पहले ‘किडनैपिंग’, फिर मौत का मैसेज! लखनऊ में NEET छात्र की साजिश ऐसे खुली

लखनऊ: पहले बेटे के “अपहरण” का मैसेज, फिर 5 लाख रुपये की फिरौती की मांग और आखिर में फोन पर धमकी कि “बेटे की लाश मुंबई के जंगल से उठा लेना”। हरदोई के एक परिवार के लिए ये 5 दिन किसी बुरे सपने जैसे थे। लेकिन जब लखनऊ पुलिस ने मामले की परतें खोलीं तो सामने आया कि कोई किडनैपर था ही नहीं। पूरी कहानी 17 साल के उसी NEET छात्र ने खुद रची थी, जिसके अपहरण की बात कही जा रही थी। वजह: ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी में चढ़ा करीब 50 हजार रुपये का कर्ज।

क्या है पूरा मामला
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक नाबालिग छात्र मूल रूप से हरदोई जिले का रहने वाला है। वह लखनऊ के आलमबाग स्थित एक निजी कोचिंग संस्थान में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की तैयारी कर रहा था और पारा थाना क्षेत्र की एक कॉलोनी में किराये के कमरे में रहता था।
- 20 अक्टूबर, रात करीब 9:40 बजे: छात्र अचानक लापता हो गया। परिवार ने काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
- इसके बाद: पिता और रिश्तेदारों के पास व्हाट्सऐप पर मैसेज आए, जिनमें 5 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई।
- धमकी: परिजनों के मुताबिक रकम न मिलने पर शाम को पिता को फोन कर कहा गया कि “बेटे की लाश मुंबई के जंगल से उठा लेना”।
- 23 अक्टूबर: छात्र की मां ने पारा थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई।
- खुलासा: पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर छात्र को सकुशल बरामद किया और साजिश का पर्दाफाश किया।
50 हजार के कर्ज से शुरू हुई साजिश
पुलिस जांच में सामने आया कि छात्र ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी में उलझ गया था। पैसे हारने के बाद उस पर करीब 50 हजार रुपये की देनदारी हो गई। उधारी चुकाने का कोई रास्ता नहीं दिखा तो उसने परिवार से पैसे निकलवाने के लिए खुद के अपहरण और फिरौती की पूरी कहानी रच डाली। भास्कर की रिपोर्ट में कथित प्रेम प्रसंग का भी जिक्र है, हालांकि पुलिस ने इस पहलू पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

पुलिस ने कैसे खोली पोल
मामले की गंभीरता को देखते हुए पारा थाने के प्रभारी निरीक्षक सुरेश सिंह ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, यानी मोबाइल और मैसेज से जुड़ी तकनीकी जानकारी के आधार पर जांच शुरू की। पुलिस छात्र तक पहुंची और उसे सुरक्षित बरामद कर लिया। पूछताछ में अपहरण की कहानी झूठी निकली। डीसीपी पश्चिम ने मामले का खुलासा किया। छात्र नाबालिग है, इसलिए उसकी पहचान उजागर नहीं की गई है।
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ऑनलाइन गेमिंग की लत: बढ़ते ऐसे मामले
यह कोई पहला मामला नहीं है। अगस्त 2026 में संत कबीर नगर में कक्षा 11 के एक छात्र ने भी ऑनलाइन गेमिंग का कर्ज चुकाने के लिए खुद के अपहरण का नाटक किया था और AI से बनी घायल आंख की तस्वीर पिता को भेजी थी। गोरखपुर में भी ऐसा ही मामला सामने आ चुका है। भारत में 2025 में बने ऑनलाइन गेमिंग कानून के तहत पैसे लगाकर खेले जाने वाले ऑनलाइन गेम्स पर रोक है, फिर भी अवैध बेटिंग ऐप्स और उधार के जाल में किशोर फंस रहे हैं।
माता-पिता के लिए जरूरी सलाह
- बच्चे के मोबाइल पर अचानक बढ़े गेमिंग टाइम, पैसों की मांग या उधार की बात को नजरअंदाज न करें।
- कोचिंग के लिए बाहर रह रहे बच्चों से नियमित बात करें, डांट के बजाय भरोसे का माहौल बनाएं।
- फिरौती या धमकी का कोई भी मैसेज आए तो पैसे भेजने से पहले तुरंत 112 पर पुलिस को सूचना दें।
- तनाव या लत की स्थिति में सरकार की मुफ्त मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन Tele-MANAS 14416 पर संपर्क किया जा सकता है।
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FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
लखनऊ के NEET छात्र ने अपहरण की साजिश क्यों रची?
पुलिस के मुताबिक ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी में करीब 50 हजार रुपये का कर्ज चढ़ गया था, जिसे चुकाने के लिए उसने परिवार से फिरौती मांगी।
छात्र ने कितनी फिरौती मांगी थी?
उसने व्हाट्सऐप पर पिता और रिश्तेदारों से 5 लाख रुपये मांगे थे।
मामला किस थाने का है?
मामला लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र का है। छात्र 20 अक्टूबर की रात लापता हुआ था और 23 अक्टूबर को गुमशुदगी दर्ज हुई।
(यह खबर दैनिक भास्कर की रिपोर्ट और पुलिस द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित है। नाबालिग की पहचान कानूनन गोपनीय रखी गई है।)






