लेंटर डाला और 2 घंटे में ढह गया मकान! हर्ष विहार में मलबे में दबे मजदूर?

नई दिल्ली: रविवार को दिन में पहली मंजिल का लेंटर डाला गया, शाम पांच बजे तक काम चला और करीब दो घंटे बाद पूरा लेंटर भरभराकर नीचे आ गिरा। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हर्ष विहार स्थित मिलन गार्डन में एक निर्माणाधीन मकान के स्लैब ढहने के बाद रात भर NDRF, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस और सिविल डिफेंस की टीमें मलबे में लोगों को तलाशती रहीं। मकान मालिक के परिवार ने दो मजदूरों के दबे होने की आशंका जताई है, लेकिन हताहतों की आधिकारिक संख्या अभी सामने नहीं आई है।

कब और कैसे हुआ हादसा?
टाइम्स ऑफ इंडिया और लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली फायर सर्विस को शाम करीब 6:45-6:46 बजे मिलन गार्डन में मकान गिरने की कॉल मिली। पहले दो और फिर हालात देखते हुए कुल 5 फायर टेंडर मौके पर भेजे गए। PTI के मुताबिक पुलिस को भी करीब 7 बजे सूचना मिली। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार चार एंबुलेंस भी मौके पर बुलाई गईं।
- जगह: मिलन गार्डन, हर्ष विहार, उत्तर-पूर्वी दिल्ली
- समय: रविवार, 25 अक्टूबर 2026, शाम करीब 6:45 बजे
- क्या गिरा: पुराने एक मंजिला मकान के ऊपर बन रही मंजिल का लेंटर (स्लैब)
- बचाव में जुटे: NDRF (डॉग स्क्वॉड के साथ), दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, सिविल डिफेंस और DDMA की टीमें
- हताहत: आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
पुलिस ने क्या कहा?
एडिशनल DCP संदीप लांबा ने आजतक और नवभारत टाइम्स को बताया, “असली बिल्डिंग एक पुरानी, एक मंजिला बिल्डिंग थी। ऊपर एक और मंजिल बनाई जा रही थी। ये इलाका पूरी तरह से घिरा हुआ है, जिससे ये पता लगाना भी मुश्किल हो रहा है कि असल में कौन सी बिल्डिंग गिरी है।”
उन्होंने आगे कहा, “NDRF अपनी डॉग स्क्वॉड और दूसरे रिसोर्स लेकर आ गई है। अभी तक किसी को बचाया नहीं गया है। नीचे लोगों के फंसे होने की संभावना है, लेकिन अभी कुछ भी कन्फर्म नहीं है।”
दैनिक जागरण के मुताबिक जिला पुलिस उपायुक्त राहुल अलवाल ने बताया कि मिलन गार्डन में करीब 200 गज के प्लॉट पर अवैध रूप से मकान बनाया जा रहा था। भू-तल पहले से बना था और रविवार को पहली मंजिल का लेंटर डाला गया था, जिसका काम शाम पांच बजे तक चला। रिपोर्ट के अनुसार हर्ष विहार थाना पुलिस मकान मालिक से पूछताछ कर रही है।
कमजोर लेंटर पर डाला नया लेंटर?
मिलन गार्डन RWA के अध्यक्ष आशुतोष त्यागी ने नवभारत टाइम्स से कहा कि नीचे का लेंटर कमजोर था और उसके ऊपर नया लेंटर डाला जा रहा था। उनके मुताबिक पहले नीचे का लेंटर टूटा और फिर ऊपर का पूरा नया लेंटर नीचे आ गिरा। टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए साइट पर काम करने वाले एक व्यक्ति ने भी कहा कि हादसे से ठीक पहले नई छत का स्लैब डाला गया था।
ध्यान दें: हादसे की असली वजह की आधिकारिक जांच रिपोर्ट अभी नहीं आई है। ऊपर लिखी बातें स्थानीय लोगों और RWA के बयान हैं।

मलबे में कितने लोग? अब तक क्या पता
लाइव हिंदुस्तान के मुताबिक इमारत लंबे समय से खाली थी और हादसे के वक्त ज्यादातर मजदूर जा चुके थे, लेकिन मकान मालिक ने दो मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई। दैनिक जागरण ने अपनी रिपोर्ट में मलबे से एक मजदूर का शव बरामद होने की बात कही है। हालांकि पुलिस, फायर सर्विस या NDRF की ओर से मृतकों या घायलों की कोई आधिकारिक संख्या अभी जारी नहीं की गई है। NCI इस खबर को अपडेट करता रहेगा।
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार संकरे रास्तों की वजह से बचाव कार्य में दिक्कत आई। मौके से सामने आए एक वीडियो में बचावकर्मी मोबाइल टॉर्च की रोशनी में “कोई है?” पुकारते दिखे। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मलबा हटाने में टीमों की मदद करते रहे।
बड़ा सवाल: अवैध निर्माण पर निगरानी कहां?
दिल्ली में पुराने और कमजोर ढांचों पर बिना मंजूरी के नई मंजिलें खड़ी करना कोई नई बात नहीं है। हर्ष विहार का यह हादसा फिर सवाल उठाता है कि रिहायशी गलियों में चल रहे ऐसे निर्माण पर नगर निगम की नजर क्यों नहीं पड़ती, और लेंटर डालने से पहले नीचे के ढांचे की मजबूती की जांच कौन करता है।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
हर्ष विहार में मकान कब गिरा?
दिल्ली फायर सर्विस को रविवार, 25 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 6:45-6:46 बजे मिलन गार्डन में मकान गिरने की सूचना मिली।
हादसे की वजह क्या बताई जा रही है?
स्थानीय लोगों और RWA के मुताबिक पुराने कमजोर लेंटर के ऊपर नया लेंटर डाला गया था, जिससे दोनों स्लैब ढह गए। आधिकारिक जांच रिपोर्ट अभी नहीं आई है।
क्या कोई मलबे में दबा है?
मकान मालिक ने दो मजदूरों के दबे होने की आशंका जताई है। एक रिपोर्ट में एक शव बरामद होने की बात कही गई है, लेकिन हताहतों की आधिकारिक संख्या अभी जारी नहीं हुई है।
(यह खबर दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के बयानों और आजतक, PTI, टाइम्स ऑफ इंडिया, नवभारत टाइम्स, लाइव हिंदुस्तान व दैनिक जागरण की रिपोर्ट्स पर आधारित है। तस्वीरें प्रतीकात्मक हैं, घटनास्थल की नहीं।)






