Hormuz Attack: ओमान के पास टैंकर पर ड्रोन हमला, 2 भारतीय नाविक लापता; दूसरे जहाज के 11 भारतीय कैसे बचे?

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की आंच अब सीधे भारतीय नाविकों तक पहुंच गई है। ओमान के सोहार एंकरेज पर ड्रोन हमले का शिकार हुए तेल टैंकर MT पेट्रो डॉल्फिन के दो भारतीय नाविक लापता हैं। उसी दिन होर्मुज जलडमरूमध्य में एक और टैंकर MT वाल्थेरा पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल गिरा, जिससे जहाज पर आग लग गई। दोनों जहाजों पर 11-11 भारतीय नाविक सवार थे। भारत ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है।
एक दिन, दो टैंकर, 22 भारतीय
| जहाज | क्या हुआ | भारतीय नाविकों की स्थिति |
|---|---|---|
| MT पेट्रो डॉल्फिन | सोहार एंकरेज (ओमान) में ड्रोन हमला | 11 में से 9 सुरक्षित बचाए गए, 2 लापता |
| MT वाल्थेरा (मार्शल आइलैंड्स ध्वज) | होर्मुज जलडमरूमध्य में अज्ञात प्रोजेक्टाइल, जहाज पर आग | सभी 11 सुरक्षित |
केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने एक्स पर बताया कि लापता नाविकों की तलाश के लिए स्थानीय कोस्ट गार्ड खोज और बचाव अभियान चला रहा है।
हम सभी संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय कर रहे हैं, ताकि बचाव प्रयासों को पूरा सहयोग मिले और लापता कर्मियों को सुरक्षित ढूंढने के लिए हर संभव कदम उठाया जाए।
सर्बानंद सोनोवाल, केंद्रीय पोत परिवहन मंत्री

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा
विदेश मंत्रालय (MEA) ने बयान जारी कर कहा कि मस्कट स्थित भारतीय दूतावास स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है और लापता भारतीयों की तलाश व चालक दल की सहायता के लिए ओमानी अधिकारियों और जहाज प्रबंधन कंपनियों के साथ समन्वय कर रहा है।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा भारत सरकार की प्राथमिकता है। क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर बार-बार हो रहे हमले बेहद चिंताजनक हैं और पहले से अस्थिर स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं।
विदेश मंत्रालय, भारत सरकार
मंत्रालय ने तत्काल तनाव कम करने और संवाद व कूटनीति से संघर्ष के समाधान की जरूरत दोहराई। साथ ही कहा कि वाणिज्यिक जहाजों, नाविकों और नागरिक ढांचे पर हमले बंद होने चाहिए और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार नौवहन की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए।
भारत के लिए यह रास्ता क्यों अहम
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। भारत के कच्चे तेल और LPG आयात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। इसके अलावा दुनिया भर के व्यापारिक जहाजों पर काम करने वाले नाविकों में भारतीयों की संख्या बहुत बड़ी है। यानी यहां हर हमला भारत के लिए दोहरी चिंता है: ऊर्जा सुरक्षा भी और अपने नागरिकों की जान भी।
इन हमलों से ठीक पहले 10 अक्टूबर को रियाद हवाई अड्डे पर हुए हमले में भी एक भारतीय नागरिक की जान गई थी और कई घायल हुए थे। लगातार बिगड़ते हालात के बीच अब सबकी नजर लापता दो नाविकों की तलाश पर टिकी है।


























































































