अक्टूबर 25, 2026
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Karwa Chauth 2026: करवा चौथ 29 अक्टूबर को, आपके शहर में कब निकलेगा चांद?

करवा चौथ पर दीये की रोशनी में छलनी थामे सजी-धजी महिला

Karwa Chauth 2026 कब है? इस साल करवा चौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर को रखा जाएगा। द्रिक पंचांग के मुताबिक, नई दिल्ली में इस दिन चांद रात 8:17 बजे निकलेगा और करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक, यानी 1 घंटा 17 मिनट रहेगा। दिल्ली में व्रत सुबह 6:31 बजे से चांद निकलने तक, करीब 13 घंटे 46 मिनट का होगा।

करवा चौथ पर दीये की रोशनी में छलनी थामे सजी-धजी महिला
करवा चौथ का व्रत शाम को छलनी से चांद देखकर और अर्घ्य देकर खोला जाता है (फाइल फोटो, 2021)। फोटो: Soham1992Sanyal / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

करवा चौथ कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। उत्तर भारत में सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए सूर्योदय से चांद निकलने तक निर्जला व्रत रखती हैं, यानी इस दौरान अन्न और पानी दोनों नहीं लिए जाते। रात में चांद को देखकर और उसे अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है, इसलिए हर साल सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल यही होता है कि आज चांद कितने बजे निकलेगा।

28, 29 या 30 अक्टूबर? तारीख को लेकर उलझन क्यों

करवा चौथ उसी दिन रखा जाता है, जिस दिन चांद निकलने के वक्त कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि चल रही हो, क्योंकि व्रत चांद को अर्घ्य देकर ही पूरा होता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात 1:06 बजे शुरू होगी और उसी दिन रात 10:09 बजे खत्म होगी।

इसका मतलब है कि 28 अक्टूबर की शाम जब चांद निकलेगा, तब तृतीया तिथि होगी, जबकि 30 अक्टूबर की शाम तक चतुर्थी खत्म हो चुकी होगी। 29 अक्टूबर को देश के बड़े शहरों में चांद शाम 7:47 बजे से रात 9 बजे के बीच निकलेगा, जो चतुर्थी खत्म होने से पहले का समय है। इसलिए पूरे देश में करवा चौथ 29 अक्टूबर, गुरुवार को ही है।

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आपके शहर में कब निकलेगा चांद

चांद हर शहर में एक साथ नहीं निकलता। पूर्व के शहरों में यह पहले और पश्चिम व दक्षिण के शहरों में बाद में दिखता है। द्रिक पंचांग के मुताबिक, बड़े शहरों में कोलकाता में चांद सबसे पहले शाम 7:47 बजे और मुंबई में सबसे देर से रात 9:00 बजे निकलेगा। 15 प्रमुख शहरों का समय नीचे दिया गया है।

शहरचांद निकलने का समयपूजा मुहूर्त
नई दिल्लीरात 8:17 बजेशाम 5:38 – 6:56 बजे
चंडीगढ़रात 8:12 बजेशाम 5:38 – 6:55 बजे
लुधियानारात 8:16 बजेशाम 5:41 – 6:59 बजे
देहरादूनरात 8:08 बजेशाम 5:33 – 6:51 बजे
जयपुररात 8:28 बजेशाम 5:46 – 7:03 बजे
लखनऊरात 8:06 बजेशाम 5:26 – 6:43 बजे
वाराणसीरात 8:02 बजेशाम 5:19 – 6:36 बजे
पटनारात 7:52 बजेशाम 5:10 – 6:27 बजे
कोलकातारात 7:47 बजेशाम 5:01 – 6:17 बजे
भोपालरात 8:31 बजेशाम 5:44 – 7:00 बजे
अहमदाबादरात 8:52 बजेशाम 6:04 – 7:20 बजे
मुंबईरात 9:00 बजेशाम 6:07 – 7:22 बजे
हैदराबादरात 8:41 बजेशाम 5:46 – 7:01 बजे
बेंगलुरुरात 8:55 बजेशाम 5:54 – 7:08 बजे
चेन्नईरात 8:44 बजेशाम 5:43 – 6:57 बजे
स्रोत: द्रिक पंचांग (29 अक्टूबर 2026, स्थानीय समय)

ध्यान रहे, अलग-अलग पंचांग और मोबाइल ऐप में चांद निकलने का समय कुछ मिनट आगे-पीछे दिख सकता है, क्योंकि उनके गणना करने के तरीके में थोड़ा फर्क होता है। ऊंची इमारतों, पेड़ों या बादलों की वजह से चांद आसमान में नजर आने में तय समय से कुछ देर भी लग सकती है।

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करवा और छलनी का महत्व

द्रिक पंचांग के मुताबिक, करवा चौथ को ‘करक चतुर्थी’ भी कहा जाता है। ‘करवा’ या ‘करक’ मिट्टी के उस छोटे घड़े को कहते हैं, जिससे चांद को जल यानी अर्घ्य दिया जाता है। पूजा में करवे का खास महत्व है और इसे दान भी किया जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और उनके परिवार, जिसमें भगवान गणेश भी शामिल हैं, की पूजा करती हैं। चौथ माता की पूजा भी की जाती है।

करवा चौथ की पूजा के लिए घेरा बनाकर बैठी महिलाएं, बीच में पूजा की थालियां और करवे
करवा चौथ की शाम महिलाएं घेरा बनाकर बैठती हैं, कथा सुनती हैं और एक-दूसरे को थाली घुमाकर फेरी की रस्म निभाती हैं (फाइल फोटो, 2019)। फोटो: CSG-Info / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

शाम की पूजा में महिलाएं समूह में बैठकर करवा चौथ की व्रत कथा सुनती और सुनाती हैं। सबसे प्रचलित कथा वीरावती और उसके सात भाइयों की है। इस दिन महिलाएं मेहंदी समेत सोलह शृंगार करती हैं। चांद निकलने पर उसे अर्घ्य देकर और पूजा के बाद ही व्रत खोला जाता है।

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उसी दिन संकष्टी चतुर्थी भी

करवा चौथ के दिन ही संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी पड़ता है, जो भगवान गणेश को समर्पित है। द्रिक पंचांग के मुताबिक, महाराष्ट्र और कुछ दूसरे इलाकों में इस दिन वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है, जिसमें गणेश के वक्रतुंड रूप की पूजा होती है।

गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में चलने वाले अमांत कैलेंडर में इस समय आश्विन महीना माना जाता है, जबकि उत्तर भारत के पूर्णिमांत कैलेंडर में कार्तिक। यानी सिर्फ महीने का नाम बदलता है, करवा चौथ की तारीख सभी राज्यों में एक ही रहती है। करवा चौथ का चलन दक्षिण भारत के मुकाबले उत्तर भारत के राज्यों में ज्यादा है।

बाजार में बिक्री के लिए रखी करवा चौथ की सजी हुई छलनियां
करवा चौथ से पहले बाजारों में सजी छलनियां और करवे बिकने लगते हैं (फाइल फोटो, 2023)। फोटो: Suyash.dwivedi / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

करवा चौथ के चार दिन बाद अहोई अष्टमी का व्रत आता है, जो माताएं संतान की खुशहाली के लिए रखती हैं। जो महिलाएं इस बार पहली बार करवा चौथ का व्रत रख रही हैं, वे अपने शहर के स्थानीय पंचांग से चांद निकलने और पूजा का समय एक बार जरूर मिला लें।

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