली संस्था की तरह जांच करने” की जरूरत नहीं है और अगर हालात ऐसे हों कि आगे भी ऐसी घटनाओं की आशंका हो तो “एक घटना भी काफी है।”

बोरा की दलील थी कि वह मंडी हाउस पर जुटी थीं, जो निषेधाज्ञा के दायरे में नहीं आता। अदालत ने यह दलील नहीं मानी और कहा कि 24 अगस्त को BNSS की धारा 163 के तहत जारी आदेश बाराखंभा रोड और तिलक मार्ग थानों के पूरे क्षेत्र पर लागू था, जिसमें मंडी हाउस भी आता है। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि रिकॉर्ड के मुताबिक बोरा ने चेतावनी के बावजूद इस आदेश का उल्लंघन किया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने यह भी नोट किया कि बोरा का नाम दिल्ली पुलिस की छह FIR में है।

दिल्ली में मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन का साइन बोर्ड
दिल्ली का मंडी हाउस इलाका, जहां 16 अक्टूबर को नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया था (प्रतीकात्मक, फाइल फोटो)। फोटो: Superfast1111 / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

हालांकि अदालत ने बोरा के लिए कुछ सुरक्षा उपाय भी तय किए। जस्टिस प्रसाद ने कहा कि SEM अंतिम आदेश देते समय सुप्रीम कोर्ट के तय दिशानिर्देशों का ध्यान रखेंगे और यह भी विचार करेंगे कि बॉन्ड शुरुआत में ही भरवाना जरूरी है या जांच के दौरान। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि जांच के अलग-अलग चरणों में, और अंतिम आदेश के बाद भी, बोरा के पास कानूनी उपाय अपनाने के कई मौके रहेंगे।

अदालत में किसने क्या दलील दी

गुरुवार, 22 अक्टूबर की सुनवाई में बोरा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि SEM ने स्वतंत्र विवेक लगाए बिना नोटिस जारी किया और इसे “कट एंड पेस्ट” काम बताया। पुलिस के इस आरोप पर कि बोरा ने बिना अनुमति तिरंगा फहराया, उन्होंने कहा कि नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं है। याचिका में इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण असहमति दबाने के लिए एहतियाती शक्तियों का दुरुपयोग बताया गया था।

दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने याचिका की सुनवाई योग्यता पर सवाल उठाया और कहा कि नोटिस जारी करते समय SEM के सामने पर्याप्त सामग्री थी और उन्होंने सोच-समझकर फैसला लिया था। अदालत ने अंततः पुलिस की इस दलील से सहमति जताई।

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‘किसकी शांति बनाए रखने को कहा जा रहा है?’

शनिवार को CPI(ML) लिबरेशन के संसदीय कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोरा ने कहा, “हमारी कोई शर्त नहीं है। हम बॉन्ड पर साइन नहीं करेंगे।” द हिंदू (PTI) के अनुसार उन्होंने सवाल किया, “मुझसे किसकी शांति बनाए रखने को कहा जा रहा है?” उनका कहना था कि सड़क पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है और सरकार से सवाल पूछने को शांति के लिए खतरा नहीं माना जा सकता।

बोरा के वकील अभिक चिमनी ने कहा कि हाईकोर्ट ने नोटिस के खिलाफ चुनौती भले खारिज कर दी हो, लेकिन यह अहम मानदंड तय किया है कि शांति भंग की आशंका जताने के लिए जिस सामग्री पर भरोसा किया गया, वह उन्हें दी जाए। उन्होंने बताया, “आज हमने SEM को फैसला दिखाया और उन्होंने हमें सारे दस्तावेज दे दिए। अगली सुनवाई से पहले हम उनकी जांच करेंगे।”

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आगे क्या होगा

अब 29 अक्टूबर को SEM के सामने बोरा अपना लिखित जवाब दाखिल कर सकती हैं। मजिस्ट्रेट को तय करना है कि बॉन्ड भरवाने का आदेश दिया जाए या नहीं। धारा 135(3) के तहत अगर मजिस्ट्रेट जांच पूरी होने तक बॉन्ड भरने का निर्देश देते हैं और व्यक्ति बॉन्ड नहीं भरता, तो कानून में जांच पूरी होने तक हिरासत का प्रावधान है। हालांकि अभी तक ऐसा कोई आदेश नहीं हुआ है और मामला केवल कारण बताओ नोटिस के चरण में है।

यह मामला इस बहस को फिर केंद्र में ले आया है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की पुलिस की जिम्मेदारी और प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार के बीच संतुलन कहां हो। हाईकोर्ट ने फिलहाल पुलिस की कार्यवाही को कानून के मुताबिक माना है, लेकिन बोरा को आरोपों की पूरी जानकारी और जवाब का मौका सुनिश्चित किया है। अंतिम फैसला SEM की जांच के बाद ही होगा।

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