अक्टूबर 28, 2026
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59 लाख वोटर, 90 लाख कार्ड! आर. अशोक ने लगाया ₹20 करोड़ के घोटाले का आरोप

भाजपा का पटका पहने कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक माइक के सामने

बेंगलुरु में 59 लाख वोटर, लेकिन छपे 90 लाख वोटर आईडी कार्ड? कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने बुधवार को यही सवाल उठाते हुए राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) और कांग्रेस सरकार पर करीब 20 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया। बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने टेंडर से जुड़े दस्तावेज जारी किए और पूरे मामले की CBI जांच की मांग की।

भाजपा का पटका पहने कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक माइक के सामने
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक, 28 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में भाजपा के एक कार्यक्रम के दौरान। फोटो: @RAshokaBJP / X

क्या है पूरा मामला

ये कार्ड ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के तहत आने वाले पांच नगर निगमों के चुनाव के लिए छपवाए गए ‘स्टेट वोटर आइडेंटिटी कार्ड’ (SVIC) हैं। ये चुनाव आयोग (ECI) के EPIC कार्ड से अलग हैं, जिन्हें राज्य निर्वाचन आयोग स्थानीय निकाय चुनावों के लिए जारी करता है।

अशोक के मुताबिक, भारत निर्वाचन आयोग ने 14 मई 2026 को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का ऐलान किया। इसके अगले ही दिन, 15 मई को राज्य निर्वाचन आयोग ने कार्ड छपाई का टेंडर निकाला और 29 मई को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया। उनका सवाल है कि जब SIR के बाद नई वोटर लिस्ट बननी थी, तो पुराने लोकसभा चुनाव की सूची के आधार पर कार्ड क्यों छापे गए।

एक लिस्टेड कंपनी Atishay Limited ने मई में शेयर बाजार (BSE) को बताया था कि उसे गुंडल बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ कंसोर्टियम में कर्नाटक राज्य निर्वाचन आयोग से GBA के पांच नगर निगमों के लिए SVIC छपाई का एक साल का रेट कॉन्ट्रैक्ट मिला है।

31 लाख ‘अतिरिक्त’ कार्डों पर सवाल

अशोक का दावा है कि SIR के बाद जारी सूची में बेंगलुरु में करीब 59 से 60 लाख मतदाता ही बचे हैं, जबकि 90 लाख कार्ड छापे जा चुके हैं। “बाकी 30-31 लाख लोग कौन हैं, जिनके लिए आपने कार्ड छापे? इन्हें किसे बांटेंगे?” उन्होंने PTI के मुताबिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछा। उनके अनुसार ये कार्ड करीब चार महीने पहले छपकर नगर निगम दफ्तरों में पहुंच चुके हैं और अब तक बांटे नहीं गए।

सिंगल टेंडर, बिना वेरिफिकेशन: अशोक के आरोप

  • टेंडर एक ही बोली (सिंगल टेंडर) पर दिया गया और वित्त विभाग के नियमों का पालन नहीं हुआ।
  • नियमों के तहत घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन और फोटो लेना जरूरी था, लेकिन ऐसा किए बिना कार्ड छाप दिए गए।
  • जब ECI पहले से वोटर आईडी (EPIC) देता है, तो राज्य आयोग के अलग कार्ड की जरूरत और उसकी वैधता पर भी उन्होंने सवाल उठाया।
  • राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि चुनाव SIR के बाद की सूची पर होंगे, फिर भी पुरानी सूची से कार्ड छपे।

अशोक ने कांग्रेस पर GBA चुनाव में फर्जी वोटिंग की तैयारी का आरोप लगाया और कहा, “आप दूसरों पर वोट चोरी का आरोप लगाते हैं, लेकिन असली वोट चोर आप हैं।” उन्होंने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को चुनौती दी कि वे कोई भी एक विधानसभा क्षेत्र चुनकर ये कार्ड बांटकर दिखाएं। अशोक ने CBI जांच के साथ वोटर लिस्ट की जांच के लिए SIT बनाने की भी मांग की।

रकम को लेकर अलग-अलग आंकड़े

अशोक ने अपने बयान में 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की बात कही, जबकि PTI की रिपोर्ट में प्रोजेक्ट की कीमत करीब 19 करोड़ रुपये बताई गई है। मतदाताओं की संख्या भी अलग-अलग रिपोर्ट में 59.09 लाख से 59.97 लाख के बीच बताई गई है। ये सभी आंकड़े अशोक के दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सरकार और आयोग का क्या कहना है

बुधवार शाम तक इन आरोपों पर कर्नाटक सरकार या राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। प्रतिक्रिया आने पर यह खबर अपडेट की जाएगी।

अशोक इससे पहले बेंगलुरु में कचरा प्रबंधन के 133 करोड़ रुपये के टेंडर पर भी सवाल उठा चुके हैं और उसकी लोकायुक्त जांच की मांग कर चुके हैं।

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