Brazil Election: लूला ने पलटी बाजी, बोलसोनारो बोले- नतीजे मानना असंभव

Brazil Election: ब्राजील की राजनीति में रविवार रात ऐसा उलटफेर हुआ, जो वहां लोकतंत्र की वापसी के बाद से कभी नहीं हुआ था। पहले दौर में पिछड़ने वाले राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने दूसरे दौर (रनऑफ) में दक्षिणपंथी सीनेटर फ्लावियो बोलसोनारो को हराकर चौथी बार राष्ट्रपति पद जीत लिया। लेकिन जश्न के बीच फ्लावियो ने नतीजे मानने से इनकार कर दिया और चुनाव रद्द कराने के लिए कानूनी रास्ता अपनाने का एलान किया।

ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट (TSE) के आधिकारिक नतीजों के मुताबिक लूला को करीब 51.8% वैध वोट मिले, जबकि फ्लावियो को करीब 48.2%। TSE के अध्यक्ष कासियो नुनेस मार्केस ने कहा कि 6.4 करोड़ से ज्यादा वोटों के साथ लूला दोबारा चुने गए हैं और 5 जनवरी 2027 से शुरू होने वाले कार्यकाल के लिए ब्राजील के 40वें राष्ट्रपति होंगे। समाचार एजेंसी AP के मुताबिक जीत का अंतर करीब 44 लाख वोट रहा।
पहले दौर में हारे, दूसरे में रचा इतिहास
4 अक्टूबर को हुए पहले दौर में कोई भी उम्मीदवार 50% का आंकड़ा पार नहीं कर पाया था। तब फ्लावियो करीब 47% वोट के साथ आगे थे और लूला करीब 45% पर अटक गए थे। ब्रिटिश अखबार द गार्डियन के मुताबिक पहले दौर में लूला करीब 22 लाख वोटों से पीछे रहे थे, लेकिन तीन हफ्ते बाद उन्होंने यह अंतर पलटकर 40 लाख से ज्यादा वोटों की बढ़त बना ली। गार्डियन के मुताबिक 1980 के दशक में लोकतंत्र बहाल होने के बाद यह पहला मौका है, जब पहले दौर में दूसरे नंबर पर रहा उम्मीदवार रनऑफ जीता है।
लूला खेमे की रणनीति साफ थी: अपने वोटरों को बूथ तक लाना। पहले दौर में मतदान से दूर रहने वालों की दर रिकॉर्ड 21.08% थी, जो गार्डियन के मुताबिक दूसरे दौर में घटकर 19.21% रह गई। लूला के समर्थक अक्सर मतदान केंद्रों से दूर रहते हैं, इसलिए कम मतदान का नुकसान सबसे ज्यादा उन्हीं को हुआ था। मंगलवार को लूला 81 साल के हो जाएंगे। फैक्टरी मजदूर और ट्रेड यूनियन नेता से राष्ट्रपति बने लूला 2002 में पहली बार जीते थे और 2022 में फ्लावियो के पिता, पूर्व राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो को हराकर सत्ता में लौटे थे।
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‘नतीजे मानना असंभव’: बोलसोनारो खेमे का दावा क्या है
नतीजों के बाद ब्रासीलिया में करीब पांच मिनट के बयान में फ्लावियो बोलसोनारो ने कहा, “नतीजों को मान्यता देना असंभव है।” उन्होंने कहा कि उनकी कानूनी टीम चुनाव रद्द कराने की मांग करेगी। उनकी आपत्ति मतदान का समय दो घंटे बढ़ाने के फैसले पर है। ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट (STF) के जज क्रिस्टियानो जानिन ने शाम 5 बजे की तय समय-सीमा पूरी होने के ठीक बाद देशभर में मतदान शाम 7 बजे तक बढ़ाने का आदेश दिया था। फ्लावियो ने इसे “खेल के बीच में खेल के नियम बदलना” बताया और कहा कि जानिन पहले लूला के वकील रह चुके हैं।

तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। ब्राजील के बड़े न्यूज पोर्टल G1 और BBC ब्राजील के मुताबिक मतदान का समय बढ़ाने की मांग दोनों खेमों ने की थी। लूला की टीम ने कई राज्यों के शहरों में मुफ्त सार्वजनिक परिवहन की बसें कम चलने की शिकायत की थी, जबकि फ्लावियो की टीम ने दक्षिणी राज्यों में भारी बारिश का हवाला देकर कुछ इलाकों में समय बढ़ाने को कहा था। गार्डियन के मुताबिक फ्लावियो ने अपने बयान में इस बात का जिक्र नहीं किया।
उधर TSE अध्यक्ष कासियो नुनेस मार्केस, जिन्हें खुद जायर बोलसोनारो ने नियुक्त किया था, ने कहा कि उन्हें पूरी चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा पर “पूरा भरोसा” है। उन्होंने दोनों उम्मीदवारों को फोन भी किया। ब्राजीली पत्रिका Exame के मुताबिक वहां के चुनावी कानून में पूरे चुनाव को रद्द करने का प्रावधान तभी लागू होता है, जब गड़बड़ी आधे से ज्यादा वैध वोटों को प्रभावित करे। 1989 के बाद से कभी कोई राष्ट्रपति चुनाव इस तरह दोबारा नहीं कराना पड़ा है। फिलहाल अदालत में ऐसी किसी याचिका पर कोई फैसला नहीं आया है।
यह विवाद इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि 2022 में हार के बाद जायर बोलसोनारो ने भी नतीजे नहीं माने थे। बाद में उन्हें तख्तापलट की साजिश के मामले में दोषी ठहराया गया और गार्डियन के मुताबिक वे 27 साल की सजा काट रहे हैं, फिलहाल ब्रासीलिया में नजरबंद हैं।
जीत के बाद लूला ने क्या कहा
साओ पाउलो में समर्थकों से भरे हॉल में लूला ने कहा कि वे ब्राजील के सभी 21.5 करोड़ लोगों के लिए सरकार चलाएंगे। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक उन्होंने दावा किया कि उनके अभियान ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए हुए विदेशी दखल को हराया है और ऐसे प्लेटफॉर्म पर नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चलाने के तरीके में बदलाव होगा और फैसलों में लोगों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी।
मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम, उरुग्वे के राष्ट्रपति यामांदू ओरसी, पैराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेन्या और बोलीविया के राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज समेत कई नेताओं ने लूला को बधाई दी। गार्डियन ने इस नतीजे को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी झटका बताया है, क्योंकि बोलसोनारो परिवार उनका अहम सहयोगी माना जाता है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह नतीजा
लूला का दोबारा चुना जाना भारत के लिए निरंतरता का संकेत है। इसी साल फरवरी में लूला राजकीय यात्रा पर भारत आए थे। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लूला ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 30 अरब डॉलर तक ले जाने पर सहमति जताई थी। 2025 में दोनों देशों का व्यापार पहली बार 15 अरब डॉलर के पार गया था। मोदी ने तब कहा था कि ब्राजील लैटिन अमेरिका में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।

उस यात्रा में रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स पर समझौते हुए थे, जो चीन पर निर्भरता घटाने की भारत की कोशिश के लिहाज से अहम हैं। ब्राजील लौह अयस्क का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है। ब्राजील की विमान कंपनी एम्ब्रेयर भारत में अपने E175 रीजनल जेट की असेंबली लाइन लगाने जा रही है, और दोनों देशों की नौसेनाएं स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के रखरखाव में सहयोग पर बात कर रही हैं। दोनों देश BRICS के संस्थापक सदस्य हैं और संयोग से आज से ही भारत की संसद 12वें BRICS संसदीय फोरम की मेजबानी कर रही है।
फरवरी में लूला ने भारत और ब्राजील को ग्लोबल साउथ के दो सबसे बड़े लोकतंत्र बताया था। अब उनकी जीत के साथ भारत-मर्कोसुर व्यापार समझौते के विस्तार, ऊर्जा, रक्षा और दवाओं के कारोबार पर चल रही बातचीत को आगे बढ़ने का रास्ता खुला दिख रहा है। हालांकि फ्लावियो की कानूनी चुनौती पर ब्राजील की अदालतें क्या रुख अपनाती हैं, इस पर अगले कुछ दिनों तक सबकी नजर रहेगी।






