Ambulance Shock: चलती एंबुलेंस का दरवाजा खुला, स्ट्रेचर समेत सड़क पर गिरा मरीज; ड्राइवर को 90 सेकंड तक पता ही नहीं चला

पिंपरी-चिंचवड़: अस्पताल से रवाना हुई एक एंबुलेंस का पिछला दरवाजा अचानक खुला और एक मरीज स्ट्रेचर समेत व्यस्त सड़क पर जा गिरा। एंबुलेंस आगे बढ़ती रही और ड्राइवर को करीब डेढ़ मिनट तक पता ही नहीं चला कि गाड़ी में मरीज नहीं है। महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड़ की इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों में गुस्सा है और अस्पताल प्रशासन ने ड्राइवर व संबंधित कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
ससून अस्पताल ले जाया जा रहा था मरीज
मरीज एक बेघर व्यक्ति था, जिसका यशवंतराव चव्हाण मेमोरियल (YCM) अस्पताल में संक्रामक बीमारी का इलाज चल रहा था। YCM में पर्याप्त सुविधाएं न होने के कारण उसे पुणे के ससून जनरल अस्पताल रेफर किया गया था। साथ में कोई परिजन नहीं था, इसलिए एक पुलिसकर्मी को एंबुलेंस में साथ भेजा गया।
एंबुलेंस अस्पताल के मुख्य गेट से निकली ही थी कि उसका पिछला दरवाजा खुल गया और स्ट्रेचर फिसलकर सड़क पर आ गिरा। गनीमत रही कि पीछे से आ रहे किसी वाहन ने टक्कर नहीं मारी।

राहगीर बने सहारा
सड़क पर मौजूद लोगों ने तुरंत मरीज को स्ट्रेचर समेत किनारे किया। करीब 90 सेकंड बाद एंबुलेंस लौटी। स्थानीय लोगों ने पूरी घटना मोबाइल पर रिकॉर्ड की और ड्राइवर से सवाल-जवाब भी किए। वीडियो में ड्राइवर और वार्ड बॉय एक-दूसरे पर दोष मढ़ते दिखाई देते हैं। आगे की सीट पर बैठे पुलिसकर्मी ने बताया कि पीछे का दरवाजा ठीक से बंद नहीं किया गया था। मरीज को वापस अस्पताल ले जाया गया।
शुरुआती जांच में तीन बड़ी चूक
- स्ट्रेचर के पहिए ठीक से लॉक नहीं किए गए थे।
- जिस वार्ड बॉय को मरीज के पास रहना था, वह आगे ड्राइवर के बगल वाली सीट पर बैठा था।
- पिछला दरवाजा सुरक्षित तरीके से बंद नहीं था, इसलिए स्ट्रेचर खिसककर दरवाजे से टकराया और दरवाजा खुल गया।
अस्पताल ने क्या कहा
YCM अस्पताल के डीन डॉ. राजेंद्र वाबले ने कहा कि प्रशासन ने घटना को गंभीरता से लिया है। लापरवाही के आरोप में एंबुलेंस ड्राइवर और संबंधित कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
पत्रकार वरद भातखंडे ने घटना का वीडियो एक्स पर साझा करते हुए सवाल उठाया, “मरीज की सुरक्षा में इस गंभीर चूक की जवाबदेही किसकी है?” यही सवाल अब सोशल मीडिया पर हजारों लोग पूछ रहे हैं। खास तौर पर इसलिए, क्योंकि मरीज बेघर था और उसके साथ कोई अपना नहीं था। उसकी सुरक्षा पूरी तरह अस्पताल और एंबुलेंस स्टाफ के भरोसे थी।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि एंबुलेंस में स्ट्रेचर लॉक करना, दरवाजे की दोबारा जांच करना और मरीज के पास अटेंडेंट का मौजूद रहना केवल नियम नहीं, बल्कि किसी की जान बचाने की बुनियादी शर्तें हैं।


























































































